टॉप क्रिप्टोकरेंसी में शामिल बिनांस क्वाइन (बीएनबी) का दाम 12.49 क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है फीसदी या 2,674 रुपये कम होकर 18,741 रुपये पर आ गया, जबकि कार्डानो में 11.41 फीसदी की कमी आई और यह फिसलकर 37.96 रुपये का रह गया। सोलाना का भाव 16 फीसदी टूटा, तो डॉजक्वाइन की कीमत में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा पोल्काडॉट के दाम में भी 13 फीसदी की कमी आई है। लाइटक्वाइन का भाव 14 फीसदी, तो वहीं शीबा इनु का भाव 12 फीसदी कम हो गया।

Om prakash Napit

Crypto Market Crash: क्रिप्टो बाजार में हाहाकार, बिटक्वाइन 12 फीसदी से ज्यादा टूटा, भूचाल से निवेशक धराशाई

Crypto Market Crash: क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Currency) में निवेश करने वाले लोगों के लिए सोमवार का दिन (Black Monday) के तौर पर सामने आया है। क्रिप्टो बाजार (Crypto Market) में आए भूचाल से इसकी भरपाई हाल फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Crypto Currency Bitcoin)का दाम क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है 12.02 फीसदी या 2,73,718 रुपये कम होकर 20,03,985 के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसका बाजार पूंजीकरण भी बुरी तरह टूटकर 37.6 ट्रिलियन रुपये रह गया है।

Crypto Market Crash: क्रिप्टोकरेंसी (Crypto Currency) में निवेश करने वाले लोगों के लिए सोमवार का दिन (Black Monday) के तौर पर सामने आया है। क्रिप्टो बाजार (Crypto Market) में आए भूचाल से इसकी भरपाई हाल फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है। दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन (Crypto Currency Bitcoin)का दाम 12.02 फीसदी या 2,73,718 रुपये कम होकर 20,03,985 के निचले स्तर पर पहुंच गई है। इसका बाजार पूंजीकरण भी बुरी तरह टूटकर 37.6 ट्रिलियन रुपये रह गया है।

टेरर फंडिंग क्रिप्टोबाजार के लिए खतरे की घंटी

भारत सरकार ने किसी भी तरह की क्रिप्टोकरेंसी लीगल नहीं है। इसके बाद भी लोग बड़े पैमाने पर इसमें निवेश कर रहे हैं। भारत में अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में कुल निवेश वर्ष 2021 में 15 गुना बढ़कर 438.18 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया है। टेरर फंडिंग में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की खबर आने से एक बाद तो साफ हो गई है कि क्रिप्टोकरेंसी में जो भी पैसा निवेश किया जा रहा है वह सुरक्षित तो कतई नहीं है।

अधिकतर देशों में क्रिप्टो के नियमन के लिए कानून नहीं

दुनिया के अधिकतर देशों में क्रिप्टो को रेग्युलेट करने के लिए कोई कानून भी नहीं है। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) 2020 के दिशानिर्देशों के अनुरुप महज कुछ देशों ने ही क्रिप्टो को रेग्यूलेट करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं ताकि डिजिटल करेंसी या एनएफटी (Non-Fungible Tokens) का इस्तेमाल मनी लॉउंड्रिंग या टेरर फंडिंग के लिए नहीं किया जा सके।

कुछ ऐसे एशियाई देश भी हैं जहां आतंकवाद का इतिहास रहा है और क्रिप्टो के बढ़ते चलन ने इस खतरे को कई गुना और बढ़ा दिया है, पर वे इसके खिलाफ अब तक सतर्क नहीं हुए हैं। ऐसे देशों की लिस्ट में पहला नाम इंडोनेशिया क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है का है जिसने अब तक FATF के गाइडलाइन के अनुसार क्रिप्टो को रेग्यूलेट करने के लिए कानून नहीं बनाए हैं। फिलिपिंस भी मनी लाउंड्रिंग के खिलाफ सख्त कानून लागू नहीं कर पाने की वजह से FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल होने की कगार पर खड़ा है।

बैंक इंडोनेशिया ने जताया था अंदेशा

बैंक इंडोनेशिया का पेमेंट सिस्टम ब्लूप्रिंट 2025 भी इस आशंका पर मुहर लगाता है कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल मनी लाउंड्रिंग और आतंकी गतिविधियों में किया जा सकता है। इस ब्लूप्रिंट में कहा गया है क्रिप्टो के माध्यम से लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए कानून की सख्त जरूरत है। इंडोनेशिया में अभी ऐसे साइबर कानूनों की कमी है।

फिलिपिंस की एंटी मनी लाउंड्रिंग काउंसिल ने Terrorism and Terrorism Financing Risk Assessment 2021 नाम की अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2019 और 2020 के बीच देश में लगभग 1.77 मिलियन फिलिपाइन पेसो का संदिग्ध लेनदेन क्रिप्टो के माध्यम से किया गया। उसके बावजूद देश में आश्चर्यजनक रूप से क्रिप्टो को लीगल टेंडर के रूप में उपयोग करने की छूट है, क्रिप्टो में किए गए निवेश को वहां यूनियन बैंक ऑफ फिलीपींस के एटीएम से नकद के रूप में भी निकालने की सुविधा है।

भारत क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है में भी ठोस कानून की जरूरत

भारत में क्रिप्टो को रेग्युलेट करने के लिए ठोस कानून की कमी है। अब देश की सुरक्षा एजेंसियों को भी टेरर फंडिंग में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल के सबूत मिलने लगे हैं। दुनिया में क्रिप्टो के बढ़ते प्रचलन के बीच इस बात पर मंथन किए जाने की जरूरत है कि आखिर आतंकी संगठनों के बीच क्रिप्टो के इस्तेमाल का प्रचलन क्यों बढ़ रहा है? आतंकी संगठन सुरक्षा एजेंसियों को झांसा देने के लिए नए-नए तौर-तरीकों की तलाश में लगे रहते हैं। क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल आतंकी ग्रुप्स में इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इसके माध्यम से किए गए लेनदेन को ट्रेस करना आसान नहीं होता। क्रिप्टो के इस्तेमाल से वे पर्दे के पीछे रख कर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दे पाते हैं। आतंकी संगठन नए आतंकी भर्ती करने, हथियारों का भुगतान करने जैसे कामों में क्रिप्टो का इस्तेमाल करते हैं।

क्रिप्टो क्रैश से हफ्ते भर में निवेशकों के करीब 50 लाख करोड़ रुपये डूबे, क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है 4000 डॉलर से भी कम का हुआ बिटकॉइन

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। बिटकॉइन समेत अन्य क्रिप्टोकरेंसी के लिए यह हफ्ता सबसे बुरा रहा है। निवेशकों को मोटा मुनाफा देने वाली क्रिप्टोकरेंसी (वर्चुअल करेंसी) अब क्रैश हो चुकी है। वर्चुअल करेंसी के तौर पर सबसे अधिक लोकप्रिय रहा बिटकॉइन शुक्रवार को 4,000 डॉलर के नीचे चला गया। दिसंबर 2017 में एक बिटकॉइन की कीमत करीब 20,000 डॉलर थी।

पिछले साल की शानदार रैली के बाद अब तक क्रिप्टोकरेंसी में 700 अरब डॉलर (करीब 50 लाख करोड़ रुपये) स्वाहा हो चुके हैं। पिछले एक हफ्ते में यह आई अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है। ब्लूमबर्ग के गैलेक्सी क्रिप्टो इंडेक्स में इस दौरान करीब 23 फीसद से अधिक का गोता लगाया है। हालांकि दुनिया के अधिकांश देशों में इस पर पाबंदी होने की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव सीमित रहने की उम्मीद है।

रघुराम राजन का बिटकॉइन क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है पर ध्रुवीकरण वाला रुख

बिटकॉइन पर रघुराम राजन - स्मार्ट मनी

यह बढ़ रहा है और लोग इस बेशुमार बढ़त के दौर में कुछ फायदा उठाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी की ओर भाग क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है रहे हैं और इस बढ़त का इस बार कोई अंत नजर नहीं आ रहा है। पिछले साल बिटकॉइन गिरकर 10,000 डॉलर पर आ गया और दिसम्बर 2020 में यह 40,000 डॉलर पर पहुँच गया। इस प्रक्रिया में कई खुदरा निवेशक भी इस ब्लॉकचेन दुनिया में अन्य ऑल्टकॉइन के साथ पैसे बनाने आ गये। हालांकि भारत के मशहूर अर्थशास्त्री रघुराम राजन जिन्होंने 2008 के वित्तीय संकट की ठीक-ठीक भविष्यवाणी की थी, वह न बिटकॉइन से प्रभावित हैं और न ही बिटकॉइन में इस बढ़त को वृद्धि की रूपरेखा मानते हैं। सो इस शीर्ष अर्थशास्त्री की बिटकॉइन पर क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है क्या राय है?

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट

बिजनेस स�?टैंडर�?ड क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट

वर्ष 2018 की शुरुआत में भी आभासी मुद्रा (क्रिप्टोकरेंसी) बाजार बुलबुले की तरह तेजी से फट गया। क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है आभासी मुद्राओं की कीमतें और बाजार पूंजीकरण अपने सर्वोच्च स्तर से दो तिहाई कम हो चुकी है। वहीं, भारत ने यह कहकर इस बुलबुले में एक और पिन चुभा दी कि क्रिप्टोकरेंसी मान्य मुद्रा नहीं है और इसे लेनदेन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। हालांकि प्रमुख बिटकॉइन एक्सचेंजों पर क्रिप्टोकरेंसी की कुल मात्रा को देखने से लगता है कि सिलसिला अभी थमा नहीं है। दिसंबर 2017 में बिटकॉइन की कीमत लगभग 15 लाख रुपये थी जो मंगलवार दोपहर 4.28 लाख रुपये पर पहुंच क्या क्रिप्टो करेंसी का बुलबुला फूट रहा है चुकी है तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6,100 डॉलर के करीब बनी हुई है।

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