इस श्रेणी में फंड चुनते वक्त, फंड के पोर्टफोलियो में जाकर यह समझने की कोशिश करें कि उसने किस तरह की कंपनियों में निवेश किया है और वह फंड किस तरह से शेयरों का चयन करता है. अक्सर इस श्रेणी में निवेश के लिए एक दशक या उससे अधिक समय तक निवेशित रहने के लिए मानसिक तौर पर कई कारोबारों में निवेश तैयार रहने की जरूरत होती है. एसआइपी (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए इन फंडों में निवेश का विकल्प रहता है लेकिन बाजार गिरने के साथ ही ग्रोथ चक्र का अवसर आने पर एकमुश्त निवेश करना भी अच्छी रणनीति है.

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जारी रखेंगे कारोबार में निवेश : आदित्य मित्तल

एस्सार स्टील के अधिग्रहण के दो साल बाद आर्सेलरमित्तल के मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मित्तल ने निप्पॉन स्टील के साथ अपने भारतीय संयुक्त उद्यम आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) के लिए चार सूत्रीय विजन का अनावरण किया। मित्तल ने कर्मचारियों को भेजे संदेश में ये बातें सामने रखी है।

कर्मचारियों को भेजे पत्र में संयुक्त उद्यम के चेयरमैन मित्तल ने कहा, सबसे पहले हम भारत में स्टील की खपत में हो रही तीव्र व स्थायी बढ़त को सहारा देने के लिए अग्रिम पंक्ति में आना चाहते हैं और इसे हासिल करने के लिए हम हर कारोबारों में खासा निवेश जारी रखेंगे। उन्होंंने कहा, बढ़त की इस योजना के लिए हजीरा में स्टील निर्माण क्षमता बढ़ाकर 1.5 करोड़ टन सालाना करना काफी अहम होगा और इससे एएम/एनएस इंडिया को भी फायदा होगा क्योंंकि आत्मनिर्भर भारत की सरकारी मकसद के मुताबिक उच्च कीमत वाले स्टील का आयात घटा रहा है।

छोटा है पर दमदार है

स्मार्ट मनीः मोटा मुनाफा कमाने का अवसर

  • नई दिल्ली,
  • 04 अक्टूबर कई कारोबारों में निवेश 2022,
  • (अपडेटेड 04 अक्टूबर 2022, 4:23 PM IST)

नारायण कृष्णमूर्ति

इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए बस यह चुनना होता है कि कितने बड़े कारोबार में निवेश किया जाए. बहुत बड़े कारोबारों की खबरें नियमित रूप से आती रहती हैं जिनसे नए लोगों को भी उनके बारे में पहले से मालूम होता है. लेकिन शेयर बाजारों की स्मॉल-कैप श्रेणी में आने वाले कई कारोबारों के बारे में यह बात सही नहीं हो सकती. छोटी कंपनियां खास तरह के कारोबार पर ही ध्यान देती हैं, लेकिन लंबे अरसे में उन बड़ी कंपनियों के मुकाबले उनका राजस्व और मुनाफा बढ़ने की संभावना रहती है, जिन्होंने कई तरह के कारोबार में विविधीकरण कर लिया हो. जो निवेशक जोखिम उठा सकते हैं, वे स्मॉल-कैप फंड को मोटा मुनाफा कमाने का अवसर मान सकते हैं.

निवेश का संचार

निवेश का संचार

सांकेतिक फोटो।

दूरसंचार के क्षेत्र में सौ फीसद विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की मंजूरी से इस क्षेत्र में तेजी से सुधार की उम्मीद की जा रही है। अभी तक इसमें उनचास फीसद एफडीआइ की इजाजत थी। दरअसल, पिछले कुछ समय से दूरसंचार कंपनियां काफी दबाव महसूस कर रही थीं। प्रमुख दूरसंचार कंपनियों पर बड़ी देनदारियां हैं। सरकार लगातार उन्हें चुकाने का दबाव बनाती कई कारोबारों में निवेश कई कारोबारों में निवेश रही है, पर वे आंशिक भुगतान ही कर पाई हैं। हालांकि पिछले दिनों इसके लिए कंपनियों को अपने शुल्कों में बढ़ोतरी भी करनी पड़ी। इस तरह प्रतिस्पर्धी माहौल कुछ असंतुलित होता दिखने लगा।

ऐसे में सरकार ने न सिर्फ दूरसंचार कंपनियों में विदेशी निवेश की छूट, बल्कि उन्हें बकाया रकम चुकाने की कई कारोबारों में निवेश चार साल की मोहलत भी दे दी है। अब समायोजित सकल राजस्व यानी एजीआर की परिभाषा भी बदली जाएगी, जिसके तहत कंपनियों को केवल दूरसंचार से संबंधित आय पर कर भुगतान करना पड़ेगा। उससे जुड़े दूसरे कारोबारों को उसमें समायोजित नहीं किया जाएगा। नए नियमों के तहत स्पेक्ट्रम खरीद को भी लचीला बनाया गया है और अगर कोई कंपनी चाहे, तो दस साल बाद अपना स्पेक्ट्रम वापस भी कर सकती है। स्वाभाविक ही सरकार के इस फैसले से दूरसंचार कंपनियां संतुष्ट और उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से डिजिटल इंडिया के सपने को गति देने में काफी मदद मिलेगी।

सही इनवेस्टमेंट करना चाहते हैं तो अपनाएं यह फंडा

सही इनवेस्टमेंट करना चाहते हैं तो अपनाएं यह फंडा

वॉरेन बफे और चार्ली मंगर दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में हैं। लेकिन, दशकों तक उन्होंने गूगल या अमेजन जैसी टेक्नोलॉजी कंपनियों में केवल इसलिए निवेश नहीं किया, क्योंकि वे मानते थे कि इस सेक्टर की समझ उनमें नहीं है। हालांकि इस सोच के चलते वे बड़े निवेश से चूके, लेकिन कई बड़ी विफलताओं से बच भी गए।

दुर्भाग्य से तकनीक की कई कारोबारों में निवेश मौजूदा दुनिया में हम जटिल चीजों को बेहतर मानते हैं, इसलिए निवेश में भी जटिलता को बेहतर मान बैठते हैं, जो बिल्कुल गलत है। निवेश हमेशा सरल होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में आपकी समझ नहीं है, उनमें निवेश करेंगे भी तो क्या समझ आएगा?

दशकों पहले से, जब टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियां दुनिया को अपनी आगोश में ले रही थीं और वास्तविक रूप से हर उद्योग में बदलाव का वाहक बन रही थीं, तब दुनिया के सबसे मशहूर निवेशकों ने उनकी अनदेखी की। वारेन बफे और चार्ली मंगर (बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन) जैसे निवेशक बेहद जमीनी कारणों से टेक्नोलॉजी शेयरों से दूर रहे। दशकोंबाद अब उन्होंने एपल और आईबीएम जैसी कंपनियों में निवेश शुरूकिया है, वह भी तब जब एपल ने कंज्यूमर ड्‌यूरेबल कंपनी और आईबीएम ने बिजनेस सर्विसेज कंपनी का ले रूप लिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे इतने वर्षों तक टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों से दूर क्यों रहे? उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि कई कारोबारों में निवेश क्या इसमें हमारे लिए सीखने की कोई बात है?

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