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Cryptocurrency निवेशकों के लिए बड़ी खबर, टैक्स को लेकर नियम कड़े किए गए

फाइनेंस बिल 2022 पेश करते हुए सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्सेशन संबंधी नियम कड़े करने का ऐलान किया है. अगर डिजिटल असेट में किसी तरह का नुकसान होता है तो दूसरे डिजिटल करेंसी में होने वाली कमाई से उसकी भरपाई नहीं की जा सकती है.

Cryptocurrency निवेशकों के लिए बड़ी खबर, टैक्स को लेकर नियम कड़े किए गए

अपने देश में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को अभी तक कानूनी दर्जा नहीं दिया गया है. रिजर्व बैंक लगातार इसका विरोध (RBI opposing private cryptocurrency) कर रहा है. दूसरी तरफ सरकार ने लोगों के क्रेज और डिजिटल असेट में उनके निवेश को ध्यान में रखते हुए बजट 2022 में इसपर टैक्स लगाने का ऐलान किया. गुरुवार को सरकार ने क्रिप्टो इंडस्ट्री को झटका देते हुए क्रिप्टो निवेश से होने वाले किसी तरह के नुकसान को दूसरे डिजिटल असेट से होने वाली भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी कमाई से भरपाई नहीं करने का ऐलान किया. इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी माइनिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को कॉस्ट के दायरे में नहीं लाया जा सकता है.

1 फरवरी 2022 को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टोकरेंसी रेग्युलेशन को लेकर कुछ नहीं कहा था, लेकिन वर्चुल डिजिटल असेट (Virtual Digital Assets (VDAs) पर 30 फीसदी टैक्स का ऐलान किया गया था. यह टैक्स सभी तरह के डिजिटल असेट पर लागू होता है. इसमें नॉन फंजिबल टोकन यानी NFT, मेटावर्स असेट, डिजिटल करेंसी, डिजिटल टोकन मुख्य रूप से शामिल हैं. बजट घोषणा के मुताबिक, अगर डिजिटल असेट को ट्रांसफर किया जाता है तो 1 फीसदी का TDS अलग से लगेगा.

नुकसान की भरपाई नहीं की जाएगी

गुरुवार को फाइनेंस बिल 2022 पेश करते हुए कहा गया कि डिजिटल परिसंपत्तियों से लाभ के साथ नुकसान की भरपाई से संबंधित खंड से ‘अन्य’ शब्द को हटाने का प्रस्ताव किया है. इसका मतलब है कि ‘वर्चुअल डिजिटल’ संपत्तियों (Virtual Digital Asset) के अंतरण से होने वाले घाटे की अन्य वीडीए के स्थानांतरण से होने वाली आय के जरिए भरपाई की अनुमति नहीं होगी.

हाल के दिनों में वर्चुअल डिजिटल असेट के प्रति बढ़ा है क्रेज

फाइनेंस बिल 2022 के अनुसार ‘वर्चुअल डिजिटल’ संपत्ति कोड या संख्या अथवा टोकन हो सकता है, जिसे ट्रांसफर किया जा सकता है या फिर उसे रखा जा सकता है अथवा इलेक्ट्रॉनिक रूप से व्यापार किया जा सकता है. वीडीए में क्रिप्टोकरेंसी और ‘नॉन फंजिबल टोकन’ (एनएफटी) शामिल है, जिसके प्रति हाल के दिनों में आकर्षण बढ़ा है.

लॉटरी से होने वाली कमाई पर टैक्स जैसे नियम

वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में क्रिप्टो संपत्ति पर आयकर लगाने को लेकर चीजें स्पष्ट की गयी हैं. एक अप्रैल से ऐसे लेन-देन से होने वाली आय पर 30 फीसदी आयकर के साथ उपकर और अधिभार (सेस एंड सरचार्ज) लगाया जाएगा. यह कर ठीक उसी प्रकार से लगेगा, जैसे लॉटरी जैसे सट्टे वाले लेन-देन से होने वाले लाभ पर लगता है. साथ ही, वीडीए के हस्तांतरण से आय की गणना करते समय, किसी भी खर्च (अधिग्रहण की लागत के अलावा) या भत्ते के संबंध में कोई कटौती की अनुमति नहीं दी जाएगी.

डिजिटल करेंसी ट्रांजैक्शन पर लगेगा TDS

बजट में एक साल में 10,000 रुपए से अधिक ऑनलाइन डिजिटल मुद्रा भुगतान पर एक फीसदी टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाने का भी प्रस्ताव है. साथ ही इस प्रकार की संपत्ति उपहार देने पर भी कराधान का प्रस्ताव किया गया है. टीडीएस के लिए सीमा निर्धारित व्यक्तियों के लिए 50,000 रुपए सालाना होगी. इसमें व्यक्ति/हिंदू अविभाजित परिवार शामिल हैं. उन्हें आयकर कानून के तहत अपने खातों का ऑडिट कराने की जरूरत होगी.

1 जुलाई से लागू होगा TDS का नियम

एक फीसदी टीडीएस लगाने का प्रस्ताव एक जुलाई, 2022 से प्रभाव में आएगा. फाइनेंस बिल में संशोधनों में निर्यात-आयात आंकड़ों के प्रकाशन के संदर्भ में जुर्माना प्रावधान को हल्का करने का भी प्रस्ताव है.

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्सेशन को लेकर FAQ पर काम कर रही है सरकार, टैक्स की मुश्किलें होगी दूर

FAQ सूचना के उद्देश्य से होते हैं और इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती है, भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसमें कोई खामी तो नहीं है, विधि मंत्रालय की राय मांगी जा रही है.

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्सेशन को लेकर FAQ पर काम कर रही है सरकार, टैक्स की मुश्किलें होगी दूर

सरकार क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) पर कराधान (Taxation) को लेकर बार-बार पूछे जाने वाले सवालों (FAQ) पर काम कर रही है. एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि एफएक्यू से वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों पर इनकम टैक्स और माल एवं सेवा कर (GST) लगाने के बारे में चीजें स्पष्ट हो सकेंगी. अधिकारी ने कहा कि एफएक्यू के सेट का मसौदा आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और राजस्व विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है. विधि मंत्रालय द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी. अधिकारी ने कहा, क्रिप्टोकरेंसी और वर्चुअल भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी डिजिटल संपत्ति पर कर को लेकर बार-बार पूछे जाने वाले सवालों पर काम चल रहा है.

हालांकि, अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न सूचना के उद्देश्य से होते हैं और इनकी कोई कानूनी वैधता नहीं होती है, लेकिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि इसमें कोई खामी तो नहीं है, विधि मंत्रालय की राय मांगी जा रही है.

अधिकारी ने बताया कि डीईए, राजस्व विभाग और रिजर्व बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि फील्ड कर कार्यालय और क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल मुद्राओं का लेनदेन करने वालों के लिए कराधान के पहलू स्पष्ट हो सकें.

1 अप्रैल से क्रिप्टो एसेट 30 फीसदी टैक्स

वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में क्रिप्टो एसेट्स पर आयकर (Income Tax) लगाने के संबंध में चीजें स्पष्ट की गई हैं. 1 अप्रैल से इस तरह के लेनदेन पर उसी तरह से 30 फीसदी का इनकम टैक्स, उपकर (Cess) और सरचार्ज (Surcharges) लगाया जाएगा जैसा कि टैक्स कानून घुड़दौड़ या अन्य सट्टेबाजी वाले लेनदेन पर लगाता है.

10 हजार से अधिक भुगतान पर 1 फीसदी टीडीएस

बजट 2022-23 में एक साल में वर्चुअल करेंसी से 10,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 1 फीसदी की स्रोत पर टैक्स कटौती (TDS) और इस तरह के उपहारों को प्राप्त करने वालों पर कराधान का भी प्रस्ताव है.

इसके तहत कुछ विशेष व्यक्तियों के लिए टीडीएस की सीमा 50,000 रुपये प्रतिवर्ष होगी. इनमें व्यक्ति/एचयूएफ आदि शामिल हैं जिन्हें अपने खातों का आयकर कानून के तहत ऑडिट कराना होगा.

1 फीसदी टीडीएस का प्रावधान 1 जुलाई, 2022 से लागू होगा, जबकि लाभ पर 1 टैक्स अप्रैल से लगाया जाएगा.

GST के दृष्टिकोण से एफएक्यू से यह स्पष्ट हो सकेगा कि क्रिप्टोकरेंसी वस्तु है या सेवा. अभी क्रिप्टो एक्सचेंजों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है और इसे वित्तीय सेवाओं के रूप में वर्गीकृत किया जाता है.

जीएसटी कानून में क्रिप्टोकरेंसी के वर्गीकरण का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है. कानून के अभाव में ऐसे वर्चुअल डिजिटल करेंसी को रेग्युलेट करने पर वर्गीकरण को इस बात पर ध्यान देना होगा कि क्या लीगल फ्रेमवर्क इसे कार्रवाई योग्य दावे के रूप में वर्गीकृत करता है.

Budget 2022: क्रिप्टोकरेंसी को लेकर क्या है सरकार का प्लान?, Cryptocurrency पर इसलिए लगाया 30% टैक्स

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक 2022-23 में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल रुपया पेश करेगा। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी और अन्य निजी डिजिटल संपत्तियों पर कराधान को स्पष्ट किया। उन्होंने ऐसी संपत्तियों में लेन-देन पर होने वाले लाभ को लेकर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया।

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published on: February 01, 2022 21:03 IST

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Highlights

  • क्रिप्टोकरेंसी से जो आमदनी होती है, हमने उस पर 30% टैक्स लगाया है- वित्त मंत्री
  • RBI 2022-23 में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल रुपया पेश करेगा

नयी दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि क्रिप्टो करेंसी पर विचार-विमर्श जारी है और उसके बाद हम इस पर कायदे-कानून बनाने पर विचार करेंगे। बजट के बाद संवाददाताओं से बातचीत में सीतारमण ने कहा, ‘‘क्रिप्टो करेंसी पर हाल में विचार-विमर्श शुरू किया गया है। इसमें जो निष्कर्ष आता है, उसके आधार पर हम कानून लाने या अन्य किसी प्रस्ताव पर गौर करेंगे।’’

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर मीडिया से बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी से जो आमदनी होती है, हमने उसपर 30 फीसदी का टैक्स लगाया है क्योंकि वो एक तरह की सम्पत्ति (Asset) है। जो डिजिटल करेंसी की बात है, वो आरबीआई जारी करेगी। सीतारमण ने कहा, हम हर ट्रांजैक्शन पर 1% टीडीएस लगाकर उसमें (क्रिप्टो करेंसी) पैसे के हर लेन-देन पर भी नज़र रख रहे हैं। अभी के लिए क्रिप्टो और क्रिप्टो संपत्ति क्या हैं, इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।

वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वर्ष 2022-23 में ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल रुपया (Digital Rupee) पेश करेगा। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी और अन्य निजी डिजिटल संपत्तियों पर कराधान को स्पष्ट किया। उन्होंने ऐसी संपत्तियों में लेन-देन पर होने वाले लाभ को लेकर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया। सीतारमण ने स्पष्ट किया, ‘‘यह कराधान क्रिप्टो करेंसी से जुड़ी गतिविधियों पर लगाया गया है। इसका यह मतलब नहीं है कि इसे कानूनी जामा पहनाया जा रहा है। मुद्रा हर कोई जारी नहीं कर सकता।’’

बजट में रोजगार सृजन से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों को हुनरमंद बनाकर उनकी क्षमता बढ़ा रहे हैं। ईसीएलजीएस (आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना) के तहत गारंटी दायरे को 50,000 करोड़ बढ़ाकर पांच लाख करोड़ रुपये किया जाएगा। साथ ही इसकी समयसीमा बढ़ाकर मार्च, 2023 तक की गई है। अतिरिक्त सहायता विशिष्ट रूप से आतिथ्य और संबंधित उपक्रमों के लिए है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।’’ उन्होंने कहा कि बजट में रक्षा खरीद व्यय का 68 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उद्योगों से खरीद के लिए रखा गया है। साथ ही खाद्य प्रसंस्करण पर जोर दिया जा रहा है। इन सबसे रोजगार के अच्छे अवसर सृजित होंगे।

बजट में आम आदमी की राहत से जुड़े सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा, ‘‘सिर्फ कर की दर कम करना ही लाभ नहीं होता। हमने सस्ते मकानों के लिये सस्ते कर्ज का प्रावधान किया। किसानों के लिये किये गये उपाय, स्टार्टअप के लिये प्रावधान, ईसीएलजीएस की समयसीमा बढ़ाने से आम लोगों को भी लाभ होगा।’’ सरकार की उधारी बढ़ने से निजी क्षेत्र के लिये बाजार में कम पैसा बचने से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि बाजार में नकदी की कमी नहीं है और निजी क्षेत्र को उनकी जरूरत के अनुसार कर्ज के लिये पर्याप्त पैसा है।

सीतारमण ने यह भी कहा कि बजट में जो भी बातें हैं, वह वास्तविक धरातल पर है। जो भी अनुमान जताये गये हैं, वे वास्तविक हैं। कच्चे माल की ऊंची कीमत के सवाल पर उन्होंने कहा कि कच्चे माल की कीमत में वृद्धि से सभी विनिर्माण उद्योगों पर असर नहीं पड़ा है, यह केवल धातु उद्योग कुछ हद तक प्रभावित कर रहा है।

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाने की क्या है वजह? CBDT चेयरमैन ने दी जानकारी

बीते 1 फरवरी को पेश हुए आम बजट में बताया गया है कि क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन डिजिटल संपत्तियां अब टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। इस फैसले की वजह क्या है, इसके बारे में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड.

क्रिप्टोकरेंसी पर टैक्स लगाने की क्या है वजह? CBDT चेयरमैन ने दी जानकारी

बीते 1 फरवरी को पेश हुए आम बजट में बताया गया है कि क्रिप्टोकरेंसी या ऑनलाइन डिजिटल संपत्तियां अब टैक्स के दायरे में आ जाएंगी। इस फैसले की वजह क्या है, इसके बारे में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) चेयरमैन जे बी महापात्र ने विस्तार से जानकारी दी है।

जेबी महापात्र के मुताबिक इससे देश में क्रिप्टो के कारोबार की ‘गहराई’ का पता लगाने, निवेशकों और उनके निवेश की प्रकृति को भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी जानने में मदद मिलेगी। इस कदम का मतलब यह नहीं है कि क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन वैध हो जाएगा। महापात्र ने कहा कि टैक्स अधिकारियों के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश का यह सही समय है।

महापात्र ने कहा, ‘‘विभाग किसी भी लेनदेन की वैधता पर निर्णय नहीं लेता है। आयकर विभाग और आयकर अधिनियम केवल यह देखता है कि आपने जो लेन-देन किये हैं, क्या उससे आय सृजित हुई है या नहीं। हम इसके लिये नहीं हैं कि आय वैध है या नहीं, बल्कि हमारा काम आय पर कर लगाने का है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यही कारण है कि मैं कहूंगा कि नये कानून के तहत क्रिप्टोकरेंसी पर कर लगाना कोई इसे वैध नहीं बनाता. ।’’

राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण का काम जारी: सीबीडीटी प्रमुख महापात्र ने कहा, ‘‘क्रिप्टोकरेंसी के लिये राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण का काम जारी है। आयकर विभाग इस क्षेत्र में ऐसे समय प्रवेश कर रहा है जब नीति पर काम जारी है। ऐसे मैं कहूंगा कि विभाग के लिये इस बाजार में प्रवेश का सही समय है।’’ महापात्र ने कहा कि जब कोई इकाई डिजिटल व्यापार पर किसी लाभ या अधिशेष की घोषणा करती है, तो उन्हें यह भी बताना होता है कि उनके पास निवेश के लिए पैसा कहां से आया है और यदि निवेश उचित और न्यायोचित है, तो अधिशेष पर कर लगाया जाएगा।

वित्त मंत्री ने क्या कहा: आम बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रही है और उससे निकलने वाले निष्कर्ष के आधार पर राष्ट्रीय नीति और नियमन तैयार किये जाएंगे। वित्त मंत्री ने 2022-23 के बजट में क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर कराधान को स्पष्ट किया। उन्होंने ऐसी संपत्तियों में लेन-देन पर होने वाली आय को लेकर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया। साथ ही एक भारत में कराधान और क्रिप्टोकरेंसी सीमा से अधिक के लेन-देन पर एक प्रतिशत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाने का भी प्रस्ताव किया।

क्रिप्टोकरेंसी पर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के प्रमुख ने कही ये बड़ी बात

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर सरकार विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रही है और उससे निकलने वाले निष्कर्ष के आधार पर राष्ट्रीय नीति और नियमन तैयार किये जाएंगे. वित्त मंत्री ने 2022-23 के बजट में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर कराधान को स्पष्ट किया.

February 2, 2022

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) चेयरमैन जे बी महापात्र ने कहा है कि बजट में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) या ऑनलाइन डिजिटल संपत्तियों को कर के दायरे में लाने की घोषणा आयकर विभाग के लिये देश में इस मुद्रा के कारोबार की ‘गहराई’ का पता लगाने, निवेशकों तथा उनके निवेश की प्रकृति को जानने में मददगार होगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम का मतलब यह नहीं है कि क्रिप्टो करेंसी में लेनदेन वैध हो जाएगा. महापात्र ने कहा कि कर अधिकारियों के लिये इस क्षेत्र में प्रवेश का यह सही समय है.

  • क्रिप्टोकरेंसी की कमाई पर 30 फीसदी टैक्स
  • आय पर कर लगाना हमारा काम- महापात्र
  • क्रिप्टोकरेंसी के लिए नीति बनाने का काम जारी
  • कराधान व्यवस्था में मिलेगी ये मदद
  • 10 हजार की ऑनलाइन भुगदान पर 1 फीसदी TDS

क्रिप्टोकरेंसी की कमाई पर 30 फीसदी टैक्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) को लेकर सरकार विभिन्न पक्षों के साथ विचार-विमर्श कर रही है और उससे निकलने वाले निष्कर्ष के आधार पर राष्ट्रीय नीति और नियमन तैयार किये जाएंगे. वित्त मंत्री ने 2022-23 के बजट में क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर कराधान को स्पष्ट किया. उन्होंने ऐसी संपत्तियों में लेन-देन पर होने वाली आय को लेकर 30 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया. साथ ही एक सीमा से अधिक के लेन-देन पर एक प्रतिशत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) लगाने का भी प्रस्ताव किया.

आय पर कर लगाना हमारा काम- महापात्र

महापात्र ने बजट के बाद कहा, ‘‘विभाग किसी भी लेनदेन की वैधता पर निर्णय नहीं लेता है. आयकर विभाग और आयकर अधिनियम केवल यह देखता है कि आपने जो लेन-देन किये हैं, क्या उससे आय सृजित हुई है या नहीं. हम इसके लिये नहीं हैं कि आय वैध है या नहीं, बल्कि हमारा काम आय पर कर लगाने का है. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि मैं कहूंगा कि नये कानून के तहत क्रिप्टोकरेंसी पर कर लगाना कोई इसे वैध नहीं बनाता.

क्रिप्टोकरेंसी के लिए नीति बनाने का काम जारी

महापात्र ने कहा कि क्रिप्टो करेंसी में कारोबार या डिजिटल संपत्तियों में कारोबार केवल इसलिए वैध नहीं हो जाता कि आपने उस पर कर दिया है. CBDT प्रमुख ने कहा, क्रिप्टोकरेंसी के लिये राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण का काम जारी है. आयकर विभाग इस क्षेत्र में ऐसे समय प्रवेश कर रहा है जब नीति पर काम जारी है. अत: मैं कहूंगा कि विभाग के लिये इस बाजार में प्रवेश का सही समय है.

कराधान व्यवस्था में मिलेगी ये मदद

महापात्र ने कहा कि जब कोई इकाई डिजिटल व्यापार पर किसी लाभ या अधिशेष की घोषणा करती है, तो उन्हें यह भी बताना होता है कि उनके पास निवेश के लिए पैसा कहां से आया है और यदि निवेश उचित और न्यायोचित है, तो अधिशेष पर कर लगाया जाएगा. उन्होंने कहा, कराधान व्यवस्था से हमें यह जानने में भी मदद मिलेगी कि क्या निवेश गलत तरीके से किया गया है या अवैध है.

10 हजार की ऑनलाइन भुगदान पर 1 फीसदी TDS

बजट में एक साल में 10,000 रुपये से अधिक ऑनलाइन डिजिटल मुद्रा भुगतान पर एक प्रतिशत टीडीएस लगाने का भी प्रस्ताव है. साथ ही इस प्रकार की संपत्ति उपहार देने पर भी काराधान का प्रस्ताव किया गया है. टीडीएस के लिये सीमा निर्धारित व्यक्तियों के लिये 50,000 रुपये सालाना होगी. इसमें व्यक्ति/हिंदू अविभाजित परिवार शामिल हैं. उन्हें आयकर कानून के तहत अपने खातों का ऑडिट कराने की जरूरत होगी.

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