Share Market Today: बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 1608 अंक की गिरावट आई। (Source : Reuters Photo)

विदेशों में बाजार टूटने से खाद्य तेलों के भाव औंधे मुंह गिरे

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) विदेशी बाजारों में गिरावट के रुख के बीच दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को सरसों, मूंगफली, सोयाबीन तेल-तिलहन, सीपीओ, पामोलीन और बिनौला तेल सहित सभी तेल-तिलहन कीमतों में चौतरफा गिरावट देखने को मिली।

बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में कल चार प्रतिशत की गिरावट थी और अभी इसमें लगभग दो प्रतिशत की गिरावट है। शिकॉगो एक्सचेंज में भी कल लगभग पांच प्रतिशत की गिरावट थी फिलहाल इसमें मामूली सुधार है। विदेशी बाजारों की इस मंदी के कारण स्थानीय खाद्य तेल-तिलहनों के भाव में चौतरफा गिरावट आई है।

सूत्रों ने कहा कि तेल उद्योग, आयातक और किसान इस गिरावट के कारण बेहाल हैं। दूसरी ओर उपभोक्ताओं को गिरावट का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। आयातकों द्वारा आयात को लिए गये बैंकों का कर्ज डूबने के कगार पर है। वैश्विक कीमतों के टूटने के बाद जो तेल उद्योग थोक में कम दाम पर खाद्य तेल बेच रहे हैं, उसे खुदरा में अधिकतम खुदरा मूल्य की आड़ में 40-50 रुपये लीटर ऊंचे भाव पर बेचा जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि इस पर लगाम नहीं लगाने का मतलब है कि देश तेल-तिलहन उत्पादन में कभी आत्मनिर्भर नहीं हो सकेगा क्योंकि सस्ते आयात के आगे किसानों को लाभकारी मूल्य मिलने में कठिनाई होगी और वे आगे तिलहन खेती में दिलचस्पी कम कर देंगे। अक्टूबर में सोयाबीन, मूंगफली और बिनौला फसल की नई खेप आने से पहले सस्ते आयात को रोकने या उसके मुकाबले देशी तेल को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार को कोई कदम उठाना होगा।

सूत्रों ने कहा कि वैश्विक खाद्य तेल कीमतों में गिरावट के अनुरूप पामोलीन औंधेमुंह गिरे अमेरिकी शेयर बाजार तेल का एमआरपी अधिकतम 105-110 रुपये लीटर होना चाहिये पर खुदरा बाजार में इसकी बिक्री लगभग 140-145 रुपये लीटर के भाव हो रही है। इसी प्रकार सरसों तेल का एमआरपी अधिकतम 145-150 रुपये लीटर होना चाहिये पर खुदरा बाजार में यह तेल 170-180 रुपये लीटर तक बिक रहा है। इन खुदरा कारोबार में अधिक कीमत पर फिलहाल रोक लगती नहीं दिख रही है और उपभोक्ता खाद्य तेल कीमतों की गिरावट का समुचित लाभ पाने से वंचित हैं।

इस बीच, सरकार ने सीपीओ और पामोलीन के आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि की है जबकि सोयाबीन डीगम तेल के आयात शुल्क मूल्य में कमी की गई है।

सोयाबीन के डीआयल्ड केक (डीओसी) का आयात 30 सितंबर तक खुला होने से स्थानीय डीओसी की खपत प्रभावित होगी। किसान, सोयाबीन के डीओसी के निर्यात से अतिरिक्त लाभ कमाने की वजह से सोयाबीन की खेती को प्रेरित होते हैं पर सोयाबीन डीओसी आयात खुला होने से किसानों को अपने डीओसी से होने वाले लाभ को लेकर चिंता बनी हुई है।

शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन – 6,925-6,975 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली – 7095-7260 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,300 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड तेल 2,720 – 2,910 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,155-2,245 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,185-2,300 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी – 17,000-18,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,800 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,600 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 9,150 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,400 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,900 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,700 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना – 5,300-5,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज 5,250- 5,350 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का) 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

भाषा राजेश राजेश अजय

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

Share Market: औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, इन शेयरों ने डुबवा दी निवेशकों की लुटिया

Stock Market Live: गिरने वाले शेयरों में जेएसडब्ल्यू स्टील, एचडीएफसी लाइफ, आईटीसी, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स आगे रहे।

Share Market: औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, इन शेयरों ने डुबवा दी निवेशकों की लुटिया

Share Market Today: बाजार बंद होने तक सेंसेक्स 1608 अंक की गिरावट आई। (Source : Reuters Photo)

यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिमी देशों में चल रहे विवाद अब दुनिया भर के शेयर बाजार के निवेशकों को डराने लगा है। यूक्रेन में युद्ध की आशंका और शनिवार को आए भारत के सबसे बड़े एबीजी शिपयार्ड बैंक घोटाले के चलते निवेशकों का बाजार को लेकर सेंटीमेंट नेगेटिव हो गया। जिसके चलते शेयर बाजार में आज निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। शाम को बाजार बंद होने तक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 3 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1608 और निफ्टी 532 अंक तक लुढ़क गया।

बैंकिंग शेयरों में जमकर गिरावट

शनिवार को सामने आए 28 बैंकों के साथ एबीजी शिपयार्ड बैंकिंग घोटाले के चलते बैंकिंग शेयरों की जमकर शेयर बाजार में पिटाई हुई। शेयरों में सबसे बड़ी गिरावट पंजाब नेशनल बैंक में 6.67 फीसदी की देखने को मिली। उसके बाद फेडरल बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट और एसबीआई में क्रमशः 6.56 फीसदी, 5.71 फीसदी और 5.32 फीसदी की गिरावट हुई।

निफ्टी में सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयर

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य इंडेक्स निफ्टी में 3% तक की गिरावट रही। गिरने वाले शेयरों में जेएसडब्ल्यू स्टील, एचडीएफसी लाइफ, आईटीसी, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स आगे रहें। टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) निफ्टी का एकमात्र ऐसा शेयर था जो बाजार में चढ़कर बंद हुआ।

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निवेशकों को लगा 5 लाख करोड़ का झटका

शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली के बीच निवेशकों को जमकर नुकसान उठाना पड़ा। शेयर बाजार के सभी सेक्टर ऑटो, बैंक,ऑयल & गैस, पीएसयू बैंक, फार्मा, मेटल और रियलिटी इंडेक्स में 2 से 6% तक की गिरावट रही। जिसके कारण निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।

इन कारणों के चलते आई बड़ी गिरावट

शेयर बाजार में गिरावट की बड़ी वजह ग्लोबल संकेतों को माना जा रहा है। पिछले हफ्ते से शेयर बाजार की गति पर ब्रेक लग गया था। इसके साथ ही रूस के साथ यूक्रेन के युद्ध की आशंका के चलते बाजार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहे थे। उसके बाद अमेरिका में फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमत 7 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और एबीजी शिपयार्ड के बैंकिंग घोटाले ने शेयर बाजार के सेंटीमेंट को नेगेटिव कर दिया। जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली।

शेयर बाजार में सबसे बड़ी गिरावट, औंधे मुंह गिरा सेंसेक्स-निफ्टी, लाखों करोड़ स्वाहा, रोकनी पड़ी ट्रेडिंग

दुनिया भर में कोरोना वायरस खतरनाक रूप ले चुका है। इस वजह से शेयर बाजारों में भी गिरावट का दौर जारी है। गुरुवार के बाद शुक्रवार को शेयर बाजार में ऐतिहासिक गिरावट देखनी को मिली। हालात ये बन गए कि दलाल स्‍ट्रीट में निवेशकों के निवेश को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेडिंग को रोकनी पड़ी।

फोटो: सोशल मीडिया

नवजीवन डेस्क

कोरोना के कहर ने शुक्रवार को फिर दलाल स्ट्रीट पर कोहराम मचाया। सेंसेक्स शुरुआती कारोबार के दौरान 3200 अंक से ज्यादा टूटकर 29,600 के नीचे आ गया और निफ्टी भी 966 अंक लुढ़ककर 8,624 के स्तर पर आ गया। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 9.21 बजे पिछले सत्र से 3,171.58 औंधेमुंह गिरे अमेरिकी शेयर बाजार अंकों यानी 9.68 फीसदी की गिरावट के साथ 29,606.56 पर कारोबार कर रहा था जबकि इससे पहले सेंसेक्स कमजोरी के साथ 32,214.13 पर खुला और 29,564.58 तक लुढ़का। हालांकि अभी थोड़ी सुधार हुई है। सेंसेक्स अभी भी 800 अंक नीचे है। सेंसेक्स में 3090 अंक और निफ्टी में 966 अंक की गिरावट के बाद कारोबार को 45 मिनट के लिए रोक दिया गया था।

इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी पिछले सत्र से 966.10 अंकों की गिरावट के साथ 8,64.05 पर आ गया जबकि इससे पहले निफ्टी 9,107.60 पर खुला और 9,133.20 तक चढ़ा। पिछले सत्र में निफ्टी 9,590.15 पर बंद हुआ था।

एक समय से बाजार का हालात ऐसा हुआ कि ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। निफ्टी पर ट्रेडिंग 45 मिनट के लिए रोक दी गई। बता दें कि शेयर बाजार में 10 फीसदी या उससे ज्यादा की गिरावट आती है, तो उसमें लोअर सर्किट लग जाता है और ट्रेडिंग कुछ देर के ल‍िए रोक दी जाती है। दरअसल, दलाल स्‍ट्रीट में निवेशकों के निवेश को सुरक्षित रखने के लिए ट्रेडिंग पर रोक लगा दी जाती है। इससे निवेशकों के नुकसान का संकट ज्‍यादा गहरा होने से बच जाता है।

वहीं अमेरिकी शेयर बाजार की हालत भी बेहद खराब है। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूरोप से आवाजाही पर रोक लगाने के बाद डाउ जोन्स में भारी गिरावट आ रही है। डाउ जोन्स सुबह 1369 अंकों की भारी गिरावट के साथ खुला। 1987 के बाद अमेरिकी शेयर बाजार के लिए यह सबसे खराब दिन रहा है। एयरलाइन्स सेक्टर का स्टॉक 14.40 पर्सेंट, क्रूजलाइनर स्टॉक 23 पर्सेंट तक लुढ़क चुका है। ऐसा यूरोप से आवाजाही पर रोक के फैसले के कारण हुआ है। बोइंग के शेयर में 13 पर्सेंट की भारी गिरावट दर्ज की गई है। बोइंग के शेयर में इस सप्ताह अब तक 40 पर्सेंट की गिरावट दर्ज की गई है।

इससे पहले गुरुवार को शेयर बाजार में इतिहास ही सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। सेंसेक्स में 3,100 अंकों की गिरावट आई थी।गु रुवार की शाम को सेंसेक्स 8.18 फीसदी यानी 2919 अंक गिरकर 32778 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 868 अंक गिरकर 9590 के स्तर पर बंद हुआ। गुरुवार का दिन शेयर बाजार के लिए कितना खराब था, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लोअर सर्किट के बिल्कुल करीब जा पहुंचे। कारोबार के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब दोनों में गिरावट 9 फीसदी के बेहद करीब चली गई।

दुनियाभर में कोरोना वायरस का प्रकोप गहराता जा रहा है और भारत में भी इस जानलेवा वायरस के संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। दुनिया के 120 से अधिक देशों में अब तक करीब 1.34 लाख मरीजों के कोरोना संक्रमण से पीड़ित होने के मामले आए हैं जबकि तकरीबन 5,000 लोग इस जानलेवा वायरस के शिकार बन चुके हैं। कोरोना संक्रमण पर रोक लगाने के मद्देनजर दुनियाभर में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। भारतीय करेंसी रुपए में भी कमजोरी आई है डॉलर के मुकाबले रुपया शुक्रवार को पिछले सत्र से 17 पैसे की कमजोरी के साथ 74.40 पर खुला।

(आईएएनएस के इनपुट के साथ)

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हिमाचल-गुजरात के रुझानों से औंधे मुंह गिरा शेयर बाजार, 800 से ज्यादा अंकों की गिरावट दर्ज

sensex

गुजरात में भाजपा को कांग्रेस से मिल रही कांटे की टक्कर से शेयर बाजार बुरी तरह से लड़खड़ा गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बीएसई का सेंसेक्स 803 अंक गिर गया, वहीं निफ्टी में भी 200 अंक लुढ़क गया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली हावी हुई है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 2 फीसदी गिरा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 2.5 फीसदी टूट गया है।

शेयर बाजार में इस सप्ताह कारोबार का रुख गुजरात व हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों से तय होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशक वैश्विक कारकों जैसे अमेरिका में कर सुधार तथा कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर गड़ाए हुए हैं।

इन शेयरों में भी गिरावट
निफ्टी पर आईटी इंडेक्स में 1.36 फीसदी, फार्मा इंडेक्स में 1.25 फीसदी, एफएमसीजी इंडेक्स में 1.65 फीसदी, ऑटो इंडेक्स में 1.86 फीसदी और पीएसयू बेंक इंडेक्स में 2.39 फीसदी व प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.93 फीसदी की गिरावट है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि अगर नतीजे एग्जिट पोल के हिसाब से नहीं आते हैं, तो इसका निकट से मध्यम काल में बाजार के रुझान पर नकारात्मक असर पड़ेगा। चुनाव के नतीजों के अलावा, बाजार का रुख वैश्विक संकेतों तथा अमेरिकी कर सुधारों से भी तय होगा।

एग्जिट पोल के अनुसार, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट पीसीजी रिसर्च टीना विरमानी ने बताया कि बाजार का रुख चुनाव नतीजों के साथ संसद के शीतकालीन सत्र से भी तय होगा।

गुजरात में भाजपा को कांग्रेस से मिल रही कांटे की टक्कर से शेयर बाजार बुरी तरह से लड़खड़ा गया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बीएसई का सेंसेक्स 803 अंक गिर गया, वहीं निफ्टी में भी 200 अंक लुढ़क गया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली हावी हुई है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 2 फीसदी गिरा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 2.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 2.5 औंधेमुंह गिरे अमेरिकी शेयर बाजार फीसदी टूट गया है।

शेयर बाजार में इस सप्ताह कारोबार का रुख गुजरात व हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजों से तय होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, निवेशक वैश्विक कारकों जैसे अमेरिका में कर सुधार तथा कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर गड़ाए हुए हैं।

इन शेयरों में भी गिरावट
निफ्टी पर आईटी इंडेक्स में औंधेमुंह गिरे अमेरिकी शेयर बाजार 1.36 फीसदी, फार्मा इंडेक्स में 1.25 फीसदी, एफएमसीजी इंडेक्स में 1.65 फीसदी, ऑटो इंडेक्स में 1.86 फीसदी और पीएसयू बेंक इंडेक्स में 2.39 फीसदी व प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.93 फीसदी की गिरावट है।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि अगर नतीजे एग्जिट पोल के हिसाब से नहीं आते हैं, तो इसका निकट से मध्यम काल में बाजार के रुझान पर नकारात्मक असर पड़ेगा। चुनाव के नतीजों के अलावा, बाजार का रुख वैश्विक संकेतों तथा अमेरिकी कर सुधारों से भी तय होगा।

एग्जिट पोल के अनुसार, दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनती दिख रही है। कोटक सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट पीसीजी रिसर्च टीना विरमानी ने बताया कि बाजार का रुख चुनाव नतीजों के साथ संसद के शीतकालीन सत्र से भी तय होगा।

दलाल स्‍ट्रीट में मची भगदड़ के पीछे है इन 5 फैक्‍टर्स का बड़ा हाथ, पढ़े पूरी खबर

जनता से रिश्ता वेबडेस्क : निफ्टी (nifty 50) और बीएसई सेंसेक्‍स (sensex), दोनों में ही शुक्रवार को जबरदस्‍त गिरावट आई. आज की गिरावट के साथ ही शेयर बाजार दो महीनों के निचले स्‍तर को छू गए. भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में पिछले कुछ दिनों से गिरावट जारी है. शुक्रवार को निफ्टी 1.63 फीसदी की गिरावट के साथ 16,411.25 पर बंद हुआ. सेंसेक्‍स का हाल भी कुछ अच्‍छा नहीं रहा. सेंसेक्‍स में भी 866.58 अंकों की गिरावट आई और यह 54,835.58 पर बंद हुआ. भारतीय शेयर बाजार में आई इस गिरावट के लिए विशेषज्ञ कई कारकों को जिम्‍मेदार मान रहे हैं. आइये जानते हैं इनके बारे में.

अमेरिकी बाजार में जोरदार गिरावट : अमेरिकी शेयर बाजारों में 5 मई को भारी गिरावट दर्ज की गई. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल इंडेक्स औंधे मुंह गिरा और इसमें 1000 प्वाइंट से ज्यादा की गिरावट आई. इसी तरह नैस्‍डैक भी मंदी की चपेट में आया और पांच फीसदी टूट गया.अमेरिकी इक्विटी बाजार में आई इस मंदी का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा.

महंगाई की मार : दुनिया में महंगाई लगातार बढ़ रही है. बैंक ऑफ इंग्‍लैंड ने भी वर्ष 2022 के लिए अपना महंगाई अनुमान को बढ़ा दिया. इसका गहरा असर वैश्विक शेयर बाजारों पर हुआ. अब निवेशकों को लगने लगा है कि दूसरे विकसित देश भी महंगाई के अपने अनुमान में संसोधन कर सकते हैं. महंगाई के काबू में न आने और आगे और बढ़ने की संभावनाएं भी बिकवाली को हवा दे रही हैं.

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