Foreign Currency Reserves: देश के विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट ने दिलाई 2013 के Taper Tantrum की याद!

Foreign Currency Reserves Update: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अक्टूबर 2021 के 642 अरब डॉलर के लेवल से घटकर अब 550 अरब डॉलर रह गया है.

By: ABP Live | Updated at : 19 Sep 2022 07:04 PM (IST)

Edited By: manishkumar

Taper Tantrum In 2022: भारतीय रिजर्व बैंक ( Reserve Bank Of India) विदेशी निवेशकों (Foreign Investors) की बिकवाली के चलते घरेलू करेंसी ( Domestic Currency) में आई कमजोरी को थामने के लिए लगातार अपने विदेशी मुद्रा भंडार ( Forex Reserve) से डॉलर को बेचने में जुटा है. जिस प्रकार रुपये को थामने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Currency Reserve )का इस्तेमाल कर रहा है इसने 2013 की याद दिला दी है. उस समय भी आरबीआई ने रुपये में गिरावट को रोकने के लिए अपने कोष का इस्तेमाल किया था और डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी गिरावट आने से रोका था.

6 महीने में 38.8 डॉलर घटा कोष
शुक्रवार 17 सितंबर, 2022 को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक मौजूदा वर्ष 2022 में जनवरी से लेकर जुलाई के बीच आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार से 38.8 अरब डॉलर बेचा. जिसमें केवल जुलाई महीने में आरबीआई ने 19 अरब डॉलर बेच डाला. अगस्त में भी यही हुआ जब रुपया पहली बार एक डॉलर के मुकाबले 80 रुपये के लेवल के नीचे चला गया. आरबीआई का फॉरवर्ड डॉलर होल्डिंग अप्रैल के 64 अरब डॉलर से घचकर 22 अरब डॉलर के लेवल पर आ गया है.

टेपर टैंट्रम की दिलाई याद
2013 में भी आरबीआई ने जून से सितंबर के बीच 13 अरब डॉलर अपने विदेशी मुद्रा भंडार से बेच डाला था. तब मई 2013 में, यूएस फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया था कि वह अपने बांड-खरीद कार्यक्रम पर रोक लगाएगा जो कि वैश्विक वित्तीय संकट के परिणामस्वरूप वैश्विक स्टॉक और बॉन्ड में अचानक बिकवाली के बाद से चल रहा था. इसका अर्थ ये था कि फेडरल रिजर्व अंधाधुंध धन की आपूर्ति बंद कर देगा. जब यूएस सेंट्रल बैंक ने ये कहा तब माना गया कि ब्याज दरें वापस ऊपर की ओर बढ़ेंगी. जिसके बाद निवेशकों ने माना कि अब उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बने रहने की आवश्यकता नहीं है, तो उन्होंने रातों-रात अपना पैसा निकाल लिया. इसे टेपर टैंट्रम (Taper Tantrum) का नाम दिया गया. तब भी विदेशी निवेशकों के बिकवाली के चलते रुपया कमजोर पड़ गया था. आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा कोष से डॉलर की बिकवाली की थी.

11 महीने में 92 अरब डॉलर की कमी
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अक्टूबर 2021 के 642 अरब डॉलर के लेवल से घटकर अब 550 अरब डॉलर रह गया है. डॉलर की बिकवाली से तो कोष में कमी आई है साथ ही यूरो और येन जैसे करेंसी में भी गिरावट से विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ा है. बहरहाल विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और आयात में बढ़ोतरी के बावजूद हमारे पास अगले 9 महीनों के आयात करने के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है. 2013 में टेपर टैंट्रम के दौरान केवल 7 महीने के आयात के लिए विदेशी मुद्रा भंडार बचा था.

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Published at : 19 Sep 2022 06:54 PM (IST) Tags: Reserve Bank of India forex reserve foreign currency reserve foreign investors Federal Reserve Taper Tantrum In 2022 Taper Tantrum हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

विदेशी मुद्रा में विनिमय करते समय किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए?

जब भी हम विदेश यात्रा पर जाते हैं विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है और हम उसका विनिमय भी करते हैं। पासपोर्ट, वीसा तो इसके लिए मूलभूत जरूरत हैं ही। इसके अलावा भी कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहले अहम तो यह होता है कि आप जिस

जब भी हम विदेश यात्रा पर जाते हैं विदेशी मुद्रा की जरूरत होती है और हम उसका विनिमय भी करते हैं। पासपोर्ट, वीसा तो इसके लिए मूलभूत जरूरत हैं ही। इसके अलावा भी कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहले अहम तो यह होता है कि आप जिस मुद्रा में विनिमय करने जा रहे हैं उसकी दर विदेशी मुद्रा समय क्या है क्या है, इसका पता होना चाहिए। इस दर को जानने के कई तरीके हैं।

आप अखबार में देख सकते हैं। रिजर्व बैंक की साइट पर देख सकते हैं। इसके अलावा कई ऑनलाइन साइट भी विभिन्न मुद्राओं की जानकारी देते हैं। दो तरह की दरें होती हैं, खरीद दर और बिक्री दर। खरीद दर यानी जब आप विदेशी मुद्रा खरीदते हैं। बिक्री दर यानी जिस दर पर आपसे विदेशी मुद्रा खरीदी जाएगी। खरीद दर अमूमन बिक्री दर से कम होती है।

आपको यह भी पता होना चाहिए कि एक समय में आप कितनी विदेशी मुद्रा खरीद सकते हैं या उसे संचित कर सकते हैं। रिजर्व बैंक के नियमों के मुताबिक विदेश यात्रा के समय आप 10,000 डॉलर मूल्य की विदेशी मुद्रा अपने पास रख सकते हैं। विदेश में पढ़ाई के लिए आप 1,00,000 डॉलर की विदेशी मुद्रा का विनिमय कर सकते विदेशी मुद्रा समय क्या है हैं। इलाज के लिए बाहर जा रहे हैं तो भी एक लाख डॉलर ले जा सकते हैं। कारोबारी दौरे पर हैं तो यह सीमा 25 हजार डॉलर की है।

मेरी सलाह है कि आप किसी भी गैर अधिकृत डीलर से विनिमय नहीं करें। किसी अधिकृत डीलर या फिर बैंक से ही विदेशी मुद्रा खरीदें या बेचें। हां, इनके यहां आपको कुछ अतिरिक्त फीस देनी होगी। केवाइसी नियमों का भी पालन करना होगा। इसके बावजूद ये ज्यादा सुरक्षित होते हैं। बेहतर होगा कि आप कुछ डीलरों के यहां पूछताछ कर उनकी फीस की जानकारी ले लें। कई बार आसपास स्थित डीलरों की विनिमय दर व अन्य फीस में अंतर
होती है।

अंत में मेरी सलाह यह है कि जहां तक जरूरी हो विदेशी मुद्रा कार्ड का इस्तेमाल करें। आजकल बाजार में कई तरह के विदेशी करेंसी कार्ड मौजूद हैं। ये बेहद सुरक्षित हैं। बाहर ले जाने पर अगर आपके कार्ड में पैसे खत्म हो जाते हैं तो आप आसानी से इसमें और राशि डाल सकते हैं। हां, करेंसी कार्ड का इस्तेमाल कैसे करें, इन पर शुल्क कितना लगता है आदि की जानकारी भी हासिल कर लें। करेंसी कार्ड का एटीएम में इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इस पर बहुत ज्यादा शुल्क लगा दिया जाता है। इस तरह के कार्ड का हर काम में इस्तेमाल कर सकते हैं।
वी जॉर्ज एंटोनी
एमडी, यूएई एक्सचेंज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड

विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर , 1991 में रिजर्व घटने पर गिरवी रखना पड़ा था सोना

1991 में जब चंद्रशेखर देश के प्रधानमंत्री बने थे तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था और भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा था

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1991 में जब चंद्रशेखर देश के प्रधानमंत्री बने थे तो देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था और भारत को सोना गिरवी रखना पड़ा था

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 21 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 4.202 अरब डॉलर बढ़कर 398.649 अरब डॉलर हो गई. इस दौरान देश का सोना भंडार 22.958 अरब डॉलर के पूर्वस्तर पर रहा. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से विशेष आहरण अधिकार 42 लाख डॉलर बढ़कर 1.453 अरब डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष के पास देश का भंडार 96 लाख डॉलर बढ़कर 3.354 अरब डॉलर हो गया.

क्या होता है विदेशी मुद्रा भंडार
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां हैं ताकि जरूरत पड़ने पर वह अपनी देनदारियों का भुगतान कर सकें. इस तरह की मुद्राएं केंद्रीय बैंक जारी करता है. साथ ही साथ सरकार और अन्य वित्तीय संस्थानों की तरफ से केंद्रीय बैंक के पास जमा किये गई राशि होती है. यह भंडार एक या एक से अधिक मुद्राओं में रखे जाते हैं. ज्यादातर डॉलर और कुछ हद तक यूरो में विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल होता है. विदेशी मुद्रा भंडार को फॉरेक्स रिजर्व या एफएक्स रिजर्व भी कहा जाता है.

कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा समय क्या है विदेशी मुद्रा भंडार में केवल विदेशी बैंक नोट, विदेशी बैंक जमा, विदेशी ट्रेजरी बिल और अल्पकालिक और दीर्घकालिक विदेशी सरकारी प्रतिभूतियां शामिल होनी चाहिए. हालांकि, सोने के भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर), और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास जमा राशि भी विदेशी मुद्रा भंडार का हिस्सा होता है. यह व्यापक आंकड़ा अधिक आसानी से उपलब्ध है, लेकिन इसे आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय भंडार या अंतर्राष्ट्रीय भंडार कहा जाता है.

देश की इकोनॉमी पर इसका क्या असर होता है?
देश की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम योगदान होता है. इसको इस उदाहरण से समझते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर नवंबर 1990 से जून 1991 तक सात महीनों के लिए वे देश के प्रधानमंत्री रहे. जब विदेशी मुद्रा समय क्या है चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने तब देश की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी.

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हो चुकी थी. राजनीतिक हालात भी अस्थिर थे. भारत की अर्थव्यवस्था भुगतान संकट में फंसी हुई थी. इसी समय रिजर्व बैंक ने 47 टन सोना गिरवी रख कर कर्ज लेने का फैसला किया. उस समय के गंभीर हालात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.1 अरब डॉलर ही रह गया था. इतनी रकम तीन हफ्तों के आयात के लिए भी पूरी नहीं थी.

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डेली अपडेट्स

मुद्रास्फीति दर: बाज़ार मुद्रास्फीति में परिवर्तन मुद्रा विनिमय दरों में परिवर्तन का कारण बनता है। उदाहरण के लिये दूसरे देश की तुलना में कम मुद्रास्फीति दर वाले देश की मुद्रा के मूल्य में वृद्धि देखी जाती है।

    इसमें निर्यात, आयात, ऋण आदि सहित कुल लेन-देन शामिल हैं।

उत्पादों के आयात पर अपने विदेशी मुद्रा कोअधिक खर्च करने के कारण चालू खाते में घाटा, निर्यात की बिक्री से होने वाली आय से मूल्यह्रास का कारण बनता है और यह किसी देश की घरेलू मुद्रा की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को बढ़ावा देता है।

सरकारी ऋण: सरकारी ऋण केंद्र सरकार के स्वामित्व वाला ऋण है। बड़े सरकारी कर्ज वाले देश में विदेशी पूंजी प्राप्त करने की संभावना कम होती है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ जाती है।

इस मामले में,विदेशी निवेशक अपने बॅाण्ड की विक्री खुले बाज़ार में करेंगे, यदि बाज़ार किसी निश्चित देश के भीतर सरकारी ऋण का अनुमान लगाता है। परिणामतः इसकी विनिमय दर के मूल्य में कमी आएगी।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न

प्रिलिम्स:

प्रश्न. भुगतान सन्तुलन के संदर्भ में निम्नलिखित में से किससे/किनसे चालू खाता बनता है? (2014)

  1. व्यापार संतुलन
  2. विदेशी संपत्ति
  3. अदृश्य का संतुलन
  4. विशेष आहरण अधिकार

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 1, 2 और 4

उत्तर: (c)

व्याख्या:

  • भुगतान संतुलन (BoP) दो मुख्य पहलुओं से बना है: चालू खाता और पूंजी खाता।
  • BoP का चालू खाता वस्तुओं, सेवाओं, निवेश आय और विदेशी मुद्रा समय क्या है हस्तांतरण भुगतानों के प्रवाह व बहिर्वाह को मापता है। सेवाओं में व्यापार (अदृश्य); माल के रूप में व्यापार (दृश्यमान); एकतरफा स्थानांतरण; विदेशों से प्रेषण; अंतर्राष्ट्रीय सहायता चालू खाते विदेशी मुद्रा समय क्या है के कुछ मुख्य घटक हैं। जब सभी वस्तुओं और सेवाओं को संयुक्त किया जाता है, तो वे एक साथ मिलकर किसी देश का व्यापार संतुलन (BoT) को दर्शाता विदेशी मुद्रा समय क्या है है। अतः कथन 1 और 3 सही हैं।
  • BoP का पूंजी खाता किसी देश के निवासियों और बाकी दुनिया के बीच उन सभी लेनदेन को रिकॉर्ड करता है, जो देश के निवासियों या उसकी सरकार की संपत्ति या देनदारियों में बदलाव का कारण बनते हैं
  • निजी अथवा सार्वजनिक क्षेत्रों द्वारा ऋण और उधार; निवेश; विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन पूंजी खाते के घटकों के कुछ उदाहरण हैं। अतः कथन 2 और 4 सही नहीं हैं। इसलिये विकल्प (c) सही उत्तर है।

मेन्स:

प्रश्न.भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के लिये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की आवश्यकता का औचित्य सिद्ध कीजिये। हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों और वास्तविक एफडीआई के बीच अंतर क्यों है? भारत में वास्तविक एफडीआई बढ़ाने के लिये उठाए जाने वाले उपचारात्मक कदमों का सुझाव दीजिये।

विदेशी मुद्रा भंडार लुढ़क कर पहुंचा 23 महीने के न्यूनतम स्तर पर, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू भी घटी

Kavita Singh Rathore

राज एक्सप्रेस। देश में जितना भी विदेशी मुद्रा भंडार और स्वर्ण भंडार जमा होता है, उसके आंकड़े समय-समय पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी किए जाते हैं। इन आंकड़ों में हमेशा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर गिरावट का दौर लगातार जारी है। इस गिरावट के साथ यह 23 महीने के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। वहीं, स्वर्ण भंडार (Gold Reserves) का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा है। इस बात का खुलासा विदेशी मुद्रा समय क्या है विदेशी मुद्रा समय क्या है RBI द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों से होता है। बता दें, यदि विदेशी मुद्रा परिस्थितियों में बढ़त दर्ज की जाती है तो, कुल विदेशी विनिमय भंडार में भी बढ़त दर्ज होती है।

विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़े :

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2 सितंबर 2022 को खत्म हुए सप्ताह में 560 अरब डॉलर से गिरकर 553.105 अरब डॉलर पर आ पहुंचा है, जबकि, 19 अगस्त 2022 को खत्म हुए सप्ताह में 6.687 अरब डॉलर घटकर 564.053 अरब डॉलर पर आ पहुंचा है। वहीँ, 12 अगस्त 2022 को खत्म हुए सप्ताह में 2.23 अरब डॉलर घटकर 570.74 अरब डॉलर पर आ पहुंचा था। वहीँ, अगर 5 अगस्त 2022 को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार देखे तो यह 2.23 अरब डॉलर 89.7 करोड़ डॉलर घटकर 572.978 अरब डॉलर पर आ पहुंचा था। इस प्रकार वर्तमान समय में दर्ज हुई गिरावट 7.941 अरब डॉलर देखने को मिली है। इस प्रकार विदेशी मुद्रा समय क्या है यह 2 साल के निचले स्तर पर आ पहुंचा है।

गोल्ड रिजर्व की वैल्यू :

बताते चलें, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी पिछले कुछ समय से एक- दो बार बढ़त दर्ज हुई थी, लेकिन अब एक बार फिर गोल्ड रिजर्व की वैल्यू 2 सितंबर को समाप्त सप्ताह में सोने का भंडार 38.303 अरब डॉलर पर आ गया, इसमें 1.339 अरब डॉलर पर आ गिरी हैं। हालांकि, इससे पहले भी गोल्ड रिजर्व में बढ़त दर्ज हुई थी। रिजर्व बैंक ने बताया कि, आलोच्य सप्ताह के दौरान IMF के पास मौजूद भारत के भंडार में मामूली वृद्धि हुई। बता दें, विदेशी मुद्रा संपत्तियों (FCA) में आई गिरावट के चलते विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट दर्ज होती है, लेकिन अब जब FCA में बढ़त दर्ज हुई है तो विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़ा है। RBI के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा परिस्थितियों में बढ़त दर्ज होने की वजह से कुल विदेशी विनिमय भंडार में बढ़त हुई है और विदेशी मुद्रा समय क्या है विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, कुल विदेशी मुद्रा भंडार का एक अहम भाग मानी जाती है।

आंकड़ों के अनुसार FCA :

रिजर्व बैंक (RBI) के साप्ताहिक आंकड़ों पर नजर डालें तो, विदेशीमुद्रा परिसंपत्तियां, कुल विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा होती हैं। बता दें, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में बढ़त होने की वजह से मुद्रा भंडार में बढ़त दर्ज की गई विदेशी मुद्रा समय क्या है है। FCA को डॉलर में दर्शाया जाता है, लेकिन इसमें यूरो, पौंड और येन जैसी अन्य विदेशी मुद्रा सम्पत्ति भी शामिल होती हैं। आंकड़ों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास जमा विशेष आहरण अधिकार (SDR) 5 करोड़ डॉलर घटकर 17.782 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। जबकि, IMF में रखे देश का मुद्रा भंडार भी 2.4 करोड़ डॉलर गिरकर 4.902 अरब डॉलर हो गया। समीक्षाधीन सप्ताह में विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) 6.527 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 492.117 अरब डॉलर रह गई है।

क्या है विदेशी मुद्रा भंडार ?

विदेशी मुद्रा भंडार देश के रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा रखी गई धनराशि या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं, जिनका उपयोग जरूरत पड़ने पर देनदारियों का भुगतान करने में किया जाता है। पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसका उपयोग आयात को समर्थन देने के लिए आर्थिक संकट की स्थिति में भी किया जाता है। कई लोगों को विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी का मतलब नहीं पता होगा तो, हम उन्हें बता दें, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी अच्छी बात होती है, इसमें करंसी के तौर पर ज्यादातर डॉलर होता है, यानि डॉलर के आधार पर ही दुनियाभर में कारोबार किया जाता है। बता दें, इसमें IMF में विदेशी मुद्रा असेट्स, स्वर्ण भंडार और अन्य रिजर्व शामिल होते हैं, जिनमें से विदेशी मुद्रा असेट्स सोने के बाद सबसे बड़ा हिस्सा रखते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार के फायदे :

विदेशी मुद्रा भंडार से एक साल से अधिक के आयात खर्च की पूर्ति आसानी से की जा सकती है।

अच्छा विदेशी मुद्रा आरक्षित रखने वाला देश विदेशी व्यापार का अच्छा हिस्सा आकर्षित करता है।

यदि भारत के पास भुगतान के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा उपलब्ध है तो, सरकार जरूरी सैन्य सामान को तत्काल खरीदने का निर्णय ले सकती है।

विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार की प्रभाव पूर्ण भूमिका होती है।

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