इसके लिए आप मेरे द्वारा लिखी किताब क्रिप्टो में ट्रेड कैसे करें Beginner to Intermediate की सहायता ले सकते हैं। जिसमें आप colourful charts की मदद से जीरो लेवल से basics समझ सकते हैं और क्रिप्टो ट्रेडिंग में कब entry और कब exit करना है ये आसानी से समझ पायेंगे।

Reliance स्टॉक ऑप्शन

Swing Trading क्या है?

Swing Trading कुछ ही दिन की लिए की गई होल्डिंग होती है.जैसे15 से 20 दिन के लिए. किसी स्टॉक को होल्ड करके रखना और प्रॉफ़िट होने पर बेच देना Swing Trading कहलाता है. Swing Trading एक सबसे लोकप्रिय strategy है. जिसमें simple Moving Average का इस्तेमाल 10 या फिर 20 दिनों के वैल्यू डेटा को समझने के लिए किया जाता है.साधारण भाषा में समझें तो Swing Trading डिलीवरी ट्रेडिंग का एक छोटा भाग है, जो कुछ ही टाइम पीरियड के लिए होल्ड किया जाता है.डे ट्रेडिंग और ज्यादा समय के बीच की ट्रेडिंग में Swing Trading की अपनी दुनिया है. स्विंग ट्रेड्स कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक कहीं भी ट्रेडिंग कर सकते है. Swing Trading करने वाले कई दिनों के चार्ट पैटर्न की तलाश में रहते हैं, जिससे की वो कम समय में अधिक प्रॉफिट कमा सकें. देखा जाए तो डे ट्रेडिंग से Swing Trading काफी बेहतर है.

Swing Trader कौन हैं?

Swing Trader एक ऐसे ट्रेडर हैं,जो कई दिन या फिर कई हफ्तों के अंदर ट्रेड करते हैं. और वो अक्सर चार घंटे या फिर एक दिन के चार्ट पर काम करते हैं. और इस ही पर एनालिसिस करते हैं.आपको बता दे की एक Swing Trader ज़्यादा टाइम के लिए बहुत कम ट्रेड करते हैं.साधारण भाषा में कहें तो Swing Trader कम समय और limit प्रॉफिट कमाने की कोशिश करते स्विंग ट्रेडिंग करते समय एंट्री और एग्जिट कहां करें हैं.

Swing Trading करने के कईं फायदे खासकर नए ट्रेडर्स के लिए है. Swing Trading का मतलब मार्किट में ऊप्पर निचे होने के बाद भी आपको स्टॉक या फिर इंडेक्स की सही डायरेक्शन का पता लगवाने में मदद करना होता है.जब एक डे ट्रेडर अपनी पोजीशन कुछ ही मिनटो या कुछ घंटो तक ही रखता है, तो वहीं एक Swing Trader अपनी पोजीशन 24 घंटे से ले कर कई हफ्तों तक होल्ड करके रख सकता है. और ऐसे मे बड़े टाइम फ्रेम में वोलैटिलिटी भी बहुत कम हो जाती है. और प्रॉफिट होने की सम्भावना भी काफी ज्यादा होती है. जिसकी वजह से अधिकतर लोग डे ट्रेडिंग की बजाय Swing Trading करना पसंद करते हैं. Swing Trading टेक्निकल इंडीकेटर्स पर डिपेंड होती है. टेक्निकल इंडीकेटर्स का ज्यादतर काम मार्किट में रिस्क फैक्टर को कम करना होता है. और मार्किट में उतार-चढ़ाव होने स्विंग ट्रेडिंग करते समय एंट्री और एग्जिट कहां करें के बावजूद आपको शेयर्स या इंडेक्स की सही दिशा दिखाना होता है.

Swing Trading से जुड़े कुछ आवश्यक नियम

Swing Trading में अक्सर उपयोग किए जाने वाले शब्दों में Entry Point, Exit Point, & Stoploss शामिल हैं. जिस जगह पर ट्रेडर अलग अलग टेक्निकल इंडिकेटर की मदद से Buy करते है,उसे एंट्री प्‍वाइंट कहते है.सदैव अपना ट्रेडिंग प्लान तैयार रखें. बिज़नेस की कैपेसिटी को ज्यादा करने के लिए ट्रेडिंग को एक बिज़नेस की तरह समझे.नई टेक्नोलॉजी का पूरा फायदा उठाएं. कंजर्वेटिव इन्वेस्ट स्ट्रेटेजी का पालन करें.एक स्टूडेंट की तरह ही स्टॉक बाजार को सीखें और समझें. ट्रेडिंग करते हुए रिस्क पर ज़रूर ध्यान दे.एक सही ट्रेडिंग कार्य प्रणाली चुने.

कभी भी स्टॉप लॉस को इगनोर न करें. जब भी आप अपनी पोजीशन को निकालना चाहते हैं तो उससे पहले मार्किट की डायरेक्शन ज़रूर देख लें.अगर अपने स्विंग ट्रेड ली है तो बिच बिच में उसके चार्ट की एनालिसिस ज़रूर करें. स्विंग ट्रेड करते वक़्त अपने इमोशंस को काबू में ज़रूर रखें

आपभी शेयर बाजार के बन सकते हैं माहिर खिलाड़ी; ट्रेडिंग के अपनाएं ये 5 नियम, होगी मोटी कमाई

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How To Become A Successful Traders Of Stock Market: शेयर बाजार में अगर ट्रेडिंग करना चाहते हैं तो इसमें एंट्री का रास्ता आसान है. वहीं अगर सोच-समझकर और समझदारी से योजना बनाई जाए तो शेयर बाजार में बिना किसी बाधा के एक सुसंगत और स्वतंत्र बिजनेस स्विंग ट्रेडिंग करते समय एंट्री और एग्जिट कहां करें किया जा सकता है. हालांकि बाजार में ट्रेड वाले सभी के लिए जरूरी है कि उन्हें ट्रेडर और प्रोफेशनल ट्रेडर के बीच के गैप को कम करना चाहिए. अगर आप भी बाजार में प्रभावी रूप से कारोबार करना चाहते हैं तो तीन मुख्य बिंदुओं मसलन एंट्री, एग्जिट और स्टॉप लॉस का बेहद महत्व है. इसके साथ ही आपकी पोजिशन का साइज क्या है, यह भी बेहद अहम है. आपने जो ट्रेड की योजना बनाई है, उसका पालन करने में आप कितने सक्षम हैं और आपके अंतर-संचालन की क्षमता आपको बाजार में प्रभावी तरीके से ट्रेड करने में मदद कर सकती है. जिससे आप अपने पोर्टफोलियो का मैनेजमेंट सफलता से कर सकते हैं. जानते हैं शेयर बाजार के सफल ट्रेडर बनने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

क्या आप क्रिप्टो ट्रेडिंग (Crypto Trading) में नए हैं? कहां से करें शुरुआत और क्या हर कोई कर सकता है ट्रेडिंग? आइए जान लेते हैं

Are you new to Crypto Trading Where to start and can everyone do trading let's find out | क्या आप क्रिप्टो ट्रेडिंग (Crypto Trading) में नए हैं? कहां से करें शुरुआत और क्या हर कोई कर सकता है ट्रेडिंग? आइए जान लेते हैं

Highlights क्रिप्टो करेंसी ने पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से ग्रो की है। ऐसे में जिन लोगों ने धैर्य से काम लिया है आज वे करोड़पति बन गए है। आज की तारीख में क्रिप्टो करेंसी में ट्रेड करना बहुत ही आसान बन गया है।

Crypto: वर्ष 2010 में 10000 रूपए की मूल्य के Crypto currency आज की तारीख में लगभग 66 करोड़ रूपए के हो गए हैं उस समय जिन्होंने धैर्य के साथ विश्वास करके invest बनाए रखा वो सभी आज करोड़पति बन गए।

एंजल ब्रोकिंग में इंट्राडे ट्रेडिंग कैसे करें

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आप ना केवल मूल्य में वृद्धि होने पर अभी तो मूल्य में गिरावट आने पर भी कमा सकते हैं। यदि शेयर का प्राइस गिर रहा है और आपको लगता है कि यह और गिरेगा तो इस स्थिति में आप शेयर बेचकर करके पैसे कमा सकते हैं।

इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन इनमेसे कम जोख़िम भरा कोनसा हैं ?

इंडेक्स ऑप्शन स्टॉक ऑप्शन के मुकाबले कम जोखिम भरा और आसान हैं ट्रेडिंग करने के लिए, क्योंकि इंडेक्स ऑप्शन में Liquidity ज्यादा होती हैं और Volatility कम होती हैं स्टॉक ऑप्शन के मुकाबले। इस वजह से आप को चार्ट या ऑप्शन चैन देखनेमें ज्यादा दुविधा नहीं होती और आप एंट्री, एग्जिट, टारगेट और स्टॉप लोस्स आसानी से लगा पाते हैं।

जरुरी नहीं हैं की आप हमेशा इंडेक्स ऑप्शन में ही ट्रैड करे कभी-कभी स्टॉक ऑप्शन में भी ट्रेड करना काफी लाभ दायक हैं। चलिए जानते हैं कैसे ? ताकि आप की ट्रेडिंग आसान हो।

Table of Contents

इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन में अंतर।

अब हम पढ़ेंगे की इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन में अंतर क्या हैं ?, ताकि आप अपने ट्रेडिंग के नुसार किस भाग में ट्रेडिंग करना चाहते हैं यह चुन पाए।

इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन में अंतर।

इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन में सबसे बड़ा अंतर यह हैं की, इंडेक्स ऑप्शन में किसी सूचकांक (index) में ट्रेडिंग की जाती हैं और स्टॉक ऑप्शन में किसी शेयर में ट्रेडिंग की जाती हैं।

इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन इनमें से किस्मे ट्रेडिंग करे ?

इन दोनों में ट्रेडिंग करने से पहले आप को कुछ चिजे हैं वह जाननी जरुरी हैं।

1.Liquidity

Liquidity याने के उस शेयर में कितने ट्रेडर या इन्वेस्टर हैं वह शेयर खरीदने और बेचने के लिए।

किसी शेयर या इंडेक्स में liquidity कम हो तो आप अपने मनचाहे भाव पे खरीद या बिक्री नहीं कर सकते क्योकि उस भाव पे कोई भी व्यक्ति शेयर खरीने या बेचने के लिए उपलब्ध नहीं हैं।

स्टॉक में मुकाबले इंडेक्स में liquidity ज्यादा होती हैं।

2.Volatility

Volatility याने उस शेयर या इंडेक्स में भाव कितनी तेजी से ऊपर – निचे होता हैं।

अगर volatility ज्यादा हो तो आप को सही समय पर एंट्री, एग्जिट,टारगेट और स्टॉप लोस्स लगाने में काफी परेशानी आती हैं। स्विंग ट्रेडिंग करते समय एंट्री और एग्जिट कहां करें क्योगी भाव में बड़ी तेजी से ऊपर-निचे जाने के कारण आप ऑप्शन चैन और टेक्निकल चार्ट देखने में परेशानी आती हैं।

निष्कर्ष

यह हिंदी लेख उन लोगों के लिए हैं जो शेयर बाजार में नए हैं और पहली बार ऑप्शन ट्रेडिंग की शुरवात कर रहे हैं।

जरुरी नहीं हैं की आप सिर्फ ऑप्शन ट्रेडिंग इंडेक्स में ही करे स्टॉक में ऑप्शन ट्रेडिंग के कुछ अलग फायदे भी हैं। स्टॉक ऑप्शन ट्रेडिंग तभी ही शुरू करे जब आप को अनुभव हो चूका हो।

आशा हैं आप को इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन में अंतर, उनके फायदे और उनमे कोनसी ट्रेडिंग चुननी चाहियह जानकारी प्राप्त हुई होगी।

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इंडेक्स ऑप्शन और स्टॉक ऑप्शन इनमेसे कम जोख़िम भरा कोनसा हैं ?

इंडेक्स ऑप्शन स्टॉक ऑप्शन के मुकाबले कम जोखिम भरा और आसान हैं ट्रेडिंग करने के लिए, क्योंकि इंडेक्स ऑप्शन में Liquidity ज्यादा होती हैं और Volatility कम होती हैं स्टॉक ऑप्शन के मुकाबले। इस वजह से आप को चार्ट या ऑप्शन चैन देखनेमें ज्यादा दुविधा नहीं होती और आप एंट्री, एग्जिट, टारगेट और स्टॉप लोस्स आसानी से लगा पाते हैं।

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