RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1992 का यह घोटाला रुपए 4025 करोड़ का था। जिसमें सबसे ज्यादा SBI के साथ 600 करोड़ fraud किया गया था। इस घोटाले का खुलासा करने वाली सुचेता दलाल,जो टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार थी। इन्हें सन 2006 में पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया।

गरीबी खत्म! 786 नंबर वाले 20 के नोट को यहां बेचने पर मिल रहे 16 लाख रुपये, जानिए आसान तरीका

नई दिल्लीः वैश्विक बाजार में इन दिनों गरीबों की बल्ले-बल्ले हो रही है, क्योंकि कई कंपनियों ने ऐसे ऑफर दिये हैं, जिससे हर किसी का दिल लूट लिया है। अब तक जरूरी नहीं कि मालामाल होने के बिजनेस और नौकरी का होना जरूरी हो। बस पता नहीं घर बैठे किस्मत किस दिन चमक जाए, जिसके लिए आपको कुछ करने की जरूरत होगी।

आप आराम से घर बैठे मोटी रकम कमाने का सपना साकार कर सकते हैं। अब वैश्विक बाजार में पुराने नोट और सिक्कों के बदले मोटी रकम कमाने का मौका मिल रहा है, जिसका आप आराम से लाभ उठा सकते हैं। आपके पास जेब या गुल्लक में 20 का नोट रखा है तो फिर आराम से 4 लाख रुपये में बिक्री कर अमीर बनने का सपना साकार कर सकते हैं। इस नोट की सेल के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं, जिनका पालन करना जरूरी होगा।

अब गांव में नहीं बजती बैलों की घंटियां

अब गांव में हीरा-मोती की जोड़ियां बमुश्किल दिखती हैं। उसके गले में घंटियों की आवाज मंद हो गयी है। महादेव जी का बसहा बैल अर्थात् नंदी भी नहीं दिखता है। धरती को हरा-भरा रखने वाले, कंधे पर बोझ उठाने वाले हीरा-मोती की जगह ट्रेक्टर ने ले ली है। प्रेमचंद की कहानी ’दो बैलों की कथा’ को समाज भूलता जा रहा है। न झूरी रहा, न पशुप्रेम। अब जिधर देखो, उधर बेदर्द गया व दढ़ियल (जल्लाद) जान पड़ता है। उक्त कहानी में पशु के अंदर व्याप्त मानवीय गुणों व मनुष्य की मनोदशा का सजीव चित्रण किया गया है। मुख्य पात्र झूरी पशु प्रेम को रेखांकित करता है। लेखक ने बैलों को निहायत ही सीधापन, सहिष्णुता व कर्मठता का बखान किया है।

परिणामतः प्रदूषणमुक्त जुताई से हरियाली के साथ-साथ खेतों को पर्याप्त गोबर खाद मिलना बीते दिनों की बात हो गयी है। ट्रेक्टर की कर्कश आवाज वातावरण में जहर घोल रही है। धरती के कोमल सीने को ट्रेक्टर में लगे फार (तेज ब्लेड) चीरते-फाड़ते आगे बढ़ रहे हैं। बैलों की संख्या दिनानुदिन घटती जा रही है। बैल पालक प्रेमचंद की कहानी के झूरी का चरित्र निभाना खर्चीला समझते हैं। जबकि बैल का अस्तित्व सिंधु बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है घाटी सभ्यता से पाया जाता है। कई देशों में बैलों की पूजा-उपासना की जाती है। बिहार, झारखंड व अन्य राज्यों में महापर्व छठ के अवसर पर सूर्यदेव के साथ-साथ बैलों की भी पूजा की जाती है। ताम्र युग में बैल को वृषभ राशि के प्रतीक के रूप में मान्यता दी गयी थी। मिस्र में बैलों का एपिस (मिस्र के देवता) के रूप में पूजा की जाती है। पर, आधुनिकता व मशीनीकरण की वजह से बैलों की तस्करी बढ़ती जा रही है। हीरे और मोती विलुप्ति के कगार पर हैं।

BIG BULL: बिना पैराशूट शेयर बाजार की सबसे बड़ी उड़ान, शानदार रोल में अभिषेक

बिग बुल पोस्टर

  • नई दिल्ली,
  • 19 मार्च 2021,
  • (अपडेटेड 19 मार्च 2021, 10:46 AM IST)

बिना पैराशूट के तुम शेयर बाजार में इतनी बड़ी उड़ान कैसे भरोगे. जवाब- मैं इंडिया का पहला बिलेनियर बनकर दिखाउंगा. यही है अभिषेक बच्चन की नई फिल्म बिग बुल की कहानी जहां पर एक्टर हर्षद मेहता का किरदार निभाने जा रहे हैं. मेकर्स की तरफ से फिल्म का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है और उसका सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है.

बिग बुल का ट्रेलर

बिग बुल का ट्रेलर ट्रेंड सिर्फ इसलिए नहीं कर रहा कि ये काफी शानदार है, या कह लीजिए अभिषेक ने हर्षद मेहता के रोल में गदर मचा दिया है. असल में ट्रेलर के साथ तुलना वाला दौर शुरू हो गया है. अभिषेक को लगातार प्रतीक गांधी की एक्टिंग वाले तराजू पर तोला जा रहा है. स्कैम 1992 में प्रतीक के शानदार काम के बाद अभिषेक का फिर वहीं रोल प्ले करना किसी बड़ी चुनौती से कम नही है. ऐसे में ट्रेलर में मेकर्स की तरफ से पूरी कोशिश की गई है कि अभिषेक को कुछ लीक से हटकर दिखाया जाए. कहानी में कुछ नया ऑफर किया जाए.

Kalyan Traffic सड़क के दोनों ओर पार्किंग से नागरिक परेशान, युवा सेना ने की कार्रवाई की मांग

There was chaos in the intersections - vehicles increased, signal closed

File Photo

कल्याण : कल्याण (Kalyan) स्टेशन (Station) के पास वार्ड संख्या 36 के बैल बाजार क्षेत्र में मुख्य सड़क (Road) के दोनों ओर मनमाने ढंग से वाहनों (Vehicles) की पार्किंग (Parking) के कारण जाम की स्थिति बनी रहती है। जिससे नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की शिकायत और इससे राहगीरों की परेशानी को देखते हुए युवासेना ने यातायात को सही ढंग से नियंत्रित कर कार्रवाई करने की मांग की है। इस संबंध में युवा सेना के विधानसभा समन्वयक प्रतीक पेणकर ने यातायात पुलिस को पत्र देकर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।

Harshad Mehta के जीवन का Turning-Point

शेयर मार्केट में अपनी रुचि को देखते हुए। इन्होंने 1984 में अपने भाई के साथ,खुद की एक कंपनी शुरू की।इसका नाम Grow More Research & Asset Management था। इन्होंने मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में मेंबरशिप भी ले ली। हर्षद ने साल 1986 में trading करना शुरू कर दिया। 1990 में बहुत से लोंगो ने भी, हर्षद की farm में invest करना शुरू कर दिया।

90 का दशक आते-आते हर्षद को, उनकी पहचान मिलना, शुरू हो गई थी। लगभग हर अखबार और मैगजीन में हर्षद का चेहरा बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है दिखाई पड़ने लगा था। इसी दौरान देश के बड़े-बड़े लोगों के साथ, हर्षद का उठना-बैठना हो गया था। तब ऐसा भी माना जाता था। हर्षद जिस कंपनी के शेयरों को खरीदता था। उनकी कीमतें बहुत तेजी से बढ़ जाती थी। इसी दौरान हर्षद ने जब ACC के शेयर खरीदे। उस समय, उस शेयर की कीमत मात्र ₹200 थी। जो कि हर्षद के खरीदने के बाद ही, सीधे ₹9000 तक चली गई।

Harshad Mehta की Life-Style

हर्षद मेहता की जिंदगी, किसी Bollywood के सुपरस्टार से कम नहीं थी। हर्षद के पास मुम्बई के वर्ली एरिया में, एक खूबसूरत sea-facing, 15000 sq feet का पेंटहाउस था। इसमें mini golf course और एक swimming pool भी था।हर्षद का lifestyle पूरी तरह से बदलता चला गया।

हर्षद को गाड़ियां बेहद पसंद थी। इनके पास एक से बढ़कर एक, लग्जरी गाड़ियों की भरमार थी।इसमें Toyota Corolla, Lexus LS 400, Toyot Sera नाम की Luxurious car थी। ये शायद उस समय के अमीरों के लिए भी महँगी थी। बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है बड़े-बड़े लोगों के साथ, उनका उठना-बैठना भी शुरू हो गया था।

Harshad Mehta की सफलता का राज

सभी लोग हर्षद की सफलता को लेकर, चकित थे। वहीं दूसरी ओर, सभी उनकी सफलता का राज जानने को उत्सुक भी थे। सभी यह सोच कर परेशान थे। आखिर हर्षद करता क्या है।आखिर कैसे शेयर में इतने बदलाव, इतनी जल्दी हो जाते है।

हर्षद की बैंकिंग सिस्टम में बहुत अधिक जान-पहचान थी। जिसका वह फायदा उठाया करता था। बैकों को जब भी पैसों की जरूरत होती है। वह सरकारी बांड को गिरवी रखते है। फिर दूसरे बैंकों से लोन लेते हैं। लेकिन अंत में bonds का लेन-देन नहीं होता। बल्कि एक रसीद से ही काम चल जाता हैं। यह सभी काम बिचौलियों के जरिए होते हैं। इन सब बातों का ज्ञान, हर्षद मेहता को भली-भाँति था।वह इसी नब्ज़ को दबोच चुका था।

इसी के चलते, हर्षद को कभी भी शेयर मार्केट में पैसों की कमी नहीं रहती थी। हर्षद ने इन पैसों को Share Market में लगाया। फिर बहुत सारा मुनाफा कमाया। इस रकम का अंदाजा, कोई भी ठीक ढंग से नहीं लगा सकता।

Harshad Mehta के Scam का खुलासा

कुछ ही समय बाद, Times of India की पत्रकार सुचेता दलाल ने, आखिरकार Harshad Mehta का भाड़ा फोड़ ही दिया। इसके बाद सुचेता ने The Scam नाम की एक किताब भी लिखी। हालांकि, सुचेता पहले काफी समय से, इस पूरे प्रकरण पर नजर रखे हुए थी। इससे जुड़े सभी तारों को, एक-एक कर खंगाल रही थी। अंत में सुचेता को सफलता, सन 1992 में जाकर मिली।

सुचेता को खबर मिली थी। हर्षद बैंकों से 15 दिन के लिए Loan लेता है। फिर 15 दिनों बाद वह Loan चुका देता है। जबकि आश्चर्य की बात यह थी। कि कोई भी बैंक 15 दिनों के लिए लोन नहीं देता। इन सब के लिए, हर्षद अपने तेज दिमाग का, भरपूर इस्तेमाल किया करता था।

मेहता ने stamp paper और bank recipt का इस्तेमाल करके, करोडों रुपये कमाए।उस वक्त जब एक बैंक को दूसरे बैंक से government security लेनी होती थी।तो उस security को दिलवाने का काम broker का होता था। एक broker इन दोनों banks की कड़ी बनकर deals बैल एक बैल बाजार का प्रतीक है करवाता था। यहाँ broker हर्षद मेहता थे। इन्होंने सिस्टम की बुरी हालत का भरपूर फायदा उठाया।

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