एक सोसाइटी को पंजीकृत करने के लिए, निम्नलिखित मानदंडों को पूरा क���ना होगा:

मरीज़ के साथ महिला डॉक्टर की एक फ़ाइल फ़ोटो

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प्रधानमंत्री आवास योजना ऑनलाइन फॉर्म 2022-23

प्रधानमंत्री आवास योजना ऑनलाइन फॉर्म 2022-23 उन लोगों के लिए है जो केंद्र सरकार की हाउसिंग फॉर ऑल (सभी के लिए आवास योजना) का लाभ लेना चाहते हैं। वो लोग प्रधानमंत्री आवास योजना ऑनलाइन पंजीकरण 2022-2023 के जरिए आवास इकाई के लिए आवेदन कर सकते हैं और प्रधानमंत्री आवास योजना फॉर्म भर सकते हैं।

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'मेरे पास भागने का ही विकल्प था'

"एक दिन हमारे समाज के एक बुज़ुर्ग ने मुझे मेरे दोस्तों के साथ बाहर देख लिया और मेरी माँ से कहा कि उनमें से एक लड़का मेरा ब्वॉयफ़्रेंड था. उसके बाद हमारे समाज में काफ़ी अफ़वाहें फैलने लगी."

उसके बाद उस लड़की के माता-पिता ने उसके कौमार्य जाँच की बात कही.

उस लड़की ने बताया, "मेरे माता-पिता और वो परिवार जहां मेरी शादी की बात चल रही थी, सबने कहा कि पहले मुझे कौमार्य जाँच करवानी होगी ताकि पता चल सके कि मैं वर्जिन हूँ और तभी शादी होगी."

"मैं डरी हुई थी और मुझे इसका मतलब भी समझ नहीं आया. मुझे लगा कि भागना ही मेरे पास एकमात्र विकल्प है और मैंने वही किया."

प्रिया मनोटा कर्मा निरवाना की हेल्पलाइन देखती हैं.

उन्होंने बताया, "हमारे पास कई लड़कियों के कॉल आए हैं जो इसको लेकर चिंतित हैं. शायद इसलिए कि उनके परिवार को पता चल गया कि वे किसी रिलेशनशिप में हैं या वे वर्जिन नहीं हैं. शायद उनके परिवार उन पर इस जाँच के लिए दबाव डाल रहे हैं और उन्हें नतीजे को लेकर चिंता है."

फ़ेक किट

बीबीसी को ये भी पता चला कि 50 पाउंड में हायमन रिपेयर किट ऑनलाइन मिल रहे हैं और उनका दावा है कि उससे वर्जिनिटी वापस आ जाएगी.

ऐसी ही एक किट 104 पाउंड में हमने ख़रीदी जो जर्मनी विकल्प समुदाय पर जाँच करें से आई थी. इस किट में 60 मिलीलीटर वजाइना टाइट करने वाले जेल थे, प्लास्टिक के टविज़्ज़र, एक ब्लड कैप्सूल और तीन छोटे पैकेट जिनमें फ़ेक विकल्प समुदाय पर जाँच करें ब्लड था. किट पर इस्तेमाल के लिए कोई निर्देश नहीं लिखा था.

स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉक्टर अशफ़ाक़ ख़ान को कई बार कौमार्य जाँच और हायमन रिपेयर के अनुरोध विकल्प समुदाय पर जाँच करें मिलते हैं.

उन्होंने बताया, "मुझे ये समझ नहीं आता कि ये अब तक विकल्प समुदाय पर जाँच करें ब्रिटेन में ग़ैर-क़ानूनी क्यों नहीं हुआ. इसे ग़ैर-क़ानूनी बनाया जाना चाहिए."

"पहले तो ये बात ही ग़लत है कि अगर हायमन पूरा नहीं है तो इसका मतलब है कि लड़की वर्जिन नहीं है. ये कई वजहों से फट हो सकता है. अगर मैं कहता हूँ कि 'ये फटा हुआ है और मुझे इसको रिपेयर करना पड़ेगा' और उसके बाद एक सर्टिफ़िकेट दे सकता हूँ तो इसका मतलब है कि मैं एक ग़लत सर्टिफ़िकेट दे रहा हूँ."

'अपने समाज को शिक्षित कीजिए'

देश और दुनिया की बड़ी ख़बरें और उनका विश्लेषण करता समसामयिक विषयों का कार्यक्रम.

दिनभर: पूरा दिन,पूरी ख़बर

डॉक्टर अशफ़ाक़ का मानना है कि इस प्रथा के ख़िलाफ़ और कदम उठाने की ज़रूरत है.

उन्होंने न्यूज़बीट से कहा, "उसी तरह जैसे ख़तना के मुद्दे को उठाया जाता है, दुनिया भर के नेता इस समस्या पर बात कर रहे हैं."

"विकल्प समुदाय पर जाँच करें मेरे लिए तो ये एक अपराध है और हम अपने आप को एक ऐसी प्रक्रिया से जोड़ रहे हैं जो नैतिक रूप से सही नहीं है."

इस साल की शुरुआत में 'मिडल ईस्टर्न विमन ऐंड सोसाइटी' ने कौमार्य जाँच को बैन करवाने के लिए कैम्पेन चलाया था.

इसकी संस्थापक हलालेह तहेरी ने कहा, "हम हायमन रिपेयर को भी बंद करवाना चाहते हैं लेकिन लोगों को इस पर बिना शिक्षित किए बैन करवाना फ़ायदे से ज़्यादा नुक़सान करेगा. ये प्रथाएँ अब भी इसलिए चल रही हैं क्योंकि वर्जिनिटी को लेकर अब भी लोगों की सोच बहुत पिछड़ी है."

समाज का अनुपालन

इसके पंजीकरण के बाद एक ट्रस्ट निम्नलिखित करेगा:

  • पैन कार्ड प्राप्त करें
  • एक बैंक खाता खोलें
  • बहीखाता और लेखा
  • वार्षिक आईटी बुरादा
  • दुकानें और स्थापना लाइसेंस - रोजगार के मामले में
  • व्यावसायिक कर पंजीकरण, यदि लागू हो
  • जीएसटी पंजीकरण, यदि लागू हो
  • रजिस्ट्रार ऑफ फ़र्म के साथ अनुपालन - एजीएम रिज़ॉल्यूशन का फाइलिंग, खातों का खुलासा किया जाना और सदस्य सूची को फर्मों के रजिस्ट्रार के पास दाखिल करना।

कर छूट की प्रयोज्यता

एक सामान्य धारणा है कि समाज को कर का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वे बड़े पैमाने पर जनता के कल्याण के लिए काम करते हैं। पर ये सच नहीं है। एक समाज, किसी भी अन्य कानूनी इकाई की तरह, कर का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। कर से मुक्त होने के लिए, एक सोसायटी को आयकर अधिकारियों से धारा 12 ए, 80 जी आदि जैसी छूट के लिए प्रमाणन प्राप्त करना आवश्यक है।

20 विकल्प समुदाय पर जाँच करें दिन

बस हमें अपने व्यवसाय के बारे में थोड़ा बताएं और आपके पास 20 कार्य दिनों (सरकारी अनुमोदन के अधीन) में पंजीकृत ट्रस्ट विलेख होगा। यह इत्ना आसान है। आपके अलावा, हम इस महीने लगभग 400 अनुरोधों को संभालेंगे।

9.1 ग्राहक स्कोर

हम सरकार के साथ आपकी बातचीत को उतना ही सहज बनाते हैं जितना आपके लिए सभी कागजी कार्रवाई करके संभव है। हम यथार्थवादी अपेक्षाओं को निर्धारित करने की प्रक्रिया पर भी आपको स्पष्टता प्रदान करेंगे।

विशिष्ट मामलों में मौत की सजा के विकल्प के तौर पर 14 साल से अधिक की निश्चित अवधि की सजा दी जा सकती है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्याय के लिए पीड़ितों की याचिका और दोषियों के पुनर्वास न्याय के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने के लिए उपयुक्त मामलों में 14 साल से अधिक की निश्चित अवधि की सजा को लागू किया जा सकता है।

जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि यह निश्चित अवधि की सजा केवल हाईकोर्टया इस न्यायालय द्वारा हो सकती है, न कि ट्रायल कोर्ट द्वारा।

इस मामले में निचली अदालत ने मृतक के 'विश्वसनीय कर्मचारी' रहने वाले आरोपियों को मौत की सजा सुनाई थी।

मेजर जनरल कैलाश चंद ढींगरा (केसी ढींगरा) और उनकी पत्नी श्रीमती संगीता ढींगरा, जो वृद्ध विकल्प समुदाय पर जाँच करें दंपत्ति थे, को आरोपियों ने सोते समय मार डाला। हाईकोर्ट ने मौत की सजा की पुष्टि करने से इनकार कर दिया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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