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तेजी से बढ़ेगा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को खत्म करने का बाजार

By विस्तृत क्षमताएं Vivek Mishra
Published: Friday 21 June 2019

Photo Credit: GettyImage

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एक तरफ नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। तो दूसरी तरफ सुरक्षा कारणों से परमाणु ऊर्जा के प्रति कई देशों का मोहभंग हो रहा है। इस आकर्षण से मोहभंग के सफर ने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट (डीकमशनिंग) करने के बाजार को गरम कर दिया है।

वैश्विक व्यापार का विश्लेषण करने और सलाह देने वाली एडरॉइट मार्केट रिसर्च की हालिया और ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट का पूर्वानुमान है कि बेहद विशिष्ट संचालन (न्यूक्लियर डीकमशनिंग) वाली इस बाजार को 2018 से 2025 तक पांच फीसदी की उछाल मिल सकती है। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक, सितंबर 2017 तक दुनिया में करीब 110 कॉमर्शियल पावर रिएक्टर्स, 48 प्रोटोटाइप रिएक्टर्स, 250 रिसर्च रिएक्टर्स और विभिन्न ईंधन सुविधा केंद्रों का संचालन बंद हो चुका है। यह सभी सुविधाएं डीकमशनिंग प्रक्रिया के अधीन होंगी। ऐसे में इनमें लंबा वक्त लगेगा क्योंकि इन विशिष्ट तरीके के प्लांट से बड़े पैमाने पर विस्तृत क्षमताएं उपकरणों, कल-पुर्जों को हटाना होगा। उनका सुरक्षित निस्तारण भी करना होगा। सर्वे के मुताबिक ऐसे कामों की संख्या में 2018-2023 के बीच बढ़ोत्तरी हो सकती है।

यूरोपियन यूनियन देशों में परमाणु ऊर्जा स्रोतों से बेहद तेजी से किनारा किया जा रहा है। यूरोपियन देश नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में सबसे ज्यादा आगे आ रहे हैं। इससे परमाणु ऊर्जा की विकास की रफ्तार धीमी हो रही है। यह निकट भविष्य में संयंत्रों के डीकमशनिंग बाजार के लिए ईंधन का काम कर सकता है। जर्मनी और फ्रांस ने आगे बढ़कर चरणबद्ध तरीके से परमाणु ऊर्जा को खत्म करने की योजना तैयार कर उसपर अमल शुरु कर दिया है। फ्रांस ने तय किया है कि 2025 तक वह 17 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को बंद करेगा।

दुनिया में सबसे ज्यादा, 99 परमाणु ऊर्जा संयंत्र अमेरिका में हैं। इनमें 10 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की डीकमीशनिंग की जा चुकी है जबकि 10 अभी इसकी प्रक्रिया में हैं। वहीं, रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि “यूरोपियन यूनियन के विभिन्न देशों का नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर ध्यान बढ़ा है। वे चरणबद्ध तरीके से परमाणु ऊर्जा को बाहर भी कर रहे हैं। इससे प्रत्याशित है यूरपोयिन क्षेत्र में परमाणु संयंत्रों को सेवाओं से मुक्त करने संबंधी बाजार में उछाल आएगा।”

रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2019 तक वैश्विक स्तर पर 76 परमाणु संयंत्र सेवा मुक्त हो जाएंगे। 2020 में 183 ईकाइयां और 2030 में 127 ईकाइयां बंद हो सकती है। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में 2018-2022 के बीच परमाणु संयंत्रों को सेवाओं से मुक्त कराने की सुविधा मुहैया कराने वाले बाजार में 29.57 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। हालांकि, भारत अभी तक ऐसा नहीं कर सकता है। हालांकि, परमाणु संयंत्रों को हटाने के लिए एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड की एक गाइडलाइन जरूर जारी की गई है। भारत में परमाणु ऊर्जा का मुख्य उत्पादक न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड है जो भविष्य में संयंत्रों को हटाने के लिए अपने यूजर्स से लेवी वसूल रहा है। यह फंड डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के जरिए तैयार की गई है।

न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की 2017-2018 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक संयंत्रों को भविष्य में हटाने के लिए 1975 करोड़ रुपये का फंड एकत्र विस्तृत क्षमताएं किया जा चुका है। 2012 के दौरान संसद में एक सवाल के जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी की अध्यक्षता करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की उम्र पर किसी तरह की सीमा नहीं चाहता है। हालांकि, उसी जवाब में यह भी कहा गया था कि भारत के पास परमाणु संयंत्रों को हटाने की विस्तृत क्षमताएं मौजूद हैं। भारत में डीकमीशनिंग रिसर्च रिएक्टर्स जेरलीना और पुर्णिमा के पास पर्याप्त विशेषज्ञता है।

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सहायक सामग्री और सहायता-उपकरण

सहायक सामग्री एंव सहायक-उपकरण दिव्यांगजनों की गतिशीलता, संचार और उनकी दैनिक गतिविधियों में सहायता प्रदान करके उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने वाले उपकरण हैं। नि: शक्त व्यक्ति विस्तृत क्षमताएं की जरूरतों को पूरा करने के लिए सहायक उपकरणों की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। इन सहायक उपकरणों के उपयोग से नि: शक्त व्यक्ति किसी पर आश्रित नहीं रहता और समाज में उसकी भागीदारी बढ़ती है।

सहायक सामग्री एंव सहायक-उपकरण के कुछ उदाहरण नीचे दिए गए हैं:

  • दैनिक जीवन के लिए सहायक उपकरणः दैनिक जीवन में इस्तेमाल किये जाने वाले यंत्रों में खाने, स्नान करने, खाना पकाने, ड्रेसिंग, टॉइलेटिंग, घर के रखरखाव आदि गतिविधियों में इस्तेमाल किये जाने वाले स्वयं सहायता यंत्रों को शामिल किया गया है। इन उपकरणों में संशोधित खाने के बर्तन, अनुकूलित किताबें, पेंसिल होल्डर, पेज टर्नर, ड्रेसिंग उपकरण और व्यक्तिगत स्वच्छता अनुकूलित उपकरण शामिल हैं।
  • गतिशीलता उपकरण: दिव्यांगजनों को अपने आस-पास के स्थलों पर जाने के लिए सहायक उपकरण। इन उपकरणों में इलैक्ट्रिक या मैनुअल व्हीलचेयर, यात्रा के लिए वाहनों में संशोधन, स्कूटर, बैसाखी, बेंत और वॉकर शामिल हैं।
  • घर/कार्यस्थल के लिए संशोधनः भौतिक बाधाओं को कम करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन जैसे - लिफ्ट रैंप, सुलभ बनाने के लिए बाथरूम में संशोधन, स्वत: दरवाजा खोलने का उपकरण और बड़े दरवाजे आदि।
  • बैठने या खड़े होने की सुविधा के लिए उपकरण: अनुकूलित सिटिंग, तकिया, स्टैंडिंग टेबल, स्थापन विस्तृत क्षमताएं बेल्ट, दिव्यांगजन की अवस्था को नियंत्रित करने के लिए ब्रेसिज़ और वैज, दैनिक कार्यों के लिए शरीर को सहायता प्रदान करने वाले उपकरणों की श्रृंखला।
  • वैकल्पिक और आगम संचार उपकरण (एएसी) - ये उपकरण गूंगे या ऐसे दिव्यांगों की मदद करता हैं, जिनकी बातचीत करने के लिए आवाज मानक स्तर की नहीं है। इन उपकरणों में आवाज उत्पन्न करने वाले उपकरण और आवाज प्रवर्धन उपकरण शामिल हैं। नेत्रहीन व्यक्तियों के लिए, आवर्धक के रूप में उपकरण, ब्रेल या आवाज आउटपुट डिवाइस, लार्ज प्रिंट स्क्रीन और आवर्धक दस्तावेजों के लिए क्लोज सर्किट टेलीविजन आदि इस्तेमाल किए जाते हैं।
  • प्रोस्थेटिक्स और ओर्थोटिक्स: कृत्रिम अंग या स्पलिंट्स या ब्रेसिज़ जैसे आर्थोटिक उपकरणों द्वारा शरीर के अंगों का रिप्लेसमेंट या वृद्धि। इसके अलावा मानसिक वरोध या कमी में सहायता के लिए ऑडियो टेप या पेजर (एस या अनुस्मारक के रूप में सहायता करते है) जैसे कृत्रिम उपकरण भी उपलब्ध हैं।
  • वाहन संशोधन: अनुकूली ड्राइविंग उपकरण, हाथ द्वारा नियंत्रण, व्हीलचेयर और अन्य लिफ्ट, संशोधित वैन, या निजी परिवहन के लिए प्रयोग किए जाने वाले अन्य मोटर वाहन।
  • दृष्टिहीन/बधिरों के लिए संवेदी उपकरण: आवर्धक, बड़े प्रिंट स्क्रीन, कान की मशीन, दृश्य सिस्टम, ब्रेल और आवाज/संचार आउटपुट उपकरण।
  • कंप्यूटर के उपयोग से संबंधित उपकरणः दिव्यांगजनों को कंप्यूटर का उपयोग करने में सक्षम करने के लिए हेडस्टिक, प्रकाश संकेतक, संशोधित या वैकल्पिक कीबोर्ड, दबाव से सक्रिय होने वाला स्विच, ध्वनि या आवाज से चलने वाले उपकरण, टच स्क्रीन, विशेष सॉफ्टवेयर और वाइस टू टेक्स्ट सॉफ्टवेयर। इस श्रेणी में आवाज की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर भी शामिल हैं।
  • दिव्यांगजनों को सामाजिक/सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलों में भाग लेने में सक्षम करने के लिए मनोरंजनात्मक उपकरणः दिव्यांगजनों को सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलों में भाग लेने में सक्षम करने के लिए, फिल्मों के लिए ऑडियो डिवाइस, वीडियो गेम के लिए अनुकूली नियंत्रण जैसे उपकरण।
  • वातावरण पर नियंत्रणः दिव्यांगजनों को विभिन्न उपकरणों को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ, टेलीफोन के लिए स्विच, टीवी, या अन्य उपकरण जिन्हें दबाव, भौह या सांस द्वारा सक्रिय किया जा रहा हैं।

सहायक यंत्रों, उपकरणों और तकनीकों के उपयोग द्वारा दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र या सहायता की संभावना का प्रदर्शन करने के लिए राष्ट्रीय न्यास द्वारा एएडीआई (राष्ट्रीय न्यास का पंजीकृत संगठन), नई दिल्ली में 'संभव' नाम से उपलब्ध सहायक उपकरणों के प्रदर्शन के लिए एक राष्ट्रीय संसाधन केंद्र की स्थापना की गई है।

एएडीआई (क्षमता विकास और समावेशन के लिए कार्य) द्वारा प्रदान किए जाने वाले यंत्रों और सहायक उपकरणों के लागत के साथ-साथ उनकी विस्तृत सूची देखने के लिए यहां क्लिक करें

दिल्ली में स्थित संभव केंद्र :

एक्शन फॉर एबिलिटी डेवलपमेंट एंड इन्कलूजन (AADI)

2, बलबीर सक्सेना मार्ग, हौज खास, साउथ दिल्ली, नई दिल्ली

(हौजखास मेट्रो स्टेशन के पास)

टेलीफोन नं. - 011-26864736

संपर्क व्यक्ति : सुश्री मंजू मिश्रा/श्री विनय विज

मोबाइल:9968304227, फैक्स. 26853002

ई-मेल. aadi[underscore]jagruti[at]yahoo[dot]com

संभव एक नई योजना है जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय न्यास अधिनियम के तहत आने वाले दिव्यांगजनों को सहायक सामग्री और सहायता उपकरणों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।

इस केन्द्र में दिव्यांगजनों के अनुकूल शयनकक्ष, रसोईघर,स्नानघर, शौचालय आदि का प्रदर्शन भी किया जाएगा। केन्द्र में शिक्षण किट, गतिशीलता और संप्रेषण से संबंधित सहायक वस्तुएं आदि का भी प्रदर्शित किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत देश के प्रत्येक ऐसे नगर में अतिरिक्त संसाधन केन्द्रों की स्थापना की जाएगी, जिनकी जनसंख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 50 लाख से अधिक हो। केन्द्रों में सहायक उपकरणों की लागत सहित एक संदर्भ सूची प्रदर्शित की जाएगी।

तेजी से बढ़ेगा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को खत्म करने का बाजार

By Vivek Mishra
Published: Friday 21 June 2019

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एक तरफ नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। तो दूसरी तरफ सुरक्षा कारणों से परमाणु ऊर्जा के प्रति कई देशों का मोहभंग हो रहा है। इस आकर्षण से मोहभंग के सफर ने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट (डीकमशनिंग) करने के बाजार को गरम कर दिया है।

वैश्विक व्यापार का विश्लेषण करने और सलाह देने वाली एडरॉइट मार्केट रिसर्च की हालिया और ताजा रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इस रिपोर्ट का पूर्वानुमान है कि बेहद विशिष्ट संचालन (न्यूक्लियर डीकमशनिंग) वाली इस बाजार को 2018 से 2025 तक पांच फीसदी की उछाल मिल सकती है। विभिन्न अनुमानों के मुताबिक, सितंबर 2017 तक दुनिया में करीब 110 कॉमर्शियल पावर रिएक्टर्स, 48 प्रोटोटाइप रिएक्टर्स, 250 रिसर्च रिएक्टर्स और विभिन्न ईंधन सुविधा केंद्रों का संचालन बंद हो चुका है। यह सभी सुविधाएं डीकमशनिंग प्रक्रिया के अधीन होंगी। ऐसे में इनमें लंबा वक्त लगेगा क्योंकि इन विशिष्ट तरीके के प्लांट से बड़े पैमाने पर उपकरणों, कल-पुर्जों को हटाना होगा। उनका सुरक्षित निस्तारण भी करना होगा। सर्वे के मुताबिक ऐसे कामों की संख्या में 2018-2023 के बीच बढ़ोत्तरी हो सकती है।

यूरोपियन यूनियन देशों में परमाणु ऊर्जा स्रोतों से बेहद तेजी से किनारा किया जा रहा है। यूरोपियन देश नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में सबसे ज्यादा आगे आ रहे हैं। इससे परमाणु ऊर्जा की विकास की रफ्तार धीमी हो रही है। यह निकट भविष्य में संयंत्रों के डीकमशनिंग बाजार के लिए ईंधन का काम कर सकता है। जर्मनी और फ्रांस ने आगे बढ़कर चरणबद्ध तरीके से परमाणु ऊर्जा को खत्म करने की योजना तैयार कर उसपर अमल शुरु कर दिया विस्तृत क्षमताएं है। फ्रांस ने तय किया है कि 2025 तक वह 17 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को बंद करेगा।

दुनिया में सबसे ज्यादा, 99 परमाणु ऊर्जा संयंत्र अमेरिका में हैं। इनमें 10 परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की डीकमीशनिंग की जा चुकी है जबकि 10 अभी इसकी प्रक्रिया में हैं। वहीं, रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि “यूरोपियन यूनियन के विभिन्न देशों का नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को लेकर ध्यान बढ़ा है। वे चरणबद्ध तरीके से परमाणु ऊर्जा को बाहर भी कर रहे हैं। इससे प्रत्याशित है यूरपोयिन क्षेत्र में परमाणु संयंत्रों को सेवाओं से मुक्त करने संबंधी बाजार में उछाल आएगा।”

रिपोर्ट के मुताबिक 2017 से 2019 तक वैश्विक स्तर पर 76 परमाणु संयंत्र सेवा मुक्त हो जाएंगे। 2020 में 183 ईकाइयां और 2030 में 127 ईकाइयां बंद हो सकती है। वहीं रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में 2018-2022 के बीच परमाणु संयंत्रों को सेवाओं से मुक्त कराने की सुविधा मुहैया कराने वाले बाजार में 29.57 फीसदी की बढ़ोत्तरी होगी। हालांकि, भारत अभी तक ऐसा नहीं कर सकता है। हालांकि, परमाणु संयंत्रों को हटाने के लिए एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड की एक गाइडलाइन जरूर जारी की गई है। भारत में परमाणु ऊर्जा का मुख्य उत्पादक न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड है जो भविष्य में संयंत्रों को हटाने के लिए अपने यूजर्स से लेवी वसूल रहा है। यह फंड डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के जरिए तैयार की गई है।

न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की 2017-2018 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक संयंत्रों को भविष्य में हटाने के लिए 1975 करोड़ रुपये का फंड एकत्र किया जा चुका है। 2012 के दौरान विस्तृत क्षमताएं संसद में एक सवाल के जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी की अध्यक्षता करने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कहा था कि भारत परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की उम्र पर किसी तरह की सीमा नहीं चाहता है। हालांकि, उसी जवाब में यह भी कहा गया था कि भारत के पास परमाणु संयंत्रों को हटाने की विस्तृत क्षमताएं मौजूद हैं। भारत में डीकमीशनिंग रिसर्च रिएक्टर्स जेरलीना और पुर्णिमा के पास पर्याप्त विशेषज्ञता है।

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सब्सिडी पर 50 मीट्रिक टन क्षमता का प्याज भंडार गृह बनवाने के लिए आवेदन करें

apply for onion godown subsidy

अनुदान पर प्याज भंडार गृह हेतु आवेदन

उत्पादन के अनुसार भंडारण की क्षमता को पूरा करने के लिए देश तथा राज्यों में विभिन्न प्रकार की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है | जिसके लिए देश में भण्डारण की क्षमता को बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना चलाई जा रही है, योजना के तहत किसानों को नश्वर उत्पाद के भंडार गृह बनाने के लिए अनुदान दिया जाता है | जिसके लिए अलग-अलग राज्य सरकारों के द्वारा किसानों को अलग-अलग सब्सिडी दी जाती है | अभी मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी जिलों के किसानों को नश्वर उत्पादन की भंडारण क्षमता में वृद्धि की विशेष योजनान्तर्गत प्याज भंडारण गृह निर्माण पर सब्सिडी उपलब्ध करवाने के लिए आवेदन आमंत्रित किये गए हैं | किसान समाधान इस योजना की विस्तृत जानकारी लेकर आया है इच्छुक व्यक्ति आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं |

प्याज भंडार गृह (Store house) पर दी जाने वाली सब्सिडी

यह योजना राज्य पोषित योजना होने के कारण मध्य प्रवेश उधानिकी विभाग हितग्राही को सब्सिडी उपलब्ध करा रहा है | लाभार्थी किसानों को प्याज भंडार गृह पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है | मध्य प्रदेश उधानिकी विभाग के तरफ से 50 मीट्रिक टन क्षमता वाले भंडारण के लिए अधिकतम 3,50,000 /- रूपये की लागत निश्चित की गई है | इसमें किसानों को लागत की अधिकतम 1,75,000 रूपये तक की सब्सिडी दी जाएगी |

योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता

यह योजना मध्य प्रदेश के सभी जिलों में लागू की गई है तथा सभी जिले से इच्छुक किसान आवेदन कर सकते हैं | अभी सरकार ने राज्य के अनुसूचित विस्तृत क्षमताएं जाति एवं जनजाति के किसानों के लिए लक्ष्य जारी किये हैं | इसके अतिरिक्त सामान्य अथवा पिछड़े वर्ग के किसान अभी योजना के लिया आवेदन नहीं कर पाएंगे |

2 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती करना अनिवार्य होगा ?

हितग्राही किसान को कम से कम 2 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज का उत्पादन करना आवश्यक है | इसके साथ ही प्याज भंडारण का उपयोग किसी अन्य कामों के लिए नहीं किया जा सकता |

6 माह में प्याज भंडारण बनाना अनिवार्य होगा ?

प्याज भंडारण गृह का निर्माण NHRDF द्वारा जारी डिजाईन/ड्राइंग एवं निर्धारित मापदण्ड अनुसार होना चाहिए एवं आशय पत्र जारी होने के बाद अधिकतम 06 माह के भीतर प्याज भण्डार गृह का निर्माण पूर्ण करना आवश्यक होगा |

किसानों को कब तक दी जाएगी सब्सिडी

कृषकों द्वारा निर्मित प्याज भंडारण गृह का शत प्रतिशत भौतिक सत्यापन हेतु जिले के उप / सहायक संचालक उद्यान की अध्यक्षता में 03 सदस्यीय समिति गठित की जाएगी | समिति के मूल्यांकन एवं भौतिक सत्यापन तथा अनुसंशा के आधार पर संबंधित कृषक को अनुदान की राशि का भुगतान नियमानुसार एम.पी.एगो द्वारा डी.बी.टी. के माध्यम से कृषकों के बैंक खातों में किया जायेगा |

योजना का लक्ष्य की है ?

यह योजना राज्य के अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के 51 जिले के किसानों के लिए हैं | राज्य के सभी जिलों को मिलाकर 425 प्याज भंडारण का लक्ष्य रखा गया है | जिस पर 743.750 लाख रूपये की कुल सब्सिडी दी जाएगी | इस लक्ष्य में अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 173 तथा अनुसूचित जनजाति के किसानों के लिए 252 प्याज भंडारण का लक्ष्य है | जबकि अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 302.750 लाख रूपये का सब्सिडी दिया जायेगा वहीं अनुसूचित जनजाति के किसानों को 441.00 लाख रूपये की सब्सिडी दी जाएगी |

इच्छुक किसान अनुदान हेतु कब कर सकते हैं आवेदन

प्याज भंडारण गृह निर्माण के लिए आवेदन 23/04/2021 के सुबह 11:00 बजे से किया जायेगा | यह आवेदन जिले के दिये हुए लक्ष्य के अनुसार किया जायेगा | आवेदन लक्ष्य से 10% अधिक तक आवेदन किया जा सकता है |

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा युवाओं हेतु बकरी पालन विषय पर क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजन

कृषि विज्ञान केंद्र, बरेली ने मत्स्य, पशु पालन एवं डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार की परियोजना “लाभकारी डेयरी फार्मिंग और पशुधन प्रबंधन” प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों के क्षमता विकास कार्यक्रम के द्वारा “बकरी पालन” विषय पर 13 से 15 मार्च 2022 तक तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा युवाओं हेतु बकरी पालन विषय पर क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजनकृषि विज्ञान केंद्र द्वारा युवाओं हेतु बकरी पालन विषय पर क्षमता विकास कार्यक्रम का आयोजन

डॉ. बी. पी. सिंह, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केंद्र ने कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा की बकरी एक बहुउपयोगी पशु है जिससे मांस के अलावा दूध, खाल एवं खाद का उत्पादन प्राप्त किया जाता है। उन्होंने कहा कि साधनो के अभाव में छोटे, सीमांत कृषक एवं ग्रामीण युवा दुधारू पशुओं के बजाय कम लागत में बकरी पालन अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते है तथा स्वरोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकते है। उन्होंने यह भी बताया की कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा प्रगतिशील किसानो, उद्यमियों, शिक्षित बेरोजगार युवाओं को व्यावसायिक बकरी पालन के साथ जोड़ने का काम किया जा रहा है।

डा. अनुपम कृष्ण दीक्षित एवं डा. मनोज कुमार सिंह, वैज्ञानिक, केन्द्रिय बकरी अनुसंधान संस्थान, मखदूम, मथूरा ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्याख्यान दिए, जिसे प्रशिक्षणार्थियों द्वारा सराहा गया।

डॉ. महेश चन्द्र, विभागाध्यक्ष (प्रसार शिक्षा) ने समापन बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने बताया कि बकरी पालन मुख्यतः महिलाओं के द्वारा परिवार के जीवीकोपार्जन हेतु किया जाता है तथा आज के परिवेश में युवाओं द्वारा भी बकरी पालन व्यवसाय में काफी रूचि ली जा रही है, जो बकरी पालन से अत्यधिक लाभ की ओर इशारा करता है।

इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को बकरियों की प्रमुख नस्लों एवं उच्च गुणों वाली बकरी का चुनाव, कम लागत में आवास का निर्माण, प्रजनन प्रबंधन, विभिन्न शारीरिक अवस्थाओं में पोषण प्रबंधन, प्रमुख रोग एवं निदान आदि के बारे में बताया गया। साथ ही मादा बकरियों की प्रसव पूर्व एवं पश्चात देखभाल, मेमनों की देखभाल, बकरी फार्म पर रखे जाने वाले आवश्यक रिकॉर्ड और इसके पालन को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओ के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिल्ली, तथा उत्तर प्रदेश के बरेली, कन्नौज, कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बदयूं आदि जनपदों के 52 कृषको एवं युवाओ (51 पुरुष और एक महिला) ने सहभागिता दर्ज कराई।

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