अप्रैल में पहले तीन दिन रुला देंगे एटीएम

गिरते बाजार में हरगिज न करें ये गलतियां, चुकानी पड़ सकती है भारी कीमत

वी के विजयकुमार ने कहा कि आगे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और एफआईआई की तरफ से हो रही बिकवाली बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी रहेगी

भारतीय स्टॉक मार्केट में इस साल भारी गिरावट देखने को मिली है। हालांकि इसने ग्लोबल मार्केट की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इस शेयर बाजार की धारणा में सुधार तरह के गिरते बाजार में तमाम निवेशक इस उम्मीद में खराब क्वालिटी के स्टॉक में टिके रहते हैं कि इनमें मार्केट रिकवर होने पर सुधार होता दिखेगा। गिरावट में खरीद करने वाले कुछ निवेशक मार्केट करेक्शन में भारी मार खाए खराब क्वालिटी के शेयरों में खरीदारी करने की गलती करते हैं।

बाजार जानकारों का कहना है कि निवेशकों को बाजार में आने वाले किसी भी करेक्शन का इस्तेमाल अपने पोर्टफोलियो में शामिल खराब क्वालिटी के स्टॉक से छुटकारा पाने के लिए करना चाहिए और करेक्शन में अच्छे क्वालिटी के शेयरों को पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए।

Tradingo के फाउंडर पार्थ न्याति का कहना है कि भारतीय बाजारों ने हाल में आई गिरावट में अपने ग्लोबल पीयर्स की तुलना में काफी अच्छी मजबूती दिखाई है। इसके बावजूद हमारा मानना है कि निवेशकों को ऐसी कंपनियों से दूर रहना चाहिए जिनके फंडामेंटल्स कमजोर हैं। इसके अलावा निवेशकों को पेनी स्टॉक्स और ओवरवैल्यूड और खबरों पर आधारित स्टॉक्स से भी दूर रहना चाहिए। जिन निवेशकों के पास ऐसे स्टॉक हों उनको घाटे मुनाफे का विचार किए बिना तुरंत इन शेयरों से निकल जाना चाहिए और ऐसी क्वालिटी कंपनियों में निवेश करना चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावना अच्छी है। जिनका वैल्यूएशन अच्छा हो और जिनको प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल हो।

नौ माह बाद शेयर बाजार में लौटे एफपीआई, जुलाई में किया 4,989 करोड़ रुपये का निवेश

नौ माह तक बिकवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजारों में लौट आए हैं. इस वजह से शेयर बाजारों में लगभग 5 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. हालांकि उस दौरान एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों से 61973 करोड़ रुपये निकाले थे.

नई दिल्ली : लगातार नौ माह तक बिकवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय शेयर बाजारों में लौट आए हैं. जुलाई में एफपीआई ने शेयर बाजारों में करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है. डॉलर इंडेक्स के नरम पड़ने और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों के बाद एफपीआई एक बार फिर लिवाल बन गए हैं. इससे पहले जून में एफपीआई ने शेयरों से 50,145 करोड़ रुपये निकाले थे. यह मार्च, 2020 के बाद किसी एक माह में सबसे अधिक निकासी है. उस समय एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों से 61,973 करोड़ रुपये निकाले थे.

यस सिक्योरिटीज के प्रमुख विश्लेषक-इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज हितेश जैन का मानना है कि अगस्त में भी एफपीआई का प्रवाह सकारात्मक बना रहेगा. इसकी वजह यह है कि रुपये का सबसे खराब समय अब बीत चुका है और कच्चे तेल के दाम भी एक दायरे में कारोबार कर रहे हैं. इसके अलावा भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बेहतर रहे हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजारों में शुद्ध रूप से 4,989 करोड़ रुपये का निवेश किया। माह के दौरान नौ दिन वे शुद्ध लिवाल रहे.

इससे पहले पिछले लगातार नौ माह से एफपीआई बिकवाल बने हुए थे. पिछले साल अक्टूर से इस साल जून तक वे भारतीय शेयर बाजारों से 2.46 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा, 'जुलाई में एफपीआई के प्रवाह की वजह फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पावेल का बयान है. पावेल ने कहा कि है कि अमेरिका अभी मंदी में नहीं है. पावेल के बयान के बाद धारणा में सुधार हुआ है और वैश्विक स्तर पर निवेशक अब जोखिम उठाने को तैयार दिख रहे हैं.'

हालांकि, जुलाई में एफपीआई ने ऋण या बॉन्ड बाजार से 2,056 करोड़ रुपये की निकासी की है. श्रीवास्तव का मानना है कि आगे एफपीआई का रुख क्या रहेगा, इसको अनुमान लगाने में अभी कुछ समय लगेगा.

एक्सपर्ट एडवाइस: लंबी अवधि के इक्विटी निवेश के लिए यह बेहतर समय, जल्द ही बन सकती है लाभ की स्थिति

बिजनेस डेस्क। कोरोनावायरस से संबंधित घटनाक्रमों और इससे उपजी चिंताओं के मद्देनजर बाजार ने घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वर्तमान में, इक्विटी मूल्यांकन सस्ते हैं और निवेशकों में घबराहट का माहौल है। अतीत में इस तरह की घटनाएं लंबी अवधि के इक्विटी निवेश के लिए आकर्षक साबित हुए हैं। निमेश शाह (एमडी एवं सीईओ, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ) कहते हैं कि ऐसा अवसर एक दशक में एक बार आता है। पिछली बार निवेशकों को ऐसा मौका 2008 और 2001 में मिला था।


3 से 5 निवेश में फा
यदा
निमेश शाह अनुसार तीन से पांच साल तक के निवेशक भारतीय शेयरों से उम्मीद से ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। याद रखें, जब भी बाजार बुरे दौर से गुजरता है तो समाचार का प्रभाव बेहद नकारात्मक होता है और कोई भविष्यवाणी नहीं कर सकता है कि आगे क्या होगा। इसका पता तो अतीत में जाने के बाद ही लगता है। यहां तक कि डेट मार्केट वर्तमान में आकर्षण दिखाई पड़ता है और साथ ही निवेश का एक दिलचस्प अवसर प्रस्तुत करता है। इसका कारण अच्छे क्रेडिट का प्रसार है। इसलिए, यहां भी हमारे पास एक शेयर बाजार की धारणा में सुधार दशक में एक बार कॉर्पोरेट पेपर में निवेश करने और इस समय इक्विटी में निवेश करने का अच्छा अवसर आया है।

कोरोना के बाद जल्द ही बाजार में होगा सुधार
हमारे इक्विटी वैल्यूएशन इंडेक्स (फैक्टशीट में प्रकाशित) के अनुसार, बाजार ओवरसोल्ड क्षेत्र में है और अब यह संकेत दे रहा है कि इक्विटी में निवेश करने का समय आ गया है। हमारा मानना है कि कोरोनावायरस पर बाजार में सुधार होने की संभावना है। कोरोनावायरस पर अच्छा समाचार मिलते ही बाजार में सुधार होने लगेगा। इस धारणा को बाधित करने वाला कारक यह है कि फिलहाल बाजार में 21 दिन की अवधि से आगे के लॉकडाउन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। साथ ही हमें नहीं पता कि कोरोनावायरस का प्रभाव कब तक चलेगा। आपूर्ति और मांग दोनों पर व्यवधान उत्पन्न हो गया है, इसलिए निकट भविष्य में मोटे तौर पर मंदी की संभावना हो सकती है। कॉर्पोरेट इंडिया भी कोरोना महामारी की चपेट में आ रहा होगा और इसका प्रभाव आने वाली तिमाहियों की आय में दिखाई देगा। तो, निकट भविष्य में बाजार में तेजी की संभावना नहीं दिख रही है।

शेयरों की कीमतों में हो रहा सुधार
2008-2009 की मंदी से सबक यह सीखा गया है कि जब आय में कटौती होती है तो फिक्र की कोई बात नहीं क्योंकि बाजार आगे का रूख अपनाएगा। आपको याद रखना होगा कि शेयर की कीमतों में 30-40 प्रतिशत तक का सुधार हो चुका है। इसलिए, आय की तरफ ध्यान देने का कोई औचित्य कोई नहीं है। जब शेयर की कीमतों में इस तरह के भारी सुधार देखने को मिल रहे हों। महामारी फैलने से पहले भारतीय बाजार का मूल्यांकन बुलंदी पर था। इसलिए, हम निवेशकों को डायनामिक असेट अलोकेशन उत्पादों और डेट योजनाओं का विकल्प चुनने की सलाह दे रहे थे। शेयरों को भुनाने का शायद ही कोई दबाव रहा हो। हमें लगता है कि भारतीय निवेशक 2008 में देखे गए पिछले संकट के बाद से काफी परिपक्व हुए हैं। हम इस सुधार में खरीदारी कर रहे हैं। सभी क्षेत्रों में काफी सुधार हुआ है और ये फिलहाल 2008 के मूल्यांकन के स्तर से भी कम पर हैं। हमारा मानना है कि यह एक दशक में एक बार के लिए इस तरह के सस्ते मूल्यांकन पर खरीदने का अच्छा अवसर है। अस्थिरता इक्विटी में निवेश का एक हिस्सा है। बाजार में हुआ यह सुधार पिछले कुछ वर्षों में बाजार में प्रवेश किए उन निवेशकों के लिए अपनी तरह का अनुभव का पहला होगा। हालांकि, अगर ये निवेशक वर्तमान दौर की अनिश्चितता में अगर बने रह गए तो हमारा मानना है कि ऐसे निवेशक आने वाले वर्षों में उम्मीद से ज्यादा लाभ कमाने का अवसर प्राप्त करेंगे।

डेट मार्केट निवेश के हिसाब से बेहतर
ऐतिहासिक रूप से यह देखा गया है कि जब भी बाजार में सुधार होता है तो वे निवेशक जो उठापटक के दौरान निवेश में बने रहते हैं वो तेजी से लाभान्वित होते हैं। हमारा मानना है कि वर्तमान में ऋण बाजार (डेट मार्केट) अल्प से मध्यम अवधि के नजरिए से अच्छी कीमत पर हैं। निवेशकों को लाभ से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए ऋण अर्थात डेट में निवेश करना चाहिए। रूढ़िवादी या परंपरागत निवेशक कम, लघु और मध्यम अवधि के ऋण उत्पादों में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं। उच्च जोखिम क्षमता वाले निवेशक अक्रूअल फंडों में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं क्योंकि अक्रूअल को रेपो सबसे आकर्षक बना रहा है। हाल ही में सुधार के बाद, समूचा मूल्यांकन आकर्षक हो गया है। मेटल, माइनिंग, टेलीकॉम और बिजली के क्षेत्र में अच्छी संभावनाएं हैं जबकि कंज्यूमर, नॉन-ड्यूरेबल्स, ऑटो और बैंकिंग के क्षेत्र में सुधार की गुंजाइश है। बैंकिंग में मूल्यांकन - सार्वजनिक और सार्वजनिक उपक्रम - में काफी सुधार हुआ है। हम कॉर्पोरेट ऋण बैंकों, अच्छी देयता वाले फ्रेंचाइजी और ग्राहक केंद्रित गैर ऋण फ्रेंचाइजी जैसे विषयों पर हमेशा चुनिंदा रूप से सकारात्मक रहे हैं। हमने उन चुनिंदा बैंकों में सुधार किया है जिनके पास अच्छी असेट लाइबिलिटी मैनेजमेंट उच्च कासा और व्यापक वित्तीय सेवाओं की उपस्थिति है। हमें विश्वास है कि एनबीएफसी तंग ऋण बाजार के कारण ऋण वृद्धि में नरमी देखना जारी रखेंगे। लेकिन हम चुनिंदा गोल्ड फाइनेंसरों और इंश्योरेंस पर पॉजिटिव हैं, जिन्हें भारत की लॉन्ग टर्म स्ट्रक्चरल ग्रोथ से फायदा हो सकता है।

एसआईपी में किए गए निवेशों को टॉप-अप करना चाहिए
पिछले 12 महीनों से, एसआईपी में औसतन प्रवाह 8,200 करोड़ रुपये से अधिक का रहा है। हमारा मानना है कि यह प्रवृत्ति जारी रहने की संभावना है क्योंकि एसआईपी म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए खुदरा निवेशकों के पसंदीदा मार्ग के रूप में उभर रहा है। ऐतिहासिक रूप से, यह देखा गया है कि कोई भी वैश्विक घटना जिसके कारण बाजार में मंदी आई है, निवेश के आकर्षक अवसर साबित हुए हैं। ऐसे समय में यह महत्वपूर्ण है कि मौजूदा निवेश के साथ बने रहें। वर्तमान बाजार की स्थिति के मद्देनजर निवेशकों को अपने मौजूदा एसआईपी और म्यूचुअल फंड में किए गए अन्य निवेशों को टॉप-अप करना चाहिए क्योंकि अब अपेक्षाकृत कम कीमत पर अधिक इकाइयों को जमा करने का अवसर है। अनिश्चितता बाजार में अस्थिरता पैदा करती है। इसलिए उन उत्पादों में निवेश किया जाए जो बाजार में अस्थिरता से सबसे अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। असेट अलोकेशन या बैलेंस्ड एडवांटेज फंड का विकल्प चुनें और साथ ही डेट में निवेश की अनदेखी न करें। डेट बाजार भी निवेश के आकर्षक अवसर पेश कर रहे हैं।

Stock Market Closing: बाजार में लगातार दूसरे दिन तेजी, हरे निशान पर बंद हुए सेंसेक्स और निफ्टी

Stock Market Closing सभी क्षेत्रों में खरीदारी सकारात्मक वैश्विक बाजारों बेहतर मुद्रास्फीति डेटा अंक और फेडरल रिजर्व द्वारा धीमी दर वृद्धि की उम्मीद शेयर बाजार की धारणा में सुधार के कारण भारतीय बेंचमार्क सूचकांक 13 दिसंबर को लगातार दूसरे दिन उच्च स्तर पर बंद हुए।

मुंबई, बिजनेस डेस्क। घरेलू मोर्चे पर मुद्रास्फीति के निचले स्तर पर जाने और अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों में सुधार के बाद बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुधवार को बढ़त के साथ बंद शेयर बाजार की धारणा में सुधार हुए। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 144.61 अंक या 0.23 प्रतिशत चढ़कर 62,677.91 पर बंद हुआ। दिन के दौरान, यह शेयर बाजार की धारणा में सुधार 301.81 अंक या 0.48 प्रतिशत बढ़कर 62,835.11 पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी 52.30 अंक या 0.28 प्रतिशत बढ़कर 18,660.30 पर बंद हुआ।

Share Market Close Today (Jagran File Photo)

सेंसेक्स पैक से टेक महिंद्रा, टाटा स्टील, एनटीपीसी, इंडसइंड बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पावर ग्रिड, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और लार्सन एंड टुब्रो प्रमुख गेनर्स रहे। नेस्ले, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर और अल्ट्राटेक सीमेंट पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल थे।

बाजार में लौटा भरोसा

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं से अपेक्षा से बेहतर मुद्रास्फीति रीडिंग, शेयर बाजार की धारणा में सुधार आईटी शेयरों में सुधार से घरेलू बाजार की तेजी में मदद मिली। अमेरिकी सीपीआई मुद्रास्फीति नवंबर में 7.1 प्रतिशत तक कम होने से फेड में किसी तेजी वृद्धि की संभावना कम हो गई है।

Share Market 20 December 2022 nifty and sensex (Jagran File Photo)

दुनिया के बाजारों का हाल

एशिया में कहीं और, सियोल, टोक्यो, शंघाई और हांगकांग में इक्विटी बाजार सकारात्मक क्षेत्र में समाप्त हुए। मध्य सत्र के सौदों में यूरोप में इक्विटी एक्सचेंज कम कारोबार कर रहे थे। मंगलवार को अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.06 प्रतिशत गिरकर 80.63 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने मंगलवार को 619.92 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे बढ़ा

घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख और मुद्रास्फीति के दबाव में कमी आने से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई और बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 15 पैसे की तेजी के साथ 82.45 (अनंतिम) पर बंद हुआ। विदेशी मुद्रा व्यापारियों ने कहा कि विदेशों में कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू इकाई को समर्थन मिला। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में, रुपया ग्रीन बैंक के मुकाबले शेयर बाजार की धारणा में सुधार 82.60 पर सपाट खुला और 82.40 के इंट्रा-डे हाई और 82.71 के निचले स्तर पर रहा। डॉलर के मुकाबले यह 82.45 पर बंद हुआ।

शुरुआती कारोबार में रुपया 12 पैसे मजबूत

घरेलू शेयर बाजार में पूंजी प्रवाह जारी रहने की उम्मीद से बैंकों एवं निर्यातकों की ओर से डॉलर बिकवाली बढ़ाए जाने के कारण अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में आज के शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 61.80 रुपए प्रति डॉलर पर पहुंच गया। अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना […]

शुरुआती कारोबार में रुपया 12 पैसे मजबूत

अप्रैल में पहले तीन दिन रुला देंगे एटीएम

घरेलू शेयर बाजार में पूंजी प्रवाह जारी रहने की उम्मीद से बैंकों एवं निर्यातकों की ओर से डॉलर बिकवाली बढ़ाए जाने के कारण अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में आज के शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 12 पैसे मजबूत होकर 61.80 रुपए प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

अन्य वैश्विक मुद्राओं की तुलना में डॉलर की कमजोरी से भी रुपए की विनिमय दर में सुधार आया।

फारेक्स बाजार में कल के कारोबारी सत्र के दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया एक पैसा कमजोर होकर 61.92 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था, जो आज के शुरुआती कारोबार में 12 पैसे मजबूत होकर 61.80 रुपए प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

फारेक्स बाजार के विश्लेषकों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजार में पूंजी प्रवाह जारी रहने की उम्मीद से बैंकों एवं निर्यातकों की ओर से डॉलर बिकवाली बढ़ाए जाने के कारण रुपए की धारणा में सुधार आया।

बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स आज के शुरुआती कारोबार में 88.93 अंक अथवा 0.31 फीसद बढ़कर 28,651.75 अंक पर पहुंच गया।

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