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[2023]शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या होता है? Trading vs Investing in Hindi

यदि आप शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या होता है? जानना चाहते हैं तो यह आर्टिकल आपके लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि इस आर्टिकल में शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग के बारें में आसान शब्दों में बेहतर ढ़ंग से समझाया गया है. लेकिन जब तक इस आर्टिकल को पूरा नहीं पढेंगे तब तक समझना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए उम्मीद है की आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़कर, अच्छे से समझने की कोशिश करेंगे.

trading aur investing kya hai aur dono me kya antar hai?

शेयर मार्केट में दिलचस्वी रखने वाले नए निवेशक हमेशा इस बात को लेकर कंफ्यूजन में रहते हैं की शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या होता है. तो चलिए सबसे पहले जानते हैं की शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या है?

ट्रेडिंग क्या होता है? What’s Trading in Stock Market Hindi

Table of Contents

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग क्या है? इसे जानने से पहले हमें शेयर मार्केट क्या है? यह जानना ज़रूरी है, तो “जहाँ पर कंपनियों के शेयर्स अथवा हिस्सेदारी की ख़रीद या बिक्री होती है उसे शेयर मार्केट(Share Market) या शेयर बाजार कहते हैं.”

अब बात आती है ट्रेडिंग क्या होता है? अगर आसान शब्दों में समझें की ट्रेडिंग का क्या मतलब होता है तो किसी भी वस्तु की सेवा का ख़रीद और बिक्री करके मुनाफ़ा कमाना ही ट्रेडिंग कहलाता है. यदि दूसरे शब्दों में समझें तो शेयर मार्केट में किसी भी कंपनी के शेयर्स को एक दिन से एक वर्ष तक होल्ड करके रखने की प्रक्रिया को ट्रेडिंग कहते हैं.

trading

शेयर बाजार में ट्रेडिंग शार्ट टर्म के लिए होता है इसलिए यह बहुत ही ज्यादा रिस्की होता है, लेकिन अगर आपके पास नॉलेज है और टेक्निकल एनालिसिस की समझ है तो आप मोटा मुनाफ़ा बहुत ही कम समय यानि 5 से 10 मिनट में डे ट्रेडर क्या है कमा सकते हैं. ट्रेडिंग करते समय एक छोटी सी भी ग़लती आपके कैपिटल को ख़त्म कर सकती है.

ट्रेडिंग कितने प्रकार के होते हैं? Types of Trading in Stock Market Hindi

स्टॉक मार्केट(Stock Market) में ट्रेडिंग को मुख्यतः चार पार्ट में डिवाइड किया गया है.

  1. इंट्राडे ट्रेडिंग
  2. स्कैल्पिंग ट्रेडिंग
  3. स्विंग ट्रेडिंग
  4. पोजिसनल ट्रेडिंग

इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है? What’s Intraday Trading in Hindi

इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है? शेयर मार्केट में जब किसी स्टॉक को एक दिन के लिए ख़रीदा और बेचा जाता है तो उसे इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading) कहा जाता है, इंट्राडे ट्रेडिंग में आपको एक ही दिन के अंदर स्टॉक को ख़रीदना और बेचना पड़ता है अगर आपने इंट्राडे ट्रेडिंग में किसी भी एक ही दिन में नहीं बेचा तो आपका ब्रोकर उसे बेच देगा फिर चाहे आपको मुनाफ़ा हुआ रहे या फिर नुकसान. केवल एक दिन में ख़रीदने और बेचने की वजह से इसे डे ट्रेडिंग भी कहा जाता है, इसमें रिस्क और मुनाफ़ा दोनों ही बहुत ही ज्यादा होता है.

Value Investing in Hindi

शेयर मार्केट में जब भी किसी अच्छी कंपनी का शेयर नीचे आता है तो बहुत से इन्वेस्टर उस शेयर को ख़रीदने की सलाह देते हैं जिसे वैल्यू इन्वेस्टिंग कहा जाता है क्योंकि अच्छी कंपनियों का शेयर आज नहीं तो कल अच्छा रिटर्न देता है.

बड़े बड़े इन्वेस्टर वैल्यू इन्वेस्टिंग में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करने को सजेस्ट करते है.

ग्रोथ इन्वेस्टिंग डे ट्रेडर क्या है क्या है? Growth Investing in Hindi

growth investing kya hai

शेयर मार्केट में जब भी किसी कंपनी की ग्रोथ की संभावनाएं ज्यादा होती है तो उसमें इन्वेस्टर लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करते है जिसे ग्रोथ इन्वेस्टिंग कहा जाता है. इसमें प्रायः कंपनी के फण्डामेंटल को देखकर ही निवेश किया जाता है.

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या अंतर है? Trading vs Investing in Hindi

अगर बहुत ही सरल शब्दों में समझें तो ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में मुख्य अंतर यही होता है की ट्रेडिंग में किसी भी शेयर को बहुत ही शार्ट टर्म के लिए ख़रीदा और बेचा जाता है और इन्वेस्टिंग में किसी कंपनी के शेयर को लॉन्ग टर्म के लिए ख़रीदा और बेचा जाता है. इसके अलावा भी आइये जानते है ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या फ़र्क होता है?

Difference between trading and investing in stock market in hindi

ट्रेडिंग इन्वेस्टिंग
शेयर मार्केट में ट्रेडिंग कम समय के लिए होता है जैसे- कुछ मिनट, कुछ घंटे, एक दिन, कुछ हफ़्तों या फिर एक वर्ष तकशेयर मार्केट में इन्वेस्टिंग लॉन्ग टर्म के लिए होता है जैसे- एक वर्ष से कई सालों तक
शेयर मार्केट के किसी भी स्टॉक में ट्रैड करने के लिए स्टॉक बहुत ही कम पैसों में मिल जाता है.इन्वेस्टिंग में किसी शेयर्स को पूरा ख़रीदना पड़ता है क्योंकि वह लंबे समय तक होल्ड पर होता है.
ट्रेडिंग में किसी भी स्टॉक का टेक्निकल एनालिसिस करना होता है जबकिइन्वेस्टिंग में किसी भी स्टॉक का फंडामेंटल एनालिसिस करना पड़ता है.
ट्रेडिंग में ट्रेडर बहुत ही कम समय में बहुत ही ज्यादा पैसा कमाते है.इन्वेस्टिंग में इन्वेस्टर डे ट्रेडर क्या है को ज्यादा रिटर्न पाने के लिए लंबे समय तक शेयर को होल्ड करके रखना पड़ता है.
इसमें जितना कम समय में अच्छा मुनाफ़ा होता है उतने ही कम समय में पैसा भी डूब जाता है. यानी रिस्क ज्यादा होता है.इसमें इन्वेस्टर लॉन्ग टर्म के लिए किसी भी स्टॉक को होल्ड करके रखता है इसलिए पैसे डूबने का रिस्क बहुत ही कम हो जाता है.
ट्रेडिंग में कम समय के अन्दर किसी भी स्टॉक को ख़रीदने और बेचने वालों को ट्रेडर कहा जाता है.इन्वेस्टिंग में लंबे समय तक किसी भी स्टॉक को होल्ड रखने वालों को इन्वेस्टर कहा जाता है.

चेतावनी- फाइनेंसियल संगम किसी भी स्टॉक में निवेश करने की सलाह नहीं देता. शेयर बाजार जोख़िम भरा निवेश है इसलिए किसी भी कंपनी के शेयर में निवेश करने से पहले ख़ुद से रिसर्च करें या अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें.

तो दोस्तों आशा करते हैं की शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या है और शेयर मार्केट में ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या अंतर क्या होता है पसंद आया होगा, ऐसे ही अधिक जानकारियों के लिए फाइनेंसियल संगम पर आते रहें और ट्विटर पर फॉलो ज़रूर करें.

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IDFC First Bank, एक्सिस बैंक समेत इन पांच शेयरों पर लगाए दांव, कम समय में होगी अच्छी कमाई

हाल के दिनों में एक्सिस बैंक के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। हालांकि, एक्सपर्ट इस स्टॉक में और तेजी का अनुमान लगा रहे हैं।

Alok Kumar

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Updated on: December 12, 2022 14:35 IST

शेयरों में अच्छी तेजी - India TV Hindi

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शेयर बाजार में बीते कुछ दिनों से गिरावट का दौर जारी है। भारतीय बाजार में यह गिरावट वैश्विक मार्केट पर दबाव के कारण देखने को मिल रहा है। मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इस पूरे सप्ताह बाजार में उठा-पटक देखने को मिल सकती है क्योंकि कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम आने वाले दिनों में बाजार पर असर डालेंगे। आपको बता दें कि आज खुदरा महंगाई के आंकड़े आएंगे। वहीं, 14 दिसंबर को अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व, 15 दिसंबर को बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपियन सेंट्रल बैंक इंटरेस्ट रेट को लेकर ऐलान करेगा। हालांकि, इस बीच कई ऐसे शेयर हैं जो आपको छोटी अवधि में अच्छी कमाई करा सकते हैं। IIFL सिक्यॉरिटीज के अनुज गुप्ता ने इस हफ्ते पांच शेयरों में निवेश की सलाह दी है। आइए जानते हैं कि वो कैन-कौन से शेयर हैं, उनका टारगेट प्राइस और स्टॉपलॉस क्या है।

1. IDFC First Bank

IIFL सिक्यॉरिटीज ने IDFC First Bank के लिए टारगेट प्राइस 72 रुपये का रखा है। आज यह शेयर 58.85 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, 49 रुपये का स्टॉपलॉस मेंटेन करने की भी सलाह दी गई है। आपको बता दें कि इस स्टॉक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 61.20 रुपये और न्यूनतम स्तर 28.95 रुपये है।

2. ITC

IIFL सिक्यॉरिटीज ने एफएमसजी स्टॉक ITC के लिए टारगेट प्राइस 355 रुपये सेट किया है। आज यह शेयर 342.95 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, 328 रुपये का स्टॉपलॉस लगाने की सलाह दी गई है। आईटीसी का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 361.45 रुपये और न्यूनतम स्तर 207 रुपये है।

3. Indian Oil

IIFL सिक्यॉरिटीज ने Indian Oil के लिए टारगेट प्राइस 87 रुपये सेट किया है। वहीं, 72 रुपये का स्टॉपलॉस मेंटेन करने की सलाह दी है। आज इंडियन ऑयल का शेयर 78.05 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। अगर स्टॉक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर देखें तो 90.70 रुपये और न्यूनतम स्तर 65.20 रुपये है। एक महीने में इस शेयर में 11 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है।

4. Axis Bank

हाल के दिनों में एक्सिस बैंक के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। हालांकि, एक्सपर्ट इस स्टॉक में और तेजी का अनुमान लगा रहे हैं। अनुज गुप्ता ने Axis Bank के लिए 990 रुपये का टारगेट दिया है। वहीं, 887 रुपये का स्टॉपलॉस मेंटेन करने की सलाह दी है। एक्सिस बैंक का शेयर इस समय 938.05 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 945 रुपये है।

5. Exide Industries

Exide Industries के लिए टारगेट प्राइस 220 रुपये दिया गया है। वहीं, 178 रुपये का स्टॉपलॉस मेंटेन करने की सलाह दी गई है। एक्साइड का शेयर इस सयम 190.80 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इस स्टॉक का 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 194.20 रुपये है।

97% तक गिर चुका यह शेयर, अब 19 दिसंबर को कंपनी की होने जा रही नीलामी

हिन्दुस्तान लोगो

हिन्दुस्तान 3 दिन पहले लाइव हिन्दुस्तान

Stock Crash: कर्ज में डूबी अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (Reliance capital) नीलाम होने जा रहा है। दरअसल, कंपनी की एसेट्स के लिए 19 दिसंबर को ई-नीलामी (E auction) प्रोसेस शुरू होगी। इस खबर के बाद आज सोमवार को इंट्रा डे ट्रेड में कंपनी के शेयर 4.72% टूट गए और 10.10 रुपये पर पहुंच गए। आपको बता दें कि यह शेयर लगातार निवेशकों को नुकसान करा रहा है और पांच साल में यह शेयर 97.55% तक गिर चुका है। इस दौरान इसका भाव 411 रुपये से गिरकर 10.10 रुपये पर आ गया। इस साल YTD में यह शेयर 33% तक गिर गया है।

दिवालिया प्रोसेस से गुजर रही कंपनी

आपको बता दें कि कर्जदाताओं ने कंपनी की बोली लगाने वाले बोलीदाताओं के लिए ई-नीलामी के संचालन से संबंधित नियमों एवं प्रक्रिया को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस कैपिटल की एसेट्स के लिए ई-नीलामी 19 दिसंबर को शुरू होगी। इस नीलामी के लिए 5,300 करोड़ रुपये का बेस प्राइस तय किया गया है। कॉस्मिया-पीरामल गठजोड़ ने यह बोली लगाई थी। पहले दौर की नीलामी में बोलीकर्ताओं को आधार मूल्य से अधिक की बोली लगानी होगी।

RBI ने निदेशक मंडल को किया था खारिज

रिलायंस कैपिटल के निदेशक मंडल को पिछले साल नवंबर में रिजर्व बैंक ने बर्खास्त करते हुए नागेश्वर राव वाई को प्रशासक नियुक्त कर दिया था। रिलायंस कैपिटल दिवाला संहिता के तहत नीलामी में जाने वाली तीसरी एनबीएफसी है। इसके पहले श्रेई ग्रुप और डीएचएफएल की नीलामी हो चुकी है।

फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है ? इसके क्या फायदे है? | future trading

फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है

फ्यूचर ट्रेडिंग शेयर मार्केट मे ट्रेडिंग का एक महत्वपूर्ण तरिका है। फ्यूचर ट्रेडिंग का तरिका कई सेग्मेंट मे उपयोग किया जा सकता है। फ्यूचर ट्रेडिंग की लिगल अनुमति सबसे पहले डोज्मि राइस एक्सचेंज ने दी थी। आज लगभग हर एक्सचेंज फ्यूचर ट्रेडिंग का आप्शन देते है। आइये जानते है फ्यूचर ट्रेडिंग के सभी पहलुओं को जिससे की आप भी इसका लाभ उठा सके और फ्यूचर ट्रेडिंग अच्छे से कर सके।

फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है ?

फ्यूचर ट्रेडिंग डेरीटिव ट्रेडिंग का एक प्रकार है फ्यूचर ट्रेडिंग मे भविष्य मे एक पूर्व निर्धारित समय और मूल्य पर एक डेरीवेटिव खरिदने या बेचचचने के लिये कानूनी समझौता होता है। फ्यूचर ट्रेडिंग मे खरीदार और बेचने वाला दोनो पक्षो का दायित्व होता है कि वह निर्धारित समय पर निर्धारित मूल्य और वस्तु एक दुसरे को सोंप दे जिससे की कांट्रेक्ट पुरा हो सके।

फ्यूचर ट्रेडिंग मे पहले से तय मुल्य को फ्यूचर प्राईस और पहले से तय समय को डिलीवरी डेट कहा जाता है। इसमे किसी प्रकार का कोई न्यूनतम अकांउट साईट नही होता है। यदि आप फ्यूचर ट्रेडिंग मे रुची रखते है तो आप इसे कम से कम पैसो मे शुरु कर सकते है।

फ्यूचर ट्रेडिंग की विशेषताएँ

फ्यूचर ट्रेडिंग की अपने आप मे कई सारी खुबिया है जिसके कारण फ्यूचर ट्रेडिंग आज बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। आइये जानते है फ्यूचर ट्रेडिंग की कुछ विशेषताओं को जो निम्नलिखित है.

  1. फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कीमत उसके एसेट्स पर निर्भर करती है यदि एसेट्स की किमत मे बढोतरी होती है तो फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट की कीमत भी बढ जाती है।
  2. फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को अन्य ट्रेडर के साथ डे ट्रेडर क्या है ट्रांसफर किया जा सकता है और ट्रेड किया जा सकता है।
  3. यदि कोई व्यक्ति अपने कान्ट्रेक्ट से बाहर जाना चाहता है तो वह बाहर जा सकता है जिसके लिये उसे पेनल्टी का भुगतान करना होगा।
  4. फ्यूचर ट्रेडिंग दो पक्षो का भष्यि मे होने वाला व्यापार है जिसमे हमेशा दोनो पक्षो द्वारा अपने कान्ट्रेक्ट को पुरा ना करने का डर बना रहता है जिसके लिये सेबी द्वारा इसे रेगुलेट किया जाता है। जिससे कोई भी पक्ष बिच मे सोदा छोड कर नही जाता है।
  5. सेबी द्वारा फ्यूचर ट्रेडिंग को सुचारु रुप से चलाया जाता हे जिसमे डिफाल्ट होने की संभावना ना के बराबर होती है।
  6. फ्यूचर ट्रेडिंग के अपने नियम होते है वह ट्रेड करने वालो के अनुसार नही होता है। यह अपने मानको पर कार्य करता है।
  7. फ्यूचर ट्रेडिंग मे सेटलमेंट का एक समय निश्चित होता हे जिसमे दोनो पक्ष अपने कांट्रेक्ट के अनुसार समय पर कांट्रेक्ट पुरा करते है और इसके लिये भोतिक मुवमेंट की आवश्यकता नही होती है।

फ्यूचर ट्रेडिंग क्या है

उदाहरण

फ्यूचर ट्रेडिंग को थ्योरी के रुप मे समझना थोडा मुश्किल हो सकता है इस लिये अइये हम एक साधारण से उदाहरण से समझते है जिससे आप आसानी से फ्यूचर ट्रेडिंग को पूर्ण रुप से समझ पायेंगे

  • उदाहरण के लिए, ट्रेडर को लगता है कि RIL के शेयर की कीमत कुछ वार्षिक रिपोर्ट के कारण आने वाले भविष्य में बढ़ने वाली है।
  • निवेशक RIL स्टॉक (ऐक्सचेंज पर उपलब्ध) के स्पॉट प्राइस और फ्यूचर प्राईस के लिये जांच करेगा, और दोनों मूल्य एक-दूसरे से संबंधित होंगे।
  • ट्रेडर प्रत्येक 100 शेयर ₹155 पर खरीदता है। इसलिए, लॉट साइज 100 है और कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू ₹15,500 है और एक्सपायरी डेट 31 जून 2021 है।
  • इसका मतलब यह है कि खरीदे जा सकने वाले RIL शेयरों की न्यूनतम संख्या 100 है।
  • जैसे ही मार्जिन मनी खरीदार के मार्जिन खाते में पर्याप्त और प्रतिपक्ष पाया जाता है, निवेश में प्रवेश किया जाता है।
  • अब, 31 जून 2021 की एक्सपायरी डेट तक, अगर RIL के शेयरों की कीमत, ₹170 हो जाती है, तो खरीदार की कीमत में वृद्धि की भविष्यवाणी सही हो जाती है तो वह RIL के शेयरों को ₹155 पर खरीद सकता है जो मार्केट मूल्य से ₹15 कम है । तो, कुल लाभ ₹ (100 * 15) = ₹1500 है। फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के विक्रेता को ₹1500 का नुकसान उठाना पड़ेगा क्योंकि वह मौजूदा मार्केट मूल्य ₹170 होने पर शेयरों को ₹155 पर बेचने के लिए बाध्य होता है।
  • यदि RIL शेयरों की कीमत ₹145 के बजाय कम हो जाती है, तो खरीदार को ₹ (100 * 10) =) ₹1000 का नुकसान उठाना पड़ेगा, क्योंकि उसे ₹155 पर शेयरों को खरीदना होगा जो वर्तमान में ₹145 पर ट्रेडिंग कर रहे हैं। विक्रेता इस मामले में लाभ कमाता है।
  • इस परिदृश्य में जब शेयरों की कीमत कुछ दिनों के बाद बढ़ती है, तो खरीदार एक्सपायरी डेट तक इंतजार नहीं करना चाहेगा क्योंकि तब तक कीमतें फिर से नीचे आ सकती हैं, इसलिए वह फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को ट्रांसफर करके अभी भी निवेश से बाहर निकल सकता है। लाभ के साथ एक और पार्टी और करीबी स्थिति।
  • सोदा समाप्ता होने के परिणामों को सीधे पार्टियों के मार्जिन खातों से डेबिट या क्रेडिट किया जाता है और किसी भी भौतिक निपटान की आवश्यकता नहीं होती है।
  • सोदा समाप्ता होने के परिणामों को सीधे डे ट्रेडर क्या है पार्टियों के मार्जिन खातों से डेबिट या क्रेडिट किया जाता है, जिसमे किसी भी भौतिक निपटान की आवश्यकता नहीं होती है।

फ्यूचर ट्रेडिंग की आवश्यकता

फ्यूचर ट्रेडिंग के बारे मे एक बात तो आपको समझ आ गइ होगी की यह एक भविश्य का सौदा है। सामान्यतः फ्यूचर ट्रेडिंग मे पहले पेसे नही होने के कारण व माल रेडी नही होने के कारण फ्यूचर कांट्रेक्ट होते थे। जिसमे आप आज सोदा करते थे और बाद मे वह निश्चित दाम और माल के लेन देन पर समाप्ता होता था। पंरतु वर्तमान मे सभी सेग्मेंट मे फ्यूचर ट्रेडिंग इसी धारणा के साथ शुरु हुई । फ्यूचर ट्रेडिंग होने के कारण आने वाले भविष्य की किमते और इससे जुडे अनुमान आसानी से मिल जाते है जिससे की जिस सेग्मेंट मे फ्यूचर ट्रेडिंग हो रही है वह स्थिर बना रहता है। परंतु स्पाट ट्रेडिंग के समय ऐसा नही होता था,

फ्यूचर ट्रेडिंग मे आपको कोई न्यूनतम पूंजी की आवश्यकता नही होती है। यह आपके सोदे पर निर्भर करता है , यहां आप अपने ब्रोकर से मार्जिन लेकर भी सोदा कर सकते है जो आपके सोदे की समाप्ती पर ब्रोकर को देना होगा।

फ्यूचर ट्रेडिंग मे रिश्क

फ्यूचर ट्रेडिंग मे जिस प्रकार लाभ कमाने की क्षमता है उसी प्रकार इसमे कई सारे रिश्क भी है। यदि आप पहली बार फ्यूचर ट्रेडिंग कर रहे है तो आपको फ्यूचर ट्रेडिंग से जुडे रिश्क के बारे मे जरुर जानना चाहीये।

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