इस गद्यांश में उपक्रम' का अर्थ है

The CTET exam is to be conducted between 29th December 2022 to 23rd January 2023. The exact exam dates will be mentioned in the CTET Admit Card. The CTET Application Correction Window was active from 28th November 2022 to 3rd December 2022. The detailed Notification for CTET (Central Teacher Eligibility Test) December 2022 cycle was released on 31st October 2022. The last date to apply was 24th November 2022. The CTET exam will be held between December 2022 and January 2023. The written exam will consist of Paper 1 (for Teachers of class 1-5) and Paper 2 (for Teachers of classes 6-8). Check out the CTET Selection Process here. Candidates willing to apply for Government Teaching Jobs must appear for this examination.

एक जुलाई से बंद हो रहा सिंगल यूज प्लास्टिक, जानिये क्या होगा इसका विकल्प

एक जुलाई से बंद हो रहा सिंगल यूज प्लास्टिक, जानिये क्या होगा इसका विकल्प


एक जुलाई को Single use विकल्प व्यापार क्या है Plastic प्रोडक्ट्स का उपयोग बंद हो जाएगा। बड़े पैमाने पर उपयोग किए जा रहे सिंगल यूज प्लास्टिक उत्पादों के स्थान पर अब जूट-कागज, कपड़ा, बांस आदि के उत्पाद विकल्प बनेंगे। ऐसे में व्यापार के नए सेक्टर में बूम होने की उम्मीद है।

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था

(iii) सामान्यत: व्यापार के खुलने से वस्तुओं का एक बाज़ार से दूसरे बाज़ार में आवागमन होता है। बाज़ार में वस्तुओं के विकल्प बढ़ जाते हैं। दो बाज़ारो में एक ही वस्तु का मूल्य एक सामान होने लगता है। अब दो देशों के उत्पादक एक दूसरे से हज़ारों मील दूर होकर भी एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

(iv) उदाहरण के लिए, दीवाली के मौसम के दौरान, भारत के खरीदारों में भारतीय और चीनी सजावटी रोशनी और बल्ब के बीच चयन करने का विकल्प होता है। कई दुकानों ने भारतीय सजावटी रोशनी को चीनी रोशनी में बदल दिया है। चीनी प्रकाश निर्माताओं के लिए, यह अपने व्यापार का विस्तार करने का एक अवसर प्रदान करता है।

व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण:

(i) विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं । वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं, जहाँ विश्वभर में बड़ी संख्या में उत्पादन किया जाता हैं ।

(ii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इन उत्पादों की आपूर्ति की जाती है। फिर इन्हें अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं। इन बड़ी कंपनियों में दूरस्थ उत्पादकों के मूल्य, गुणवत्ता, आपूर्ति और शर्म-शर्तों का निर्धारण करने की प्रचण्ड क्षमता होती हैं।

(iii) बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरदीना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना है। संयुक्त राज्य अमेरिका और पश्चिम के अन्य विकसित देशों ने उनके लिए पूर्ण समर्थन का विस्तार किया है।

(i) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ उसी स्थान पर उत्पादन इकाई स्थापित करती हैं जो बाज़ार के नज़दीक हो, जहाँ कम लागत पर कुशल और अकुशल श्रम उपलब्ध हो और जहाँ उत्पादन के अन्य कारकों की उपलब्धता सुनिचित हो।

(ii) साथ ही, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ सरकारी नीतियों पर भी नज़र रखती हैं, जो उनके हितों का देखभाल करती हैं।

(iii) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन देशों की स्थानीय कम्पनियों के साथ सयुंक्त रूप से उत्पादन करती हैं। लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के निवेश का सबसे आम रास्ता स्थानीय कंपनियों को खरदीना और उसके बाद उत्पादन का प्रसार करना हैं।

(iv) विकसित देशों की बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का ऑर्डर देती हैं। वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं, जहाँ विश्वभर में बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों द्वारा उत्पादन किया जाता हैं।

(v) बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इन उत्पादों की आपूर्ति की विकल्प व्यापार क्या है जाती है। फिर इन्हें अपने ब्राण्ड नाम से ग्राहकों को बेचती हैं।

भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेशी व्यापार और विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था।

(i) देश के उत्पादकों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से सरंक्षण प्रदान करने के लिए यह अनिवार्य माना गया ।

(ii) 1950 और 1960 के दशकों में उद्योगों का उदय हो रहा था और इस अवस्था में आयात से प्रतिस्पर्धा इन उद्योगों को बढ़ाने नहीं देती।

(iii) भारत में करीब विकल्प व्यापार क्या है सन् 1991 के प्रारम्भ से नीतियों में कुछ दूरगामी परिवर्तन किए गए। सरकार ने यह निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों के लिए विश्व के उत्पादकों से प्रतिस्पर्द्धा करने का समय आ गया हैं।

(iv) यह महसूस किया गया कि प्रतिस्पर्धा से देश में उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा, क्योंकि उन्हें अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा।

(v) इस निर्णय का प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने समर्थन किया ।

अतः विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर से अवरोधों को काफी हद तक हटा दिया गया।

दो दशक पहले की तुलना में भारतीय खरीददारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह . की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथ . बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं क्योंकि . । जबकि बाजार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प इसलिए बढ़ते . और . के प्रभाव का विकल्प व्यापार क्या है अर्थ है उत्पादकों के बीच अधिकतम . ।

विकल्प व्यापार क्या है

कृषि के आर्थिक मामलों के जानकार बोले : अब खेती को व्यापार की तरह देखने की जरूरत

नए कृषि विधेयकों को लेकर किसानों के विरोध और समर्थन के बीच कृषि अर्थशास्त्री मानते हैं कि कृषि विधेयक किसानों के लिए नए विकल्प खोल सकते हैं।

On: Monday 05 October 2020

केंद्र सरकार ने हाल ही में तीन कृषि विधेयकों को कानून की शक्ल दी है। इन विधेयकों के बाद किसानों ने देशभर में प्रदर्शन किया है और राजनीतिक पार्टियां अब भी इन कृषि विधेयकों के विरोध में हैं। वहीं, कृषि विधेयकों और कृषि के आर्थिक मामलों के जानकार क्या राय रखते हैं? डाउन टू अर्थ ने इन कृषि विधेयकों पर राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों से विकल्प व्यापार क्या है जुड़े एग्री इकोनॉमिस्ट की राय ली है। कृषि विधेयक के समर्थन और विरोध के बीच इन विशेषज्ञों की राय मिली-जुली रही है। पढ़िए क्या कह रहे हैं एग्री इकोनॉमिस्ट :

कृषि और औद्योगिक उत्पाद और बाजार में बुनियादी फर्क होता है। कृषि उत्पादों की बात करें तो यह खराब होने वाले होते हैं। इनका उत्पादन सीजन के हिसाब से होता है। कृषि उत्पाद की गुणवत्ता में फर्क होता है साथ ही उपज की मात्रा के हिसाब से यह कहीं बहुत ज्यादा और कहीं बहुत कम भी होते हैं। वहीं, कृषि उपज से जुड़े बाजारों में प्रतिस्पर्धा होती है और व्यापक स्तर पर खरीददार और विक्रेता मौजूद होते हैं। जबकि औद्योगिक उत्पादों के मामले में सिर्फ कुछ विक्रेता होते हैं और कई मामलों में खरीददार बहुत कम होते हैं। कृषि और औद्योगिक उत्पाद व उसके बाजार का यह चारित्रिक विशेषताएं से ही तय होता रहा है कि उत्पादक कीमत लेने वाला है या कीमत बनाने वाला।

आजादी के बाद से इस परिद्श्य में बदलाव हुए हैं और सरकार की तरफ से सहकारिता बाजार समितियां, नियामक बाजार, भंडारण के गोदाम की स्थापना जैसे कदम उठाए गए हैं। समय-समय पर उठाए गए इन कदमों की वजह ने अतीत में कई बदलाव किए हैं। सहकारिता बजाार के सिद्धांत पर टिका अमूल इसका बेहतरीन उदाहरण हो सकता है। अमूल के साथ लाखों छोटे किसान जुड़े हुए हैं जो मात्रा के हिसाब से बेहद कम उत्पादन करते हैं। वहीं हाल ही में फार्मर्स प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) बनाए गए हैं जो किसानों की पहुंच बाजार तक बनाने में मददगार हैं।

हाल ही में पास किए गए तीन कृषि विधेयक कृषि उत्पादों के स्वतंत्र तरीके से मूवमेंट में सहायक होंगे। किसानों के पास उनके उत्पाद को बेचने के लिए काफी विकल्प होंगे। गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा बाजार की संरचना को मजबूत बनाने के लिए निवेश भी आकर्षित विकल्प व्यापार क्या है होंगे। इसके चलते प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बल मिलेगा।

- अशोक के आर, निदेशक, सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल एंड रूरल डेवलपमेंट स्टडीज, तमिलनाडु

भारत में कृषि का जो बुनियादी ढांचा है उसमें 80-85 प्रतिशत किसानों के पास बेहद छोटी कृषि जोत है। इसलिए उनका उत्पादन भी कम होता है। इसकी वजह से वो मोलभाव करने की स्थिति में नहीं होते हैं। अब तक किसानों की उपज एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी के ज़रिये ही रेग्यूलेट होती थी। हम इसे अलग-अलग श्रेणी में नहीं रख सकते कि किसान बिजनेस कर रहा है तो घाटे में जा रहा है और उद्योगपति व्यापार कर रहे हैं तो फायदे में रहते हैं। अगर कोई उद्योगपति व्यापार करता है तो उसकी व्यापार की समझ बेहतर होती है। किसान विकल्प व्यापार क्या है अपनी प्राथमिक उपज की मार्केटिंग करता है। उद्योगपति उसमें वैल्यू एड करता है। उसकी पैकेजिंग करता है। कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है तो वो बनवाता है। पूरे सप्लाई चेन में निवेश करता है। पूरी सप्लाई को कंट्रोल करता है। इसलिए उन्हें ज्यादा फायदा मिलता है। अब हमें खेती को व्यापार की तरह देखना चाहिए। नए कानून में खेती को व्यापार की तरह देखा जा रहा है। जिसमें किसान को अपनी उपज का मूल्य तय करने की छूट दी गई है। उसे मंडी में ही बेचने की बाध्यता खत्म की गई है। किसान को अपनी उपज बेचने के लिए नए विकल्प व्यापार क्या है विकल्प दिए गए हैं।

- एम एल शर्मा, कृषि के आर्थिक मामलों के जानकार, पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय , उत्तराखंड

नए तीन कृषि बिल जो आए हैं इसका एक मतलब है कि पहले गांव का व्यापारी किसानों को लूटता थ अब बस इतना अंतर आएगा कि उसे बड़े कारपोरेट घराने लूटेंगे। मेरे मन भी इस बात का डर है कि इस नए कानून के तहत जिस तरह से बड़ी कंपनियों को छूट दी गई है उससे ये सप्लाई को कंट्रोल न करने लगें। इससे उनके हाथों में प्राइज बढ़ाने का मौका मिलेगा। इस नए एग्री ट्रेड के तहत हर हाल में सरकार को अब छोटे या मझौले किसानों को यह बात समझानी होगी कि उसे सस्ते में अपनी उपज नहीं बेचनी है। इस दिशा में सरकार की चुप्पी खतरनाक है।

डॉ मधु शर्मा, इंस्टीट्यूट ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, डायरेक्टर, बीकानेर, राजस्थान

Gold ETF निवेश के लिए अच्छा विकल्प, जानिए कैसे होता है इसमें इन्वेस्ट, क्या क्या हैं फायदे?

Gold की कीमतों में आज बड़ा उछाल दर्ज किया गया है.

बीते 1 साल में यह 56 हजार से 47 हजार पर आ गया है. एक्सपर्ट का मानना है कि सोने में निवेश करने का ये सही समय है, क्योंक . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : September 16, 2021, 10:49 IST

Gold ETF: सोने में निवेश हमेशा से सुरक्षित और बेहतर रिटर्न वाला माना जाता रहा है. इसी कड़ी में गोल्ड ईटीएफ एक बेहतर विकल्प दिखता है. सोने की कीमत में इन दिनों गिरावट जारी है. बीते 1 साल में यह 56 हजार से 47 हजार पर आ गया है. एक्सपर्ट का मानना है कि सोने में निवेश करने का ये सही समय है, क्योंकि आने वाले समय में सोने के दामों में फिर तेजी देखी जा सकती है.

अगर आप भी सोने में निवेश करने का मन बना रहे हैं तो गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या गोल्ड ETF में निवेश करना सही रहेगा. आज हम आपको गोल्ड ETF के बारे में बता रहे हैं ताकि आप इसमें निवेश करके फायदा कमा सकें.

क्या है गोल्ड ETF?
यह एक ओपन एंडेड म्यूचुअल फंड होता है, जो सोने के गिरते-चढ़ते भावों पर आधारित होता है. ETF बहुत अधिक कॉस्ट इफेक्टिव होता है. एक गोल्ड ETF यूनिट का मतलब है कि 1 ग्राम सोना. वह भी पूरी तरह से प्योर. यह गोल्ड में इन्वेस्टमेंट के साथ स्टॉक में इन्वेस्टमेंट की फ्लेक्सिबिलिटी देता है. गोल्ड ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है. हालांकि इसमें आपको सोना नहीं मिलता. आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा.

गोल्ड ETF में निवेश करने के हैं कई फायदे
कम मात्रा में भी खरीद सकते हैं सोना: ETF के जरिए सोना यूनिट्स में खरीदते हैं, जहां एक यूनिट एक ग्राम की होती है. इससे कम मात्रा में या SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए सोना खरीदना आसान हो जाता है. वहीं भौतिक (फिजिकल) विकल्प व्यापार क्या है सोना आमतौर पर तोला (10 ग्राम) के भाव बेचा जाता है. ज्वेलर से खरीदने पर कई बार कम मात्रा में सोना खरीदना संभव नहीं हो पाता.

मिलता है शुद्ध सोना
गोल्ड ETF की कीमत पारदर्शी और एक समान होती है. यह लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन का अनुसरण करता है, जो कीमती धातुओं की ग्लोबल अथॉरिटी है. वहीं फिजिकल गोल्ड अलग-अलग विक्रेता/ज्वेलर अलग-अलग कीमत पर दे सकते हैं. गोल्ड ETF से खरीदे गए सोने की 99.5% शुद्धता की गारंटी होती है, जो कि सबसे उच्च स्तर की शुद्धता है. आप जो सोना लेंगी उसकी कीमत इसी शुद्धता पर आधारित होगी.

नहीं आता ज्वेलरी मेकिंग का खर्च: गोल्ड ETF खरीदने में 0.5% या इससे कम की ब्रोकरेज लगती है, साथ ही पोर्टफोलियो मैनेज करने के लिए सालाना 1% चार्ज देना पड़ता है. यह उस 8 से 30 फीसदी मेकिंग चार्जेस की तुलना में कुछ भी नहीं है, जो ज्वेलर और बैंक को देना पड़ता है, भले ही आप सिक्के या बार खरीदें.

सोना रहता है सुरक्षित
इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड डीमैट अकाउंट में होता है जिसमें सिर्फ सालाना डीमैट चार्ज देना होता है. साथ ही चोरी होने का डर नहीं होता. वहीं फिजिकल गोल्ड में चोरी के खतरे के अलावा उसकी सुरक्षा पर भी खर्च करना होता है.

व्यापार की आसानी
गोल्ड ETF को बिना किसी परेशानी के तुरंत खरीदा और बेचा जा सकता है. यह ETF को एक उच्च लिक्विड भाग देता है. गोल्ड ETF को लोन लेने के लिए सिक्योरिटी के तौर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश?
गोल्ड ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है. इसमें NSE पर उपलब्ध गोल्ड ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट विकल्प व्यापार क्या है जाएगी. आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद गोल्ड ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं. ट्रेडिंग खाते के जरिए ही गोल्ड ETF को बेचा जाता है.

आने वाले 1 साल में 54 हजार तक जा सकता है सोना
केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया कहते हैं कि अभी सोने पर थोड़ा दबाव बना हुआ है. बढ़ती महंगाई और कोरोना के कारण कई देशों में लगे लॉकडाउन के हटने के बाद आने वाले समय में सोने को सपोर्ट मिलेगा. इससे आने वाले एक साल में सोना फिर 54 हजार तक जा सकता है. वहीं पृथ्वी विकल्प व्यापार क्या है फिनमार्ट के डायरेक्टर मनोज कुमार जैन कहते हैं कि साल के आखिर तक सोने के दाम 50 हजार रुपए पर पहुंच सकते हैं.

सोने में सीमित निवेश फायदेमंद
रूंगटा सिक्योरिटीज के सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर हर्षवर्धन रूंगटा कहते हैं भले ही आपको सोने में निवेश करना पसंद हो तब भी आपको इसमें सीमित निवेश ही करना चाहिए. एक्सपर्ट के अनुसार कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 10 से 15% ही सोने में निवेश करना चाहिए. किसी संकट के दौर में सोने में निवेश आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न को कम कर सकता है.

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