On the day of MCD polls on 4th Dec, Delhi Metro train services on all Lines will start from 4am from all terminal stations.Trains will run with a frequency of 30 minutes on all Lines till 6am.After 6am, Metro trains will run as per normal Sunday timetable throughout the day: DMRC pic.twitter.com/2zL5oIVEoJ — ANI (@ANI) December 2, 2022

दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी)

दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) दिल्ली के नगर निगमों में से एक है, भारत के पूर्व नगर निगम को तीन (“ट्राइफुरेशन”) में बांटा गया था। इसके अलावा, यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में पांच स्थानीय निकायों में से एक है, अन्य उत्तर दिल्ली नगर निगम, पूर्वी दिल्ली नगर निगम, नई दिल्ली नगर परिषद और दिल्ली छावनी बोर्ड हैं।

ट्राइफुरेशन से पहले, दिल्ली नगर निगम एक मेगा नगर निगम था, जो एक स्वायत्त निकाय था जो दिल्ली, भारत राज्य में दिल्ली के जिलों को नियंत्रित करता था। एमसीडी राजधानी शहर में 11 एमएसीडी क्या है मिलियन नागरिकों की अनुमानित जनसंख्या से अधिक नागरिक सेवाओं को प्रदान करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी नगर पालिकाओं में से एक थी। तत्कालीन एकीकृत नगरपालिका निगम 1,397.3 वर्ग किमी (539.5 मील²) के क्षेत्र को कवर करती हैं

इस साल महिला ही होगी दिल्ली की Mayor, जानिए महापौर चुनने के लिए क्या है नियम

MCD Election Result: एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिला है. AAP ने 134 सीटों पर जीत दर्ज की है. लेकिन अभी भी जरूरी नहीं है कि आम आदमी पार्टी का ही मेयर चुना जाएगा. दरअसल मेयर का चुनाव दिल्ली के लोकसभा सांसद, राज्यसभा सांसद और पार्षद मिलकर करते हैं. इसके अलावा भी एमसीडी एक्ट के कुछ नियम ऐसे हैं, जिसकी वजह से मेयर को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है.

Municipal Corporation of Delhi

Municipal Corporation of एमएसीडी क्या है Delhi

शशिकांत सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 07 दिसंबर 2022,
  • (Updated 07 दिसंबर 2022, 10:02 PM IST)

पहले साल महिला के लिए मेयर पद आरक्षित

तीसरे साल एससी के लिए मेयर पद आरक्षित

दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजे आ गए हैं. नतीजों के बाद अब मेयर को लेकर जंग तेज हो गई है. हार के बाद भी बीजेपी ने अपना मेयर होने का दावा किया है तो आम आदमी पार्टी मेयर पद को लेकर आश्वस्त है. लेकिन अगर नियमों पर नजर डालें तो सिर्फ चुनाव में जीत से मेयर का पद तय नहीं होता है. मेयर बनाने का काम सिर्फ पार्षदों के हाथ में है. एमसीडी के कुछ नियम ऐसे हैं, जिसकी वजह से बीजेपी मेयर पद को लेकर उत्साहित है. चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में हार के बाद भी बीजेपी ने अपना मेयर बनाया है. इसलिए बीजेपी के दावे को लेकर हलचल तेज हो गई है.

AAP की जीत, मेयर पर बीजेपी का दावा-
एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है. जबकि बीजेपी दूसरी बड़ी पार्टी बनी है. एमसीडी चुनाव में सबसे खराब प्रदर्शन कांग्रेस का रहा है. कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है. आम आदमी पार्टी ने 134 सीटों पर जीत दर्ज की है. बीजेपी को 104 सीटों पर जीत हासिल हुई है. जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ 9 सीटें आई हैं. भले ही सीटों में बीजेपी पिछड़ गई है. लेकिन पार्टी ने मेयर पद पर दावा ठोका है. बीजेपी नेता अमित मालवीय ने ट्वीट किया और कहा कि मेयर कौन बनता है? ये इसपर निर्भर है कि पार्षद किस तरह से मतदान करते है. मालवीय ने चंडीगढ़ में बीजेपी का मेयर चुने जाने का उदाहरण दिया.

क्या बीजेपी का हो सकता है मेयर-
एमसीडी में AAP की जीत हुई है. उसे पूर्ण बहुमत मिला है. लेकिन इसके बावजूद ये तय नहीं है कि आम आदमी पार्टी का ही मेयर बनेगा. क्योंकि एमसीडी में मेयर चुनने का नियम अलग है. इन नियमों की वजह से बीजेपी को बल मिला है. फिलहाल AAP के 134 पार्षद जीतकर आए हैं. जबकि बीजेपी के एमएसीडी क्या है पास 104 पार्षद हैं. लेकिन मेयर का चुनाव एमसीडी की बैठक में पार्षद करेंगे. अगर चुनाव में क्रॉस वोटिंग होती है तो किसी भी पार्टी का मेयर बन सकता है.

मेयर चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं-
दिल्ली में मेयर के चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होगा. इसका मतलब है कि पार्षद किसी भी मेयर उम्मीदवार को वोट कर सकते हैं. दरअसल कानून है कि नगर निकाय चुनाव में दल बदल कानून लागू नहीं होता है. अगर कोई पार्षद क्रॉस वोटिंग करता है तो उसे अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता.

मेयर के चुनाव में केंद्र की भूमिका-
एमसीडी एक्ट की धारा 53 के मुताबिक हर वित्तीय वर्ष की पहली बैठक में महापौर का चुनाव होता है. यानी की अप्रैल महीने में पहली वित्तीय बैठक होती है. लेकिन इस बार चुनाव दिसंबर महीने में हुए हैं. इसलिए मेयर चुनने का अधिकार स्वत: ही केंद्र सरकार के पास चला गया है. अब केंद्र सरकार की भूमिका बढ़ गई है. नियम के मुताबिक एमसीडी के कमिश्नर चीफ सेक्रेटरी के जरिए एलजी को बैठक बुलाने और मेयर के चुनाव के लिए प्रिसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त करने को लिखेंगे. इसको लेकर ये भी परंपरा है कि एलजी गृहमंत्रालय से हरी झंडी के बाद ही इसे मंजूरी देते हैं. जब तक महापौर का चुनाव नहीं होता है तब तक केंद्र सरकार के जरिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की जा सकती है. जो महापौर के चुनाव तक एमसीडी के कामकाज को देख सके. केंद्र सरकार ने मई 2022 में आईएएस अधिकारी अश्विनी कुमार को एकीकृत एमसीडी के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किया है.

मेयर के लिए कौन एमएसीडी क्या है करता है वोटिंग-
दिल्ली में मेयर के चुनाव में सिर्फ पार्षद ही वोट नहीं डालते हैं. इसमें दिल्ली के सांसद भी वोट करते हैं. इसका मतलब है कि 250 पार्षद, 7 लोकसभा सासंद और 3 राज्यसभा सासंद मिलकर मेयर का चुनाव करेंगे. इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष के मनोनीत 14 विधायक भी मेयर पद के लिए वोट डालते हैं. इसलिए दिल्ली में मेयर बनने के लिए 138 वोट पाना जरूरी है. आपको बता दें कि दिल्ली में सातों लोकसभा सांसद एमएसीडी क्या है बीजेपी के हैं, जबकि तीनों राज्यसभा सांसद आम आदमी पार्टी के हैं.

कैसे होता है मेयर का चुनाव-
एमसीडी एक्ट के मुताबिक चुनाव के बाद जब सदन की पहली बैठक होती है. तब मेयर के चुनाव की प्रकिया शुरू होती है. पहले मेयर पद के लिए नामांकन होता है और उसके बाद पार्षद वोटिंग के जरिए मेयर चुनते हैं. दिल्ली में पार्षदों का कार्यकाल 5 साल के लिए होता है. लेकिन मेयर का कार्यकाल सिर्फ एक साल के लिए होता है. पार्षद हर साल नया मेयर चुनते हैं.

पहले साल महिला ही मेयर-
दिल्ली नगर निगम एक्ट के मुताबिक पहले साल महिला मेयर होना अनिवार्य है. पहले साल के लिए मेयर का पद महिला पार्षद के लिए आरक्षित है. इतना ही नहीं, ये भी तय है कि तीसरे साल अनुसूचित जाति एमएसीडी क्या है का ही मेयर होगा. बाकी बचे 3 सालों के लिए मेयर का पद अनारक्षित है. कोई भी पार्षद मेयर का चुनाव लड़ सकता है.

MCD Election Result: एमएसीडी क्या है भाजपा नेताओं ने मेयर अपना होने का दावा किया, क्या है इसकी वजह, जानें

एमसीडी चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। इससे चुनाव से पहले एमएसीडी क्या है आम आदमी पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस या भाजपा के नेता जो पार्षद बन गए हैं, भाजपा उन्हें शामिल करने की कोशिश कर सकती है।

भाजपा समर्थक जश्न मनाते हुए

दिल्ली नगर निगम (MCD) में आम आदमी पार्टी (आप) निर्णायक बढ़त बना चुकी है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं कि एमसीडी में मेयर उनका ही होगा। आखिर क्या कारण है कि भाजपा नेता इतने आत्मविश्वास से यह दावा कर रहे हैं।

सबसे बड़ा कारण इसके पीछे यह है कि एमएसीडी क्या है एमसीडी चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। इससे चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस या भाजपा के नेता जो पार्षद बन गए हैं, भाजपा उन्हें शामिल करने की कोशिश कर सकती है। इसके अलावा भाजपा कांग्रेस व निर्दलीय पार्षदों को भी जोड़ने के लिए जुगत भिड़ा सकती है।


इससे पहले दिल्ली भाजपा के कई नेता, मसलन- तजिंदर पाल सिंह बग्गा, मनजिंदर सिंह सिरसा समेत कई नेताओं ने ट्वीट कर बयान दिया है कि मेयर भाजपा का ही बनेगा।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मेयर तो भाजपा का ही बनेगा। केजरीवाल जी जो 220 सीटों का दावा कर रहे थे… आज के रुझान देखकर उनके हौसले पस्त हो गए हैं। क्योंकि दिल्ली की जनता ने एक बार फिर भाजपा में विश्वास जताया है। तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी ट्वीट कर दावा किया कि इस बार फिर एमसीडी में दिल्ली में भाजपा का मेयर बनने वाला है।

विस्तार

दिल्ली नगर निगम (MCD) में आम आदमी पार्टी (आप) निर्णायक बढ़त बना चुकी है। इसके बावजूद भारतीय जनता पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं कि एमसीडी में मेयर उनका ही होगा। आखिर क्या कारण है कि भाजपा नेता इतने आत्मविश्वास से यह दावा कर रहे हैं।

सबसे बड़ा कारण इसके पीछे यह है कि एमसीडी चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है। इससे चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी में शामिल हुए कांग्रेस या भाजपा के नेता जो पार्षद बन गए हैं, भाजपा उन्हें शामिल करने की कोशिश कर सकती है। इसके अलावा भाजपा कांग्रेस व निर्दलीय पार्षदों को भी जोड़ने के लिए जुगत भिड़ा सकती है।

इससे पहले दिल्ली भाजपा के कई नेता, मसलन- तजिंदर पाल सिंह बग्गा, मनजिंदर सिंह सिरसा समेत कई नेताओं ने ट्वीट कर बयान दिया है कि मेयर भाजपा का ही बनेगा।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि मेयर तो भाजपा का ही बनेगा। केजरीवाल जी जो 220 सीटों का दावा कर रहे थे… आज के रुझान देखकर उनके हौसले पस्त हो गए हैं। क्योंकि दिल्ली की जनता ने एक बार फिर भाजपा में विश्वास जताया है। तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी ट्वीट कर दावा किया कि इस बार फिर एमसीडी में दिल्ली में भाजपा का मेयर बनने वाला है।

MCD Election: स्कूल से लेकर मेट्रो तक के लिए जारी हुई गाइडलाइंस, जानें क्या हैं निर्देश

MCD Election: दिल्ली में एमसीडी चुनाव को लेकर बड़े बदलाव किए गए हैं. मेट्रो, स्कूल और शराब की बिक्री करने को लेकर सभी के लिए गाइडलाइन जारी किए गए हैं.

MCD Election: स्कूल से लेकर मेट्रो तक के लिए जारी हुई गाइडलाइंस, जानें क्या हैं निर्देश

MCD Election: दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के चुनाव के मद्देनजर दिल्ली सरकार के सभी स्कूल शनिवार और सोमवार को बंद रहेंगे. दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (डीओई) ने यह जानकारी दी. सर्कुलर में कहा गया कि शिक्षा निदेशालय के सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सूचित किया जाता है कि एमसीडी चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर तीन दिसंबर (शनिवार) को स्कूलों में अवकाश घोषित किया जाएगा.

Government schools in Delhi to be closed on December 3, in view of preparations for the December 4 MCD elections. pic.twitter.com/S6G4plzcgr

— ANI (@ANI) December 2, 2022

10 दिसंबर को होगी पढ़ाई
सर्कुलर में कहा गया है कि लगभग 90 प्रतिशत स्कूल कर्मचारी चुनाव ड्यूटी में तैनात रहेंगे, इसलिए सभी एमसीडी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को पांच दिसंबर को भी विद्यार्थियों के लिए स्कूल बंद करने का निर्देश दिया जाता है. सर्कुलर के मुताबिक, डीओई ने प्रधानाध्यापकों को सूचित किया है कि तीन दिसंबर की छुट्टी के एवज में 10 दिसंबर को कक्षाएं संचालित की जाएगी. जारी सर्कुलर में छात्रों, स्कूल स्टाफ सदस्यों, एसएमसी सदस्यों और अभिभावकों को इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया था. बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी एमसीडी चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार है, जो 4 दिसंबर को निर्धारित है. एमसीडी के 250 वार्डों के लिए कुल 13,665 मतदान केंद्रों पर चुनाव होंगे.

मेट्रो के समय में भी बदलाव
चुनाव को लेकर मेट्रो के समय में भी बदलाव किया गया है. दिल्ली मेट्रो रेलवे ने कॉपोर्रेशन ने जानकारी दिया कि मेट्रो के परिचालन में बदलाव किए गए हैं. एमसीडी चुनाव में वोटिंग वाले दिन 4 दिसंबर यानी रविवार के दिन मेट्रो 4 बजे सुबह से ही शुरू हो जाएगी. इसके अलावा सभी लाइनों पर सुबह 4 से 6 बजे तक हर आधे घंटे के अंतराल पर मेट्रो चलेगी. वहीं सुबह 6 बजे से सामान्य दिनों की तरह परिचालन शुरु रहेगी.

On the day of MCD polls on 4th Dec, Delhi Metro train services on all Lines will start from 4am from all terminal stations.Trains will run with a frequency of 30 minutes on all Lines till 6am.After 6am, Metro trains will run as per normal Sunday timetable throughout the day: DMRC pic.twitter.com/2zL5oIVEoJ

— ANI (@ANI) December 2, 2022

शराब की ब्रिकी को लेकर सूचना
इसके अलावा दिल्ली में शुक्रवार के दिन से ही दिल्ली में शराब की बिक्री बंद है. जानकारी के मुताबिक, 2 से 4 दिसंबर और 7 दिसंबर को दिल्ली में शराब की बिक्री नहीं होगी. दिल्ली के किसी क्लब या बार में भी शराब नहीं मिलेगी.

Delhi MCD Election 2022: एमसीडी चुनाव में कम वोटिंग के क्या मायने, AAP या BJP. किसे मिल सकती है जीत?

एमसीडी चुनाव (Delhi MCD Election 2022) में अधिक से अधिक वोट पड़े इसके लिए चुनाव आयोग के साथ-साथ राजनीतिक दलों ने भी तमाम प्रयास किए। इसके बावजूद कोई लहर नहीं दिखी। नजीता यह रहा कि 50.47 प्रतिशत ही मतदान हो सका जो एमएसीडी क्या है वर्ष 2012 और 2017 से भी कम है।

नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। Delhi MCD Election 2022: कम मतदान होने के मायने क्या इस पर अब भी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता, क्योंकि कई ऐसे उदाहरण है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के बाद भी सत्तारुढ़ दल ने वापसी की है जबकि कुछ मामलों में सत्ता परिवर्तन हो गया है।

ऐसे किसी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा। हालांकि यह जरुर कहा जा सकता है कि मतदान का प्रतिशत कम होने के पीछे भी वह मतदाता भी आगे नहीं आए जो कि प्रत्याशियों की जीत हार को तय करते हैं। ऐसे में प्रत्याशियों में जीत और हार का आंकड़ा बहुत नजदीक का हो सकता है।

आने वाले दिनों में मिल सकती है राहत

संभव है कि 100 या दौ सौ या फिर 1000 मतों के अंतर से जीत हार तय हो। चूंकि प्रत्याशियों की भी संख्या ज्यादा नहीं थी ऐसे में कई सीटों पर भाजपा और आप का कड़ा मुकबला देखा गया है। यह परिणाम में कितना परिवर्तित होता है सात दिसंबर को मतगणना से पता चल जाएगा।

'मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं'

मतदान प्रतिशत कम रहने के मायने का विश्वलेषण करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर संगीत रागी कहते हैं कि मतदान के प्रतिशत से किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं है, क्योंकि कई बार कम मतदान सत्तारुढ़ दल की वापसी कराता है तो कई मामलों में यह परिवर्तन भी करा देता है।

राहुल गांधी आम आदमी की आवाज कर रहे बुलंग- अनिल

ऐसे में यह कहना कि इससे भाजपा या आम आदमी पार्टी (आप) को लाभ होगा यह सही नहीं होगा। हां कम मतदान का मतलब यह है कि दिल्ली नगर निगम के चुनाव में दिल्ली के मतदाता रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जमीनी मुद्दों के लिए तो यही चुनाव काम करता है। हालांकि बीते चुनावों में यह देखा गया है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में यही दिल्ली के मतदाता बढ़चढ़कर हिस्सा लेते हैं वहीं, मतदाता दिल्ली नगर निगम के चुनाव में इतनी रुचि नहीं लेते हैं।

मामले को लेकर अदालत ने कही बड़ी बात

2019 के चुनाव में दिल्ली में हुआ था 67.4 प्रतिशत मतदान

लोकसभा के 2014 के चुनाव में दिल्ली में 66.4 प्रतिशत तो 2019 में 67.4 प्रतिशत मतदान हुआ था। इसी प्रकार वर्ष 2015 के निगम विधानसभा चुनाव में 67.13 प्रतिशत तो 2020 में 62.59 प्रतिशत मतदान हुआ था।बाक्स 43 प्रतिशत मतदान पर भी हो गया था सत्ता परिवर्तनदिल्ली नगर निगम के चुनाव में कम मतदान का कोई मायना लगाना उचित नहीं होगा, क्योंकि 2002 के चुनाव में जिस कांग्रेस ने 134 में से 108 सीटों जीत दर्ज की थी वहीं, कांग्रेस 2007 के चुनाव में हार गई थी। जबकि मतदान का प्रतिशत मात्र 43.24 प्रतिशत रहा था।

पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर बदमाश की तलाश कर रही है।

2007 के चुनाव में 272 सीटों में से भाजपा को 164 सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस को मात्र 67 सीटें मिली थी। वर्ष 2012 में तमदान का प्रतिशतल 10 प्रतिशत बढ़ा बावजूद इसके सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ। 2012 के निगम चुनाव में भाजपा को 272 में से 136 सीटों पर जीत मिली थी। इसी प्रकार 53.55 प्रतिशत का मतदान प्रतिशत होने के बाद भाजपा 272 में से 181 सीटों पर विजयी रही।

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